अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मुकाबले में साई सुदर्शन ने बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए 104 गेंदों में 81 रनों की दमदार पारी खेली. हालांकि, वह शतक से चूक गए, जिसको लेकर सुदर्शन ने निराशा जाहिर की है. सुदर्शन ने कहा कि उनके पास बड़ी पारी खेलने का बढ़िया मौका था, लेकिन वह ऐसा करने में नाकाम रहे. हालांकि, उन्होंने बल्ले से अहम योगदान देने पर खुशी जताई. सुदर्शन ने केएल राहुल के मिलकर दूसरे विकेट के लिए 139 रनों की शानदार साझेदारी निभाई. टेस्ट के दूसरे दिन का खेल शुरू होने से पहले ब्रॉडकास्टर्स से बात करते हुए सुदर्शन ने कहा, 'मुझे लगता है, मैं सेट था, यह एक बड़ी पारी हो सकती थी. निश्चित रूप से निराश हूं, लेकिन सच में खुश हूं कि मैं टीम के लिए योगदान दे सका.' टी20 क्रिकेट से लंबे फॉर्मेट में बदलाव के बारे में पूछे जाने पर, सुदर्शन ने बताया, 'मुझे लगता है कि मानसिक तौर पर मेरे लिए यह कोई बड़ा फर्क नहीं है, क्योंकि मैं खेल को बहुत एक जैसा ही खेलता हूं, चाहे मैं कहीं भी जाऊं और खेलूं, फिर चाहे सफेद गेंद हो या फिर लाल. मेरे लिए यह सब फैसले लेने और कुछ छोटे-मोटे तकनीकी बदलाव करने के बारे में है, जिसके लिए हमारे पास तीन, चार दिन का समय था, जिससे मुझे लाल गेंद क्रिकेट में वापस आने में मदद मिली और यह बहुत अच्छा था.'
उन्होंने आगे कहा, 'निश्चित रूप से हमारे पास वीडियो थे, इसलिए मैंने उस पर काम किया. मैंने देखा कि गेंदबाज क्या गेंदबाजी कर सकते हैं और वे मेरे खिलाफ क्या कर सकते हैं. इसके साथ ही, मैं इस बारे में बहुत स्पष्ट था कि मैं गेम प्लान के साथ क्या करना चाहता हूं और जब मैं मैच में उतरा तो मैं क्या देखना चाहता था. यह मेरे मानसिक तौर पर वहां रहने और खुद पर भरोसा करने के बारे में ज्यादा था. मुझे लगता है कि इससे थोड़ा और फायदा हुआ.'
उन्होंने गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल और राष्ट्रीय टीम (नेशनल सेटअप) में उनके साथ के सहज तालमेल पर विशेष बल दिया, जहां वर्तमान में गौतम गंभीर मुख्य कोच की भूमिका में हैं. उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि हमारा आपसी तालमेल वास्तव में एक वरदान की तरह है. जिस तरह का रिश्ता हम शेयर करते हैं, वह बेहद शानदार है.'
उन्होंने आगे कहा, 'एक क्रिकेटर हमेशा मानसिक स्पष्टता और खेलने की स्वतंत्रता चाहता है, ताकि वह मैदान पर अपना स्वाभाविक खेल दिखा सके. यदि खिलाड़ी को यह भरोसा मिल जाए, तो वह अतीत की असफलताओं या भविष्य की चिंताओं से मुक्त हो जाता है. तब उसका पूरा ध्यान केवल वर्तमान पर केंद्रित रहता है. यदि किसी खिलाड़ी को ऐसी स्वतंत्रता मिलती है, तो मुझे लगता है कि खुद को अभिव्यक्त करने और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए वह सबसे अनुकूल स्थिति में होता है.'
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