
1981 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर बहुचर्चित बहिष्कार की घटना के लगभग तीन दशक बाद पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने विरोध जताने के अपने तरीके पर आज खेद जताया और कहा कि यह उनकी तरफ से बहुत बड़ी गलती थी।
भारत की सलामी जोड़ी सुनील गावस्कर और चेतन चौहान की जोड़ी बीच मैदान से बल्लेबाज़ी करने से लौटने लगी थी। करीब तीन दशक के बाद सुनील गावस्कर ने मौजूदा टेस्ट के दूसरे दिन इस घटना पर खेद जताते हुए माफी मांगी है। दरअसल, तब सुनील गावस्कर को डेनिस लिली की एक गेंद पर अंपायर ने एलबीडब्ल्यू आउट दे दिया था।
गावस्कर के मुताबिक, गेंद उनके बल्ले से टकराने के बाद पैड पर लगी थी, लिहाजा वे विरोधस्वरुप काफी देर तक मैदान पर खड़े रहे। फिर उन्होंने बैट से पैड में मारकर इशारा भी किया और गुस्से में पवेलियन लौटने लगे, जिस पर डेनिस लिली ने कोई कमेंट पास किया।
इससे सुनने के बाद कप्तान गावस्कर वापस क्रीज तक आए और चेतन चौहान को लौटने के लिए कहा, फिर दोनों लौटने लगे, हालांकि अधिकारियों के बीच बचाव से मुकाबला फिर शुरू हुआ, लेकिन गावस्कर ने तीन दशक बाद कहा कि वह उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी, बतौर कप्तान उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। गावस्कर ने स्टार क्रिकेट पर संजय मांजरेकर और कपिल देव के साथ टी-ब्रेक के दौरान चर्चा में इस घटना का जिक्र करते हुए माफ़ी मांगी।