- केंद्र सरकार ने NEET परीक्षा पेपर लीक की आशंका के चलते टेलीग्राम ऐप पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया है
- दिल्ली हाईकोर्ट में टेलीग्राम ऐप के बैन को चुनौती दी गई है और सरकार ने इस पर अपना पक्ष रखा है
- सरकार ने टेलीग्राम को डार्क वेब का नया केंद्र बताया, जहां अपराधी गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए जुड़े हुए हैं
टेलीग्राम ऐप पर केंद्र सरकार के अस्थायी बैन को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. केंद्र सरकार ने NEET री-एग्जाम पेपर लीक की चिंताओं के कारण ये बैन लगाया है. दिल्ली हाईकोर्ट में इस याचिका पर गरमागरम बहस देखने को मिली. केंद्र सरकार की ओर से भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें दीं.
सॉलिसिटर जनरल की दलील
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाई कोर्ट में दलील दी, 'कृपया जनहित का ध्यान रखें. हम छात्रों की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते. उनके [Telegram] पास तारीख और समय बदलने का फीचर है. मान लीजिए कि 21 जून को सबके पास पेपर है, तो कोई उसे 22 जून को Telegram पर पोस्ट कर सकता है और तारीख व समय बदलकर यह दिखा सकता है कि इसे 18 जून को अपलोड किया गया था. ऐसा 2024 में हुआ था. हमने उचित कदम उठाए हैं. हमने ऐसे उपाय किए हैं, जिनसे कम से कम दखल हो.'
तुषार मेहता ने फाइनल ऑर्डर पढ़कर सुनाया और कहा कि Telegram पर लगाई गई रोक किसी खास घटना से जुड़ी है और कुछ समय के लिए है.
फिर हुए सवाल-जवाब
- हाई कोर्ट ने पूछा, 'हम 15 करोड़ लोगों के अधिकारों को सिर्फ़ इसलिए कैसे रोक सकते हैं क्योंकि नागरिकों का एक समूह परीक्षा दे रहा है?'
- तुषार मेहता का जवाब, 'इस प्लेटफॉर्म पर बहुत सारे ग्रुप और चैनल चल रहे हैं. हो सकता है कि माननीय जजों ने दूसरे प्लेटफ़ॉर्म पर इस तरह से चलने वाले चैनलों के बारे में कभी नहीं सुना हो.'
- बेंच: सवाल यह है कि क्या आप किसी और के अधिकारों की रक्षा के लिए किसी दूसरे व्यक्ति के अधिकारों को रोक सकते हैं. जब किसी राज्य या राज्य के किसी हिस्से में इंटरनेट पर रोक लगाई जाती है, तो हो सकता है कि सिर्फ 10% लोग ही उपद्रवी हों. अगर कानून-व्यवस्था की स्थिति ऐसी हो, तो इसकी इजाजत दी जा सकती है. यहीं पर 'आनुपातिकता' (proportionality) की कसौटी लागू होती है.
मामला क्या है
NEET परीक्षाओं के कारण 22 जून तक प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने वाले केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती दी गई थी. केंद्र सरकार का कहना है कि टेलीग्राम 'फ्रेंकस्टीन' जैसा है. वहीं टेलीग्राम का कहना है कि सरकार का आदेश जरूरत से ज़्यादा सख्त है और वह कानूनों का पालन कर रहा है.
टेलीग्राम पर गंभीर आरोप
- केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा है कि इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम नया 'डार्क वेब' बनता जा रहा है, जो अपराधियों को जोड़ता है और उनकी गैर-कानूनी गतिविधियों में मदद करता है. केंद्र सरकार ने ये बातें टेलीग्राम की उस याचिका के विरोध में कहीं, जिसमें उसने NEET-UG (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट अंडरग्रेजुएट) की दोबारा परीक्षा से पहले भारत में अपनी सर्विस पर 22 जून तक रोक लगाने के सरकारी फैसले को चुनौती दी थी.
- सरकार ने हाई कोर्ट को बताया, "टेलीग्राम नया 'डार्क वेब' बन गया है और यह गलत काम करने वालों को आपस में जोड़ता है. अपराधी तेजी से टेलीग्राम का इस्तेमाल कर रहे हैं. वे ऐसे चैनलों पर लिंक पोस्ट करते हैं जो 'डीप वेब' लिंक के जरिए 'डार्क वेब' फोरम से जुड़ते हैं, जिससे अधिकारियों के लिए अपराधियों का पता लगाना और उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है."
- सरकार का यह फैसला इस चिंता पर आधारित था कि NEET-UG 2026 पेपर लीक में शामिल संगठित धोखाधड़ी करने वाले नेटवर्क ने टेलीग्राम का इस्तेमाल किया था. इसी लीक की वजह से मई 2026 में हुई परीक्षा रद्द कर दी गई थी.
केंद्र सरकार के किस विभाग ने जारी किए आदेश
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MEITY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत एक आदेश जारी किया, जिसमें भारत में टेलीग्राम प्लेटफॉर्म तक पहुंच को 22 जून तक सीमित कर दिया गया. एक अन्य आदेश में प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया गया कि वह पहले से पोस्ट किए गए संदेशों के लिए संदेश-संपादन (message-editing) सुविधा को 30 जून तक बंद कर दे. सरकार ने इस कदम को 21 जून को होने वाली पुन: परीक्षा की शुचिता (integrity) की रक्षा के लिए आवश्यक बताया.
