टीम इंडिया अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज खेल रही है, जीत रही है, लेकिन श्रीलंका में खेली जा रही तीन देशों की 'A' टीमों की भागीदारी वाली ट्राई सीरीज की भी इसी के बराबर या कहें इससे ज्यादा ही चर्चा बनी हुई है. और वजह बने हैं भारतीय ही नहीं, बल्कि विश्व क्रिकेट की सनसनी बन चुके 15 साल के वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi), लेकिन एकदम अलग वजह से. दौरा शुरू होने से पहले वैभव की टीआरपी एकदम बुलंद थी. सोनी चैनल ने वैभव की वजह से ही 'A' टीमों की भागीदारी वाले टूर्नामेंट के सीधे प्रसारण का निर्णय लिया. सूर्यवंशी से बहुत ही कम समय में बन चुके उनके करोड़ों प्रशंसकों को उनसे वैसे ही तूफानी प्रदर्शन की उम्मीद थी, जैसा उन्होंने कुछ ही हफ्ते पहले इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) में दिखाया था, लेकिन तूफान तो छोड़िए, वैभव इन उम्मीदों के आधे सफर तक तो नहीं ही पहुंचे, बल्कि इसके उलट उन्हें श्रीलंकाई खिलाड़ी के साथ ऐसे विवाद ने घेर लिया जो अभी तक चर्चा का विषय बना हुआ है. आप इस घटना क्रम को कड़ी-दर कड़ी समझिए.
विशेल हलमबागे का पहले ही मैच से निशाना
वैभव को रोकने के लिए श्रीलंका 'A' की रणनीति एकदम साफ थी. और वैभव सूर्यवंशी पहले ही मैच से निशाने पर थे. और इसके लिए नियुक्ति की गई विशेन हलमबागे की, जिन्होंने पहले ही मैच से वैभव पर शब्दबाण दागे. और मामला दूसरे मैच में अपने चरम पर पहुंच गया. फिर जो समूचे क्रिकेट जगत ने देखा, वह हैरान करने वाला था. एक बार को लगा कि मैदान पर हाथापाई समझो हो ही गई. दुर्भाग्यपूर्ण पल अगले स्तर पर जाने से पहले ही दम तोड़ गए.

बीसीसीआई का नजरिया एकदम साफ
मामला वैभव से जुड़ा था, तो तूल पकड़ना ही था. बात बीसीसीआई तक पहुंची. और इस पर BCCI सचिव देवजीत सौकिया ने मामले से बहुत हद तक (वैभव की वजह से) पल्ला झाड़ते हुए कहा, 'खिलाड़ियों को खेल पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहिए.' बोर्ड सचिव ने इस मामले पर वैभव से बात करने से इनकार करते हुए कहा, 'खिलाड़ियों से किसी भी कारण से बात करना हमारा कर्तव्य नहीं है. खिलाड़ी केवल अपने खेल और अपने साथ मौजूद सहायक कर्मचारियों और कोचों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. इसलिए कोई भी उनके खेल, उनकी रणनीति और उस बड़ी श्रृंखला की तैयारी में दखल नहीं दे सकता, जो इस समय चल रही है.' सैकिया की बात एकदम सही है. बोर्ड इस मामले पर तब तक आगे नहीं बढ़ सकता, जब तक भारत 'A' के मैनेजर और कोच अपनी रिपोर्ट BCCI को नहीं ही सौंप देते. लेकिन इस रिपोर्ट का बहुत हद तक जाना इस पर निर्भर करेगा कि भारत और श्रीलंका 'A' मैच के दौरान मैदानी अंपायर और मैच रेफरी क्या रिपोर्ट देते हैं
India A showing their mettle v Afghanistan when it mattered, under pressure. Tilak Verma leading by example, loving his commitment to this tournament for somone who is an established India star. 👏👏👏
— Sanjay Manjrekar (@sanjaymanjrekar) June 17, 2026
चौतरफा प्रतिक्रिया और संजय मांजरेकर की खरी-खरी
इस घटनाक्रम पर क्रिकेट जगत खासकर भारतीय खिलाड़ियों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया व्यक्त की. समझा जा सकता है कि वैभव की उम्र और अपने ही देश का खिलाड़ी होने के कारण किसी के लिए भी तय सीमा से आगे जाना मुश्किल था. अफगानिस्तान के साथ दूसरे वनडे मैच की पूर्व संध्या पर स्पिन बॉलिंग कोच साईराज बहुतुले ने भी वैभव का बचाव किया. लेकिन मांजरेकर इस मामले में पर सबसे ज्यादा मुखर रहे और उनका बयान एकदम से चर्चा का विषय बन गया. मांजरेकर ने X (पूर्व में ट्विटर) पर कहा, "अगर मैं भारत 'A' का कोच या मैनेजर होता, तो मैं उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ अगले मैच से बाहर बैठा देता. मैं ऐसा सिर्फ इसलिए करता है, जिससे वैभव यह जान लें कि मैदान पर 'फिजिकल' होना सही बात नहीं है. फिर चाहे कितना भी प्रवोकेशन (उकसावा) क्यों न हो." मांजरकेर ने जो कुछ कहा, एकदम खरा कहा. फिर चाहे यह बात किसी को अच्छी लगे या बुरी, लेकिन मांजरेकर ने कोई बीच का या अश्विन की तरह कोई 'कूटनीतिक रास्ता' नहीं चुना है.

