Colombo Test Draw: कोलंबो टेस्ट में भारत जीत की ओर बढ़ता दिख रहा था, लेकिन मैच का रुख तब बदला जब सोनल दिनुषा और केशारा नुवंथा ने फॉलोऑन के बाद नौवें विकेट के लिए 112 रनों की जुझारू साझेदारी कर दी. इस साझेदारी ने न सिर्फ भारत की जीत की रफ्तार रोकी, बल्कि श्रीलंका को मैच बचाने का विश्वास भी दिया. सोनल दिनुषा 264 गेंद खेलकर 133 रन बनाकर नाबाद रहे. जिसने भारत के मैच जीतने की उम्मीद को खत्म कर दिया.
भले ही सोनल दिनुषा की पारी मैच का टर्निंग प्वाइंट थी लेकिन असली टर्निंग प्वाइंट उस समय आया जब सोनल दिनुषा 89 रन पर रन आउट हो सकते थे. यदि उस मौके पर सोनल आउट हो जाते तो शायद भारत पास श्रीलंका को 400 से पहले रोक सकते थे, और फिर 15 से 16 ओवर लेकर तेज अंदाज में बैटिंग कर मैच जीतने की कोशिश कर सकते थे.
यहां पलट सकता था पासा
दरअसल, श्रीलंका की दूसरी पारी के 132.2वें ओवर में दिनुशा रन आउट होने से बच गए. सारांश जैन की गेंद पर दिनुशा दो रन लेने की कोशिश में थे लेकिन बैटर कुमारा के साथ तालमेल अच्छी तरह से नहीं बैठा पाए जिससे रन लेने में देरी हुई, लेकिन भाग्य सोनल दिनुषा के साथ थी. अगर उस मौके पर थ्रो अच्छा होता तो सोनल रन आउट हो सकते थे, जिससे मैच का पासा पलट सकता था.
🏮THIS UNSUCCESSFUL RUNOUT WILL COST 50 RUNS MORE ! 🤯
— VK (@Aur_vicky) August 27, 2026
Easy runout missed by Saransh jain of lag Lahiru Kumara, well throw by Prasidh Krishna but Saransh missed
Now after missing this funny run out Rishabh pant & Sonal dinusha was laughing 🤣
But this is very disappointed for… pic.twitter.com/zlVnqUSG9f
भारत के बॉलिंग अटैक के सामने गंभीर सवाल हैं
आखिरी दिन जो हुआ, उससे एक ऐसी समस्या सामने आई है जो सिर्फ एक खराब सेशन से कहीं बड़ी है. विरोधी टीम के आठवें से ग्यारहवें नंबर के बल्लेबाजों का लगभग 50 ओवर तक बैटिंग करना सिर्फ खराब किस्मत नहीं है, यह दिखाता है कि जब विकेट लेने की योजनाएं काम नहीं आईं, तो टीम हालात के हिसाब से खुद को ढाल नहीं पाई. कोच गंभीर और कैप्टल गिल की गेंदबाजी रणनीति पूरी तरह से फ्लॉप रही. भारत के स्पिन गेंदबाजों ने श्रीलंका के नीचले क्रम के बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में असफल रही.
जब दिनुशा क्रीज पर जम गए, तो भारत के गेंदबाजों के पास कोई दूसरी रणनीति नहीं दिखी, वे अपनी लाइन, फील्डिंग या बॉलिंग में बदलाव करके पार्टनरशिप की लय तोड़ने के बजाय, आम गेंदों पर ही बहुत ज्यादा निर्भर रहे. श्रीलंका के निचले क्रम के बल्लेबाजों को दबाव में अच्छा खेल दिखाने का श्रेय जाता है, लेकिन जब जीत बिल्कुल करीब थी, तब भारत का उसे हासिल न कर पाना निश्चित रूप से निराशाजनक होगा.
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