इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) में सोमवार को राजस्थान रॉयल्स पर जीत के बाद जिन दो खिलाड़ियों के सबसे ज्यादा चर्चे हैं, वो विदर्भ के लिए रणजी ट्ऱॉफी खेलने वाले प्रफुल हिंगे (Praful Hinge) और बिहार के उभरते पेसर शाकिब हुसैन हैं. खासकर हिंगे ने तो पहले ही ओवर में 3 विकेट लेकर वो कर कर दिखाया, जो उनसे पहले मेगा टूर्नामेंट के इतिहास में पहले कोई दूसरा बॉलर नहीं ही कर सका था. मैच में हिंगे ने 34 रन देकर 4 विकेट हासिल किए और इस प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया.
टेनिस बॉल से की शुरुआत
'जियोहॉटस्टरार' के 'टाटा आईपीएल: ड्रीम ऑन' पर प्रफुल्ल हिंगे ने अपनी क्रिकेट यात्रा की शुरुआत को याद करते हुए बताया कि जब वह छठी क्लास में थे, तो पिता को बताया कि वह क्रिकेट खेलना चाहते हैं. पिता ने प्रफुल्ल से कहा कि वह फिलहाल बहुत छोटे हैं और एक साल इंतजार करने को कहा. हालांकि, पिता ने बेटे को टेनिस बॉल से खेलने के लिए एक बैट लाकर दिया. टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलने वाले प्रफुल्ल को नहीं पता था कि सीजन बॉल से कैसे खेला जाता है. अगले साल स्कूल परीक्षा के बाद पिता ने प्रफुल्ल का दाखिला एक समर कैंप में करवा दिया.
पिता ने लिया यह वादा
प्रफुल्ल ने बताया, 'मैंने अपना सब कुछ झोंक दिया और खूब खेला. तभी मुझे पता चला कि अगर तेज गेंदबाजी करनी है तो अपनी बांह को घुमाना पड़ता है. इससे पहले मुझे यह बात नहीं पता थी दो महीने बाद, मेरे पिताजी ने कहा-यह तुम पर निर्भर करता है कि तुम इसे जारी रखना चाहते हो या नहीं. मैंने कहा, 'मैं खेलना चाहता हूं.' इस पर उन्होंने मुझसे कहा कि मुझे स्कूल, पढ़ाई और क्रिकेट, तीनों को एक साथ संभालना होगा. और मैं जो कुछ भी जरूरी था, उसे करने के लिए तैयार था. पहले दिन पापा ने मुझे क्लब में छोड़ा और उसके बाद, मैं खुद ही जाता रहा. वह केवल तभी आते, जब फीस जमा करनी होती थी. वह ज्यादा दखल नहीं देते थे, लेकिन उनका हमेशा सपोर्ट था.'
चोट से उबरकर की शानदार वापसी
प्रफुल्ल हिंगे को 2 साल से एमआरएफ पेस एकेडमी की तरफ से फोन आ रहे थे, लेकिन वह गए नहीं, आखिरकार जिस साल गए. वह उस साल चोटिल थे. वहां के फिजियो नवीन बाबू ने जांच की और बताया कि उनकी पीठ में स्ट्रेस फ्रैक्चर है. हिंगे की रिकवरी पर बहुत ध्यान दिया गया, लेकिन वे सात-आठ महीने बहुत मुश्किल थे.प्रफुल्ल को एक सीजन छोड़ना पड़ा और उसके बाद वापस आए. अंडर-23 सीजन में उन्होंने 25 से ज्यादा विकेट लिए. उसके बाद वह इमर्जिंग इंडिया कैंप का भी हिस्सा बने. जब प्रफुल्ल एमआरएफ एकेडमी गए तो पता चला कि प्रतिवर्ष 2 खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया भेजा जाता है. प्रफुल्ल ऑस्ट्रेलिया जाने के लिए काफी उत्सुक थे. इसलिए घरेलू सीजन में अच्छा प्रदर्शन किया और अपने सपने को पूरा किया.
'हार्दिक की हौसलाअफजाई याद रहेगी'
विजय हजारे ट्रॉफी के दौरान हार्दिक पांड्या के साथ मुकाबले को याद करते हुए प्रफुल्ल ने बताया, 'जब मैं उन्हें गेंदबाजी कर रहा था, तो मैं काफी घबराया हुआ था, क्योंकि हर कोई जानता है कि हार्दिक भाई किस तरह के बल्लेबाज हैं और वह क्या कर सकते हैं. लेकिन पहली गेंद के बाद मेरी घबराहट दूर हो गई और मैंने खुद से कहा कि मैं बिना किसी बेवजह के दबाव के गेंदबाजी कर सकता हूं. मैं खुद को लगातार याद दिलाता रहा कि हर बार अपनी सबसे अच्छी गेंद डालनी है. यॉर्कर मेरी पसंदीदा गेंद है. मैंने इनकी सबसे ज्यादा प्रैक्टिस की है. मैंने उन्हें अच्छी यॉर्कर गेंदें डालीं और बीच-बीच में कुछ बाउंसर भी डाले. एक रन लेने के बाद वह मेरे पास आए और कहा, 'प्रफुल भाई बहुत बढ़िया गेंदबाजी.' इससे मेरा आत्मविश्वास बहुत बढ़ गया. मैच के बाद मैं उनसे फिर मिला और उन्होंने कहा, 'आप बहुत अच्छा कर रहे हो. बस ऐसे ही करते रहो. मैं आपसे आईपीएल में मिलूंगा.'
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