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हॉर्मुज से यूपी पहुंचा शिवानंद चौरसिया का शव, चश्मदीद दोस्त ने बताई हमले की खौफनाक कहानी

ओमान के हॉर्मुज में जहाज पर हुए हमले में देवरिया यूपी के शिवानंद चौरसिया की मौत हो गई थी. 8 दिन बाद उनका पार्थिव शरीर गांव सुरौली पहुंचने पर परिजनों ने नौकरी की मांग को लेकर शव उतारने से मना कर दिया. प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद सुबह पोस्टमार्टम हुआ और बरहज घाट पर 5 वर्षीय बेटे ने मुखाग्नि दी. 

ओमान के हॉर्मुज में जहाज पर हुए हमले में देवरिया यूपी के शिवानंद चौरसिया की मौत हो गई थी.
  • ओमान के हॉर्मुज में अमेरिकी हमले में उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी शिवानंद चौरसिया की मृत्यु हुई थी
  • शव के पैतृक गांव सुरौली पहुंचने पर परिजन नौकरी की मांग पर शव उतारने से इनकार कर दिया था
  • जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने परिवार से बातचीत कर मुख्यमंत्री तक उनकी मांग पहुंचाने का आश्वासन दिया

ओमान के पास हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बीते द‍िनों एक जहाज पर हुए अमेरिकी हमले में उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद के निवासी शिवानंद चौरसिया की मौत हो गई थी. घटना के आठ दिन बाद 17 जून की रात को शिवानंद का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव सुरौली पहुंचा. शव पहुंचते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई और दिवंगत शिवानंद को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए हजारों की तादाद में लोग एकत्रित हो गए.

परिजनों ने नौकरी की मांग को लेकर शव उतारने से किया इनकार

पार्थिव शरीर गांव पहुंचने के बाद पीड़ित परिजनों ने एम्बुलेंस से शव को नीचे उतारने से साफ इनकार कर दिया. परिजनों की मांग थी कि परिवार के भरण-पोषण और आश्रय के लिए सरकार की ओर से एक सदस्य को नौकरी दी जाए. इस मांग को लेकर करीब एक घंटे तक वहां माहौल गरमाया रहा. स्थिति को देखते हुए जनपद के जिलाधिकारी  और पुलिस अधीक्षक तुरंत मौके पर पहुंचे. उन्होंने पीड़ित परिवार से बातचीत की और उनकी मांगों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का लिखित व मौखिक आश्वासन दिया. अधिकारियों ने हर संभव सरकारी मदद का भरोसा दिलाया, जिसके बाद परिजन शांत हुए.

5 वर्षीय मासूम बेटे ने दी मुखाग्नि

परिजनों के मानने के बाद गुरुवार सुबह शव का पोस्टमार्टम कराया गया. इसके बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए बरहज घाट ले जाया गया, जहां शिवानंद के 5 वर्षीय मासूम पुत्र समर ने अपने पिता को मुखाग्नि दी. इस दृश्य को देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं.

चश्मदीद दोस्त ने बयां किया हमले का खौफनाक मंजर

जहाज पर शिवानंद के साथ काम करने वाले उनके दोस्त और घटना के चश्मदीद अमरेंद्र चौहान भी अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद थे. अमरेंद्र ने उस खौफनाक मंजर का जिक्र करते हुए बताया क‍ि "यह घटना सुबह करीब 7:30 बजे की है. मैं, शिवानंद और एक अन्य साथी एक साथ ही रहते थे. हमने सुबह का नाश्ता भी एक साथ ही किया था. शिवानंद की ड्यूटी सुबह 7:00 बजे से थी और मेरी 8:00 बजे से, इसलिए वे नाश्ता करके पहले चले गए थे. ड्यूटी पर शिवानंद और इंजीनियर सुरेश एक साथ काम कर रहे थे. सुबह ठीक 7:30 बजे अचानक दो बार बहुत जोरदार धमाके हुए और जहाज पर भीषण आग लग गई."

अमरेंद्र ने आगे बताया, "ऐसी आपातकालीन स्थिति में नियम के मुताबिक सभी को एक जगह इकट्ठा होना होता है ताकि गिनती की जा सके. जब सभी लोग इकट्ठा हुए और गिनती हुई, तब पता चला कि कुछ लोग लापता हैं. हम लोग वर्कशॉप की तरफ उन्हें ढूंढने गए. हमने इंजन रूम का दरवाजा खोला, लेकिन भीतर आग और धुआं इतना ज्यादा था कि हम अंदर नहीं जा पाए. वहां फंसे एक व्यक्ति ने करीब आधे घंटे तक सांस ली, लेकिन दम घुटने और झुलसने के कारण उसने वहीं दम तोड़ दिया. जहाज के कैप्टन पूरी स्थिति को संभाल रहे थे. चूंकि हमारे कॉन्ट्रैक्ट पेपर्स सिंगापुर की कंपनी के थे और अंग्रेजी में थे, इसलिए नौकरी की आपाधापी में हम उन्हें पूरा पढ़ नहीं पाए थे. हमें यह भी स्पष्ट नहीं है कि उस अनुबंध में हमारा बीमा शामिल था या नहीं."

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Vinod Kumar Dwivedi
रिपोर्टर
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