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राजस्थान क्रिकेट संघ के चुनाव में नेता-पुत्र और राजनेताओं में दंगल, पार्टी के अनुशासन से बाहर दिख रहे नेता

अध्यक्ष पद पर स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय सिंह खींवसर और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह राठौड़ आमने-सामने हैं.

राजस्थान क्रिकेट संघ के चुनाव में नेता-पुत्र और राजनेताओं में दंगल, पार्टी के अनुशासन से बाहर दिख रहे नेता
RCA चुनाव में सियासी घरानों की एंट्री, नेता-पुत्रों के दंगल से गरमाई राजस्थान क्रिकेट की सियासत

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन यानी RCA के चुनाव में इस बार क्रिकेट के खेल की चिंता से ज्यादा सियासी पॉवर प्ले अधिक दिखाई दे रहा है. 29 सितंबर को होने वाले चुनाव में प्रदेश के कई बड़े राजनीतिक परिवारों के बेटे सीधे मैदान में उतर चुके हैं. अध्यक्ष पद पर स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय सिंह खींवसर और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह राठौड़ आमने-सामने हैं. इनके अलावा बृजकिशोर शर्मा का पैनल भी मैदान में है।यानी RCA की लड़ाई अब सिर्फ क्रिकेट संघ की कुर्सी की लड़ाई नहीं रही.  इसके साथ राजनीतिक रसूख, जिला क्रिकेट संघों पर पकड़ और राजनीतिक प्रभाव और साख सवाल भी जुड़ गया है. आज नामांकन वापसी का अंतिम दिन है उसके बाद तस्वीर साफ हो जाएगी कि आखिर आखिर RCA की कुर्सी के लिए सियासी घरानों में ये कौन कौन चुनावी मैदान में है.

दरअसल सितंबर को होने वाले राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव में सियासी पिच पर राजनीतिक परिवारों का घमासान है. क्रिकेट के इस पावर प्ले में मुकाबला अभी तक त्रिकोणीय है यानी तीन पैनल आमने-सामने हैं. एक तरफ स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय सिंह खींवसर, दूसरी तरफ पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह राठौड़ और तीसरे खेमे से बृजकिशोर शर्मा तीनों ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया है.

यानी RCA की कुर्सी के लिए इस बार मुकाबला सिर्फ क्रिकेट प्रशासकों के बीच नहीं है राजनीतिक घरानों की ताकत भी आमने-सामने दिखाई दे रही है. RCA चुनाव की इस पूरी कहानी में सबसे दिलचस्प बात है… तीन पैनलों का आमने-सामने होना।धनंजय सिंह खींवसर का अलग पैनल…पराक्रम सिंह राठौड़ का अलग पैनल…और बृजकिशोर शर्मा का पैनल…बृजकिशोर शर्मा के पैनल को अरुण चतुर्वेदी यानी सरकार के समर्थन से जोड़कर देखा जा रहा है.

वहीं पराक्रम राठौड़ ने नामांकन के बाद अपना नाम वापस लेने का संकेत दिया है।उन्होंने कहा है कि सरकार समर्थित पैनल को कोई दिक्कत न हो इसलिए वे नाम वापस ले सकते हैं और बृजकिशोर शर्मा की टीम को अपनी टीम बताया है.

ऐसे में RCA चुनाव का असली मुकाबला नाम वापसी के बाद ही साफ होगा. RCA चुनाव में इस बार सियासी परिवारों की मौजूदगी अध्यक्ष पद तक सीमित नहीं है।शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर ने उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया है।राज्यसभा सांसद और बीजेपी के वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवाड़ी के बेटे आशीष तिवाड़ी कोषाध्यक्ष पद की दौड़ में हैं।विधायक जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव ने सचिव और उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन किया है।यानी RCA की नई कार्यकारिणी के कई अहम पदों पर राजनीतिक परिवारों से जुड़े चेहरे मैदान में हैं।इसी वजह से चुनाव को लेकर सियासी चर्चा और तेज हो गई है।दूसरी तरफ धनंजय सिंह खींवसर का खेमा अभी मजबूती से मैदान में है।धनंजय गुट की तरफ से कहा गया है कि उन्हें सरकार की ओर से कोई निर्देश नहीं मिला था.

इसी वजह से उन्होंने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया.अब सवाल सिर्फ ये नहीं है कि कौन चुनाव लड़ रहा है सवाल ये है कि आखिरी वक्त तक कौन मैदान में रहता है। क्योंकि आज नाम वापसी के बाद RCA चुनाव की पूरी तस्वीर बदल सकती है.और उसके अगले दिन यानी 29 सितंबर को मतदान होना है.

