Sunil Gavaskar Response on Attending Pakistani Show: भारतीय दिग्गज सुनील गावस्कर ने एशिया कप 2025 के दौरान एक पाकिस्तानी क्रिकेट शो के बतौर गेस्ट पैनल में शामिल होने को लेकर हुई आलोचना का जवाब दिया है. यह पूरा विवाद द हंड्रेड नीलामी में सनराइजर्स लीड्स द्वारा पाकिस्तान स्पिनर अबरार अहमद को खरीदने से शुरू हुआ. गावस्कर ने सनराइजर्स फ्रेंचाइजी की आलोचना की थी. गावस्कर ने कहा था कि भारतीय मालिकों द्वारा इस तरह की खरीदारी अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय हताहतों की संख्या में योगदान देती है - यह टिप्पणी पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच राजनयिक तनाव के संदर्भ में की गई. हालांकि, फैंस ने जरा भी देर नहीं कि गावस्कर को यह याद दिलाने में कि वह भी पाकिस्तानी शो में शामिल हुए थे. गावस्कर ने इस इसका बचाव किया है और उन्होंने एक बार फिर अपनी बात दोहराई है.
अबरार के मुद्दे पर जिस तरह से गावस्कर ने प्रतिक्रिया दी और फिर जब उनसे सवाल हुआ कि क्या एशिया कप के दौरान शो में कमेंटेटर या पैनलिस्ट के रूप में उन्होंने भी काम किया है, इस सवाल पर गावस्कर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. गावस्कर ने मुंबई मिरर से बात करते हुए कहा,"हां, मैं आईसीसी और एसीसी के कमेंट्री पैनल में रहा हूं. राजस्व आईसीसी और एसीसी से सभी हिस्सा लेने वाले देशों को जाता था, लेकिन किसी भारतीय इकाई से नहीं. मुझे समझ नहीं आता कि आप कैसे कह सकते हैं कि मैं भी इसमें कंट्रीब्यूटर हूं क्योंकि मैं किसी भी कमेंटेटर, भारतीय या किसी अन्य राष्ट्रीयता को कोई भुगतान नहीं कर रहा हूं."
सुनील गावस्कर ने अपनी बात दोहराते हुए कहा,"मैं अन्य खेलों के बारे में नहीं जानता और वे क्या कर रहे हैं. मैं बस यही प्रार्थना कर रहा हूं कि भारतीय पाकिस्तानियों को भुगतान करना बंद कर दें. यदि आपने ध्यान दिया हो, तो दशकों से कभी भी इसका उलटा नहीं हुआ है."
पाकिस्तान के स्पिनर अबरार अहमद को सनराइजर्स लीड्स ने GBP 190,000 (लगभग 2.35 करोड़ रुपये) में खरीदा था. द हंड्रेड की इस फ्रेंचाइजी का मालिकाना हक, आईपीएल फ्रेंचाइजी सनराइजर्स हैदराबाद के मालिकों के पास ही है. ऐसे में इस कदम की सोशल मीडिया पर फैंस ने जमकर आलोचना की.
अबरार को खरीदने पर सुनील गावस्कर ने अपने मिड-डे कॉलम में लिखा था,"हालांकि देर से ही सही, यह एहसास हुआ कि पाकिस्तानी खिलाड़ी को जो फीस दी जाती है, जो बाद में उनकी सरकार को आयकर का भुगतान करता है जो हथियार और हथियार खरीदता है, वह अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय सैनिकों और नागरिकों की मौत में योगदान देता है, जिससे भारतीय संस्थाएं पाकिस्तानी कलाकारों और खिलाड़ियों पर विचार करने से भी परहेज करती हैं." उन्होंने आगे लिखा, "चाहे भारतीय कंपनी हो या भारतीय ईकाई की विदेशी सहायक कंपनी, जो पैसा दे रही है, अगर मालिक भारतीय है तो वह भारतीय हताहतों में योगदान दे रहा है. यह बहुत सरल है."
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