मैच रेफरी ने कर दी यह सिफारिश
बुधवार को आई रिपोर्ट के अनुसार पिछले मैच में हुए विवाद के लिए वैभव सूर्यवंशी और विशेन हलमबागे दोनों पर उनकी मैच फीस का 50-50 प्रतिशत जुर्माना लगाने की सिफारिश की गई है. वहीं, भारत 'ए' के कप्तान तिलक वर्मा को 30 प्रतिशत जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है. मैच रेफरी प्रदीप जयप्रगाश ने श्रीलंका 'ए' के विकेटकीपर-बल्लेबाज निरोशन डिकवेला पर भी 20 प्रतिशत जुर्माने की सिफारिश की है. सूत्रों का दावा है कि कुछ श्रीलंकाई खिलाड़ी टूर्नामेंट की शुरुआत से ही सूर्यवंशी और उनके भारत 'ए' के कुछ साथियों पर फब्तियां कस रहे थे (स्लेजिंग कर रहे थे) और अक्सर उनके आईपीएल प्रदर्शन को लेकर उन्हें ताना मार रहे थे. हालांकि, सीनियर इंटरनेशनल क्रिकेट के विपरीत, 'ए' टीमों के मैचों में अनुशासनात्मक कार्रवाई (जुर्माना) आईसीसी द्वारा स्वतः लागू नहीं की जाती है क्योंकि A टीमों के दौरे द्विपक्षीय बोर्डों के बीच का मसला होता है और इससे आईसीसी का कुछ लेना-देना नहीं ही होता.
इस मामले में क्या है सही?
तमाम फैंस संजय मांजरेकर को क्या कहते हैं, यह एक अलग बात है, लेकिन कहीं न कहीं वैभव सूर्यवंशी यहां चूक गए! क्रिकेट की पेशवर दुनिया बहुत ही ज्यादा क्रूर नहीं, बल्कि क्रूरतम है! आप सोचिए कि सचिन तेंदुलकर को साल 1989 में अपने पाकिस्तान के पहले दौरे में क्या-क्या सुनना पड़ा था या पड़ा होगा. यह वही दौरा था, जब एक पाकिस्तानी दर्शक ने मैदान पर घुसकर श्रीकांत की शर्ट फाड़ दी थी. और यह वही दौरा था, जब सचिन बैटिंग के लिए मैदान पर उतरे, तब पेशावर के अरबाब नियाजस्टेडियम में खेले गए 20 ओवर के प्रदर्शनी मैच के दौरान स्टेडियम में जमा 20,000 से ज्यादा लोग जोर-जोर से चिल्ला रहे थे, "सचिन वापस जाओ, दूध पीकर आओ." पाकिस्तानी खिलाड़ी भी कुछ न कुछ तो बोल ही रहे होंगे.
कुल मिलाकर कहानी का सार यह है कि विरोधी खिलाड़ी चाहे बुरे से बुरा कितना भी बोलें, लेकिन वैभव को पीछे मुड़कर 'फिजिकल' (हलमबागे को पुश करना) नहीं ही होना था. जेंटलमैन गेम में इसके लिए कहीं से कहीं तक भी जगह नहीं है. न ही आचार-बर्ताव में और न ही खेल की आचार-संहिता में. यही वजह है कि मैच रेफरी ने अपनी रिपोर्ट में 50 प्रतिशत फीस काटने की बात कही है.
बीसीसीआई को क्या करना चाहिए?
किसी भी भारतीय टीम के विदेशी दौरे के प्रोटोकॉल के तहत भारत A टीम के वापस लौटने पर कप्तान, मैनेजर और कोच अपनी-अपनी रिपोर्ट बीसीसीआई को देंगे. ये तीनों पक्ष रिपोर्ट में घटना का ब्यौरा देंगे ही देंगे. खासकर मैच रेफरी के मैच फीस काटने की सिफारिश करने के बाद. अब यहां से यह देखना होगा कि बीसीसीआई इस मामले पर क्या रवैया अपनाता है. यह अपने आप में पहली तरह का मामला है. अब BCCI वैभव की उम्र को देखते हुए संदेह का लाभ शायद ही देगा? सवाल है कि बीसीसीआई करेगा क्या? तरीका दुनिया के सबसे अमीर बोर्ड का कुछ भी हो, लेकिन वैभव को उपलब्ध सरल से सरलतम तरीके से यह एहसास तो कराना ही होगा जो श्रीलंका के खिलाफ मैच में हुआ, वह ठीक नहीं ही है. और आगे से यह नहीं ही होना चाहिए. और बात वैभव के साथ बैठकर इत्मिनान से उनके पिता और शुरुआती दिनों के कोच को भी करनी होगी.
दांबुला विवाद: कौन, क्या और किसकी क्या राय?
| पक्ष | आधिकारिक स्टैंड / बयान |
| मैच रेफरी (P. Jeyapragash) | वैभव सूर्यवंशी और विशेन हलाम्बागे दोनों पर 50% मैच फीस का जुर्माना प्रस्तावित किया |
| संजय मांजरेकर | कड़ा अनुशासनात्मक रुख; अनुशासन सिखाने के लिए वैभव को अगले मैच से ड्रॉप करने की वकालत की। |
| साईराज बहुतुले (कोच) | खिलाड़ी का बचाव किया; कहा कि वैभव शांत स्वभाव का है, उसे उकसाया गया था, वह समय के साथ सीखेगा। |
| BCCI | रेफरी की रिपोर्ट के बाद अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई पर अंतिम मुहर लगाएगा |
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