अधिकारियों का तर्क था कि टेलीग्राम चैनलों का उपयोग लीक या नकली प्रश्न पत्र वितरित करने, धोखाधड़ी का समन्वय करने और प्लेटफॉर्म की संपादन सुविधा के माध्यम से संदेश टाइमस्टैम्प में हेरफेर करने के लिए किया जा रहा था.
टेलीग्राम ने इसी आदेश को दी चुनौती
टेलीग्राम ने इस बैन को चुनौती देते हुए एक रिट याचिका दायर की और तर्क दिया कि ऐप को इस तरह बड़े पैमाने पर ब्लॉक करना गैर-कानूनी और असंवैधानिक था. कंपनी ने यह भी दावा किया कि उसने गैर-कानूनी NEET कंटेंट से जुड़े 900 से ज़्यादा लिंक हटा दिए हैं और नियमों के उल्लंघन की पहचान करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग टूल्स और मैनुअल मॉडरेशन का इस्तेमाल किया है.
केंद्र सरकार ने ऐप पर लगाए गए अस्थायी बैन को सही ठहराने के लिए टेलीग्राम की याचिका पर अपना जवाब दाखिल किया. अन्य तर्कों के अलावा, केंद्र सरकार ने बताया कि "Neet Mafia" नाम के एक टेलीग्राम चैनल की पहचान की गई थी, जिसके आखिरी बार जांचने पर लगभग 18,617 सब्सक्राइबर थे.
हलफनामे के अनुसार, यह चैनल कथित NEET परीक्षा पेपर लीक, एडवांस बुकिंग की व्यवस्था, पेमेंट लेने के तरीकों और परीक्षा से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराने के वादों से संबंधित कंटेंट को बड़े पैमाने पर फैला रहा था. केंद्र सरकार के जवाबी हलफनामे में कहा गया है, "इस चैनल का दायरा ही यह दिखाता है कि टेलीग्राम में एक साथ हज़ारों यूज़र्स तक परीक्षा से जुड़ा गैर-कानूनी कंटेंट बड़े पैमाने पर पहुंचाने की क्षमता है." केंद्र सरकार के अनुसार, टेलीग्राम का खास टेक्निकल आर्किटेक्चर, जो पूरी तरह से क्लाउड-बेस्ड है, बड़ी मात्रा में कंटेंट भेजने की सुविधा देता है.
केंद्र के जवाबी हलफनामे में कहा गया है कि यह प्लेटफ़ॉर्म दो लाख सदस्यों तक के ग्रुप और ऐसे पब्लिक चैनल बनाने की सुविधा देता है जो लगभग असीमित लोगों तक कंटेंट पहुंचा सकते हैं, जिससे किसी भी गैर-कानूनी कंटेंट की पहुंच काफी बढ़ जाती है. केंद्र का यह भी तर्क है कि यह प्लेटफ़ॉर्म फ़ोन नंबर के बजाय बॉट और यूज़रनेम के इस्तेमाल की सुविधा देता है, जिससे यह उन लोगों के लिए आपराधिक गतिविधियों का अड्डा बन गया है, जो अपनी पहचान छिपाना चाहते हैं. जवाबी हलफनामे में जिन गैर-कानूनी गतिविधियों का ज़िक्र किया गया है, उनमें ड्रग तस्करी, आतंकवाद, बच्चों का शोषण, साइबर स्कैम और धोखाधड़ी शामिल हैं.
आतंकवादी संगठनों को भी पहुंचा रहा फायदा
हलफनामे में कहा गया है, "आतंकवादी संगठनों से जुड़े लोग टेलीग्राम ग्रुप और चैनल के ज़रिए चरमपंथी हिंसक गतिविधियों और दूसरे कट्टरपंथी कंटेंट का प्रचार कर रहे हैं. इनका मकसद गलत जानकारी फैलाना या कानून-व्यवस्था को बिगाड़ना है." सरकार ने यह भी दावा किया है कि इस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े कंटेंट (CSEAM) के साथ-साथ पायरेटेड फिल्में, वेब सीरीज़ और दूसरे पेड मीडिया कंटेंट को फैलाने के लिए किया जा रहा है.
केंद्र सरकार ने हलफनामे में यह भी बताया गया है कि नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर साइबर अपराध की शिकायतों में काफी बढ़ोतरी हुई है. इन शिकायतों में कहा गया है कि धोखाधड़ी और आपराधिक साइबर गतिविधियों को अंजाम देने के लिए टेलीग्राम का इस्तेमाल किया गया था. केंद्र ने यह भी आरोप लगाया है कि टेलीग्राम बॉट्स नागरिकों के निजी डेटा, जिनमें निजी मोबाइल नंबर और आधार कार्ड विवरण शामिल हैं, तक पहुंच बनाने में मदद कर रहे हैं.
हलफनामे में कहा गया है, "जब इस तरह की जानकारी बार-बार और व्यापक रूप से प्रसारित होने लगती है, तो मध्यस्थ द्वारा होस्ट की गई सभी जानकारी को ब्लॉक करना ही एकमात्र विकल्प होता है, क्योंकि तकनीकी रूप से अवैध सामग्री को वैध सामग्री से अलग करना संभव नहीं है." केंद्र ने आगे कहा है कि वह निष्पक्ष पुन: NEET परीक्षा आयोजित करने और उक्त पुन: परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है. हलफनामे में कहा गया है, "धारा 69A के तहत जानकारी को ब्लॉक होने से रोकने में किसी भी देरी के परिणामस्वरूप अधिनियम की धारा 69A के तहत परिकल्पित परिणाम हो सकते थे और इससे बड़े पैमाने पर छात्र अशांति, सार्वजनिक व्यवस्था में व्यवधान और संज्ञेय अपराध करने के लिए उकसाने की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी."
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