हाल ही में इंग्लैंड बीच दौरे में पाकिस्तनी कोच पूर्व कप्तान सरफराज अहमद सहित 7 खिलाड़ियों को पाकिस्तान बोर्ड ने स्वदेश भेजा, तो पूरे क्रिकेट जगत को उसका मजाक बनाने का मौका मिल गया. अब विवाद प जहां फिक्सिंग की भी बू आनी शुरू हो गई है, तो दुनिया के दिग्गज पाकिस्तान के स्तर पर ही सवाल उठा रहे है. दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान एबी डिविलियर्स का मानना है कि टीम के इस निराशाजनक प्रदर्शन के लिए खिलाड़ियों को खुद भी जिम्मेदारी लेनी होगी.हालांकि, डिविलियर्स का मानना है कि समस्याएं बोर्ड के फैसलों से भी परे हैं. दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान ने सवाल उठाया कि क्या पर्याप्त पाकिस्तानी खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट में सफल होने के लिए आवश्यक कड़ी मेहनत करने को तैयार हैं, खासकर तब जब परिस्थितियां कठिन हो जाती हैं. शुरुआती दो टेस्ट मैचों में पाकिस्तान की बल्लेबाजी का संघर्ष विशेष रूप से चिंताजनक था. पहला मैच तीन दिनों के भीतर खत्म हो गया, जबकि दूसरा मैच मुख्य रूप से बारिश के कारण चौथे दिन तक खिंच सका. चार पारियों में पाकिस्तान एक बार भी 200 का आंकड़ा नहीं छू सका. इस वजह से डिविलियर्स ने दबाव झेलने और कठिन दौर से मुकाबला करने की टीम की क्षमता पर सवाल खड़े किए है.
'हिम्मत की कमी है बल्लेबाजों में'
डिविलियर्स ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, 'मैं फिलहाल व्यक्तिगत रूप से बहुत से पाकिस्तानी खिलाड़ियों को अतिरिक्त मेहनत करने के लिए तैयार नहीं देखता. खासकर बल्लेबाजी इकाई के साथ. उतना जज़्बा नहीं दिख रहा, सही शब्द क्या होगा. हिम्मत या लड़ने का जज़्बा. यह हमेशा खूबसूरत नहीं हो सकता. कई बार आसान विकेट गंवाए गए और बात यहीं आकर टिकती है. यह एक ऐसा फैसला है जो आप खुद मैदान पर लेते हैं.' दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान ने समझाया कि वे टेस्ट क्रिकेट को केवल व्यक्तिगत आंकड़ों या खूबसूरत शॉट्स के बजाय अपनी मानसिक मजबूती दिखाने के अवसर के रूप में देखते हैं.
उन्होंने आगे कहा, 'यह कभी-कभी देखने में बदसूरत और बहुत कठिन होता है. अगर मैं अपने ईगो (अहंकार) के लिए खेलता, तो शायद मैं एक अलग खिलाड़ी होता. मेरे लिए हमेशा यह बात मायने रखती थी कि मैं आज मैदान पर कितना कैरेक्टर और जज़्बा दिखा सकता हूं. विरोधी टीम की तरफ से मुझे हमेशा अपनी साख पर खतरा महसूस होता था. मैंने परिस्थितियों के हिसाब से इसी तरह खेलने का फैसला किया था.'
'पाकिस्तान में विपरीत हालात में लड़ने का अभाव'
डिविलियर्स का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन अक्सर किसी खिलाड़ी की विपरीत परिस्थितियों में प्रतिक्रिया देने की क्षमता पर निर्भर करता है. पूर्व प्रोटियाज कप्तान ने कहा, 'मैंने हमेशा महसूस किया कि टेस्ट क्रिकेट आपके चरित्र (चरित्र और लड़ने की क्षमता) की परीक्षा है. शायद इस समय पाकिस्तान में इसी चीज की कमी है. थोड़ा जज़्बा थोड़ी फाइट. चार या पांच खिलाड़ियों का एक ऐसा लीडरशिप ग्रुप जो मिलकर यह तय करें कि 'चलो, हम यहां अगुवाई करेंगे और बाकी लड़कों को करके दिखाएंगे. चलो हम मिसाल कायम करें. युवाओं को दिखाएं कि टेस्ट मैच, वनडे या टी20 जीतने के लिए क्या करना पड़ता है. शायद यही वह क्षेत्र है जहाँ वे पिछड़ रहे हैं.'
'PCB की अस्थिरता भी एक बड़ी चिंता'
जहां डिविलियर्स खिलाड़ियों के प्रति कड़े दिखे, वहीं उन्होंने PCB को भी पूरी तरह से जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया. हाल के वर्षों में पाकिस्तान क्रिकेट में नेतृत्व और कोचिंग में लगातार बदलाव हुए हैं. इसमें कई कोच और कप्तान आए और गए. उदाहरण के लिए, आकिब जावेद की अध्यक्षता वाली चयन समिति द्वारा दरकिनार किए जाने के आरोपों के बाद जेसन गिलेस्पी और गैरी कर्स्टन को अपना पद छोड़ना पड़ा था. डिविलियर्स का मानना है कि इस अस्थिरता ने भी पाकिस्तान के पतन में भूमिका निभाई है और उन्होंने वर्तमान नेतृत्व को लंबी निरंतरता देने के महत्व पर जोर दिया.
डिविलियर्स ने कहा, 'शीर्ष स्तर से कुप्रबंधन भी हुआ है. बहुत अधिक उथल-पुथल और बदलाव हुए हैं. कप्तानी और नेतृत्व में कई बदलाव किए गए. अब बाबर आजम वापस आ गए हैं. उम्मीद है कि उन्हें लंबा मौका मिलेगा. वे फिट रहेंगे और फिर से रन बनाना शुरू करेंगे जैसा कि हम सभी जानते हैं कि वे कर सकते हैं. और उनके साथी खिलाड़ी भी उस रास्ते पर चलना शुरू करेंगे.'
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