Praful Hinge Father on His Son Cricket Journey; IPL 2026: "रंक से अमीरी तक" यह एक ऐसी बात है जो युवा पेसर प्रफुल्ल हिंगे्ल हिंगे के इंस्पायरिंग सफर को पूरी तरह से दिखाती है, जिनके पक्के इरादे और कड़ी मेहनत का फल आखिरकार सोमवार को सनराइजर्स हैदराबाद के लिए ड्रीम IPL डेब्यू के रूप में मिला. विदर्भ के इस तेज गेंदबाज़ ने डोमेस्टिक क्रिकेट में कई शानदार स्पेल डाले हैं, लेकिन राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ़ उनके शानदार चार विकेट ने न सिर्फ़ SRH को 57 रन से ज़बरदस्त जीत दिलाई, बल्कि उन्हें रातों-रात घर-घर में मशहूर कर दिया. पूरा देश अब हिंगे का सपोर्ट कर रहा है, जिन्होंने चेज़ के पहले ही ओवर में तीन तेज़ विकेट लेकर RR की बैटिंग लाइन-अप को तहस-नहस कर दिया.
हालांकि, हिंगे का IPL का सफर आसान नहीं था. उनका सफर चुनौतियों से भरा था, जिसमें पीठ की गंभीर चोट सबसे बड़ी रुकावटों में से एक साबित हुई. द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के साथ बातचीत में, प्रफुल्ल हिंगे के पिता, प्रकाश हिंगे ने बताया कि कैसे भारत के पूर्व पेसर और मौजूदा SRH बॉलिंग कोच वरुण एरॉन ने उनके बेटे को उस मुश्किल दौर से निकलने में मदद करने में अहम भूमिका निभाई.
प्रकाश हिंगे ने कहा, "वरुण एरॉन प्रफुल्ल हिंगे के करियर में एक फरिश्ते की तरह आए. उन्होंने बहुत इंजरी देखी है. जब प्रफुल्ल हिंगे को स्ट्रेस फ्रैक्चर हुआ, तो हम सबको लगा कि उनका क्रिकेट खत्म हो गया है. लेकिन वरुण ने उन्हें संभाला और ठीक होने में मदद की. उन्होंने सचमुच उस बुरे दौर में उनका हाथ थामा."
उन्होंने यह भी बताया कि ऑस्ट्रेलियाई लेजेंड ग्लेन मैकग्राथ, जो चेन्नई में MRF पेस फाउंडेशन में कोचिंग डायरेक्टर के तौर पर काम करते हैं, उन्होनें प्रफुल्ल हिंगे को एडवांस्ड ट्रेनिंग के लिए ब्रिस्बेन ले जाकर उनके करियर को बनाने में अहम भूमिका निभाई. प्रकाश हिंगे ने आगे कहा, "ग्लेन मैकग्राथ प्रफुल्ल हिंगे की लाइन और लेंथ से बहुत इम्प्रेस हुए और उन्हें ब्रिस्बेन ले गए. सारा खर्च MRF पेस फाउंडेशन ने उठाया. हमें एक पैसा भी नहीं देना पड़ा."
एक आम बैकग्राउंड से आने वाले - जहां उनके पिता महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में काम करते थे - प्रफुल्ल हिंगे का आगे बढ़ना लगन और जुनून का सबूत है. परिवार में पढ़ाई-लिखाई को प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन प्रफुल्ल हिंगे का असली मकसद क्रिकेट था.
प्रकाश हिंगे ने याद करते हुए कहा, "मैं सरकारी कर्मचारी था और मेरी बेटी चार्टर्ड अकाउंटेंट है. हमारे लिए पढ़ाई ही सब कुछ थी. लेकिन यह लड़का बहुत छोटी उम्र से ही क्रिकेट का दीवाना था. पूरे दिन गली क्रिकेट खेलता रहता था; मजबूरी में एकेडमी में डाला और फिर उसने ग्राउंड को ही अपना घर बना लिया."
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