लेकिन RCA चुनाव का असली खेल उम्मीदवारों से ज्यादा वोटरों के गणित में छिपा है। इस चुनाव में प्रदेशभर के क्रिकेट खिलाड़ी मतदान नहीं करेंगे। RCA की अंतिम मतदाता सूची में 38 मतदाता हैं।यही प्रतिनिधि नई कार्यकारिणी चुनेंगे.
यानी राजस्थान क्रिकेट की इस बड़ी संस्था की कमान तय करने के लिए हर एक वोट बेहद महत्वपूर्ण है। इसीलिए चुनाव से पहले जिला क्रिकेट संघों के प्रतिनिधियों का समर्थन हासिल करना सबसे अहम हो गया है.कौन किसके साथ है किस पैनल के पास कितना समर्थन है और आखिरी वक्त में कौन सा समीकरण बदलता है. आरसीए की सियासत में फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा इन्हीं सवालों की है. 

इस चुनाव में सबसे बड़ा सवाल ये है कि सत्ता पक्ष का रुख क्या रहेगा। क्योंकि कई राजनीतिक परिवारों से जुड़े चेहरे चुनाव मैदान में हैं.लेकिन किसी एक उम्मीदवार के समर्थन में सरकार या बीजेपी संगठन की ओर से आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है.  यही वजह है कि नामांकन के बाद अब निगाहें किसी औपचारिक समर्थन से ज्यादा आखिरी वक्त की सियासी सहमति पर टिकी हैं.सवाल यह है कि क्या किसी एक नाम पर सहमति बनेगी। क्या कोई उम्मीदवार मैदान से हटेगा।या फिर तीनों पैनल के बीच मुकाबला मतदान तक जाएगा.इन सवालों का जवाब नाम वापसी के बाद मिलेगा.

 असल में  RCA का ये चुनाव अचानक नहीं हुआ।इसके पीछे लंबी प्रशासनिक और कानूनी कहानी है.लंबे समय तक RCA में एडहॉक व्यवस्था के जरिए कामकाज चला।चुनाव को लेकर विवाद हुआ और मामला राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंचा।1 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट ने एडहॉक कमेटी को निलंबित करते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव भास्कर ए. सावंत को प्रशासक नियुक्त किया।प्रशासक को चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई।इसके बाद 29 सितंबर को चुनाव का कार्यक्रम सामने आया. यानी जिस संस्था में लंबे समय से चुनाव को लेकर खींचतान चल रही थी अब उसी संस्था की कुर्सी के लिए राजनीतिक परिवारों के कई चेहरे मैदान में हैं. 

RCA की कुर्सी इतनी अहम क्यों है इसे भी समझना जरूरी है।RCA राजस्थान में क्रिकेट प्रशासन की प्रमुख संस्था है।राज्य की क्रिकेट व्यवस्था जिला क्रिकेट संघ घरेलू क्रिकेट स्टेडियम और बड़े क्रिकेट आयोजनों से जुड़े फैसलों में RCA की अहम भूमिका रहती है. इसी वजह से राजस्थान में RCA की सत्ता लंबे समय से क्रिकेट के साथ-साथ सियासी चर्चा का भी केंद्र रही है.ललित मोदी से लेकर सीपी जोशी और वैभव गहलोत तक राजनीतिक रूप से प्रभावशाली चेहरे RCA की कमान संभाल चुके हैं. 

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का सालाना बजट आमतौर पर 50 करोड़ से 100 करोड़ के बीच होता है. यह बजट मुख्य रूप से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से मिलने वाले फंड्स, मैचों के आयोजन से होने वाली आय, मैदान के किराए और क्रिकेट एकेडमी की फीस से आता है.

इस चुनाव में इसलिए सिर्फ ये देखना पर्याप्त नहीं होगा कि अध्यक्ष कौन बनता है. देखना ये भी होगा कि नईकार्यकारिणी किस समीकरण से बनती है। क्या अध्यक्ष और बाकी पदों पर एक ही पैनल का दबदबा रहेगा. क्या अलग-अलग गुटों के बीच पदों को लेकर कोई समझौता होता है क्या जिला संघों के प्रतिनिधि पैनल के साथ मतदान करते हैं या अलग-अलग पदों पर अलग फैसला लेते हैं. RCA चुनाव में फिलहाल तीनों गुट अपनी-अपनी ताकत के साथ मैदान में हैं, लेकिन निगाहें सरकार के रुख पर टिकी हैं। ऐसे में चुनाव से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार का रुख क्या रहेगा. क्या किसी एक नाम पर सहमति बनेगी या फिर तीनों गुट अपनी-अपनी दावेदारी के साथ 29 सितंबर के मतदान तक जाएंगे. 28 सितंबर को नाम वापसी के बाद RCA चुनाव की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी.

Sushant pareek

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