हाल ही में खेली गईं टी20 सीरीज में टीम इंडिया को हार्दिक पांड्या की सबसे ज्यादा कमी खली है. पांड्या की उपस्थिति जो संतुलन लेकर आती है, वह टीम इंडिया के स्तर को खासा ऊंचा लेकर जाता है. एक अग्रणी वेबसाइट के अनुसार पांड्या की रिकवरी में थोड़ी सी बाधा आई थी लेकिन अब यह पूरी तरह से पटरी पर है. प्रबंधन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह उन्हें जल्दबाजी में वापस नहीं लाएगा, क्योंकि अगले बारह महीनों में सभी की सोच में एक बहुत बड़ा लक्ष्य शामिल है.
कैंप के भीतर से संदेश यह है कि धैर्य ही प्राथमिकता है. भारत विश्व कप के लिए एक पूरी तरह से फिट हार्दिक चाहता है, न कि कोई ऐसी जल्दबाजी में वापसी जो एक ऐसी चोट के रिकॉर्ड को फिर से बिगाड़ने का जोखिम उठाए जिसने बार-बार उनके करियर में बाधा डाली है. BCCI के नजदीकी सूत्र ने बताया कि द्विपक्षीय क्रिकेट को जानबूझकर प्राथमिकता से बाहर रखा गया है और अब हर फैसला दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में होने वाले इस मेगा टूर्नामेंट के लिए ऑलराउंडर को उसके शीर्ष फॉर्म में तैयार करने पर केंद्रित है. ध्यान 2027 वनडे विश्व कप पर है जहां पूरी तरह से फिट हार्दिक का होना अनिवार्य होगा.'
सूत्र ने आगे कहा, 'उनके चोट के रिकॉर्ड को देखते हुए द्विपक्षीय सफेद गेंद की सीरीज इस समय उनके लिए प्राथमिकता नहीं है. साथ ही अगले एक साल में विश्व कप की तैयारी के दौरान उन्हें ज्यादातर 50 ओवर के फॉर्मेट में इस्तेमाल किया जाएगा.' सूत्र ने इस बाधा को लेकर आश्वस्त किया. इस बात पर जोर दिया कि समस्या का समाधान हो चुका है और मेडिकल टीम उनकी रिकवरी की दिशा को लेकर आश्वस्त बनी हुई है.
सूत्र ने यह भी जोड़ा, 'हार्दिक की रिकवरी में कुछ दिक्कतें आई थीं, लेकिन अब यह बिल्कुल ठीक है. वह एक विशिष्ट कार्यक्रम पर काम कर रहे हैं और विश्व कप में उन्हें शीर्ष रूप में पाने को लेकर हर कोई काफी आश्वस्त है.'
ऐसे सामने आई हार्दिक की चोट
यह टाइमलाइन इस सावधानी की वजह बताती है. आईपीएल के बाद हार्दिक वनडे के लिए अपनी गेंदबाजी का दायरा बढ़ाने के लिए बेंगलुरु में बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस गए थे और फिटनेस क्लीयरेंस के करीब पहुंचने पर नेट्स में पहले ही 10 ओवर फेंक चुके थे. ठीक उसी समय यह समस्या सामने आई. जैसे ही क्लीयरेंस मिलने वाली थी, हार्दिक को क्वाड्रिसेप्स की एक हल्की सी मोच (लो-ग्रेड स्ट्रेन) आ गई.
इस वजह से वह अफगानिस्तान सीरीज और इंग्लैंड दौरे से बाहर हो गए और इस वजह से भारत को मजबूरन शिवम दुबे को एक वैकल्पिक विकल्प के रूप में आजमाना पड़ा. उस बदलाव ने साफ तौर पर उजागर कर दिया कि भारत किस चीज़ की कमी महसूस कर रहा था. दुबे इंग्लैंड के खिलाफ दो वनडे मैचों में खेले और दो विकेट के लिए सिर्फ 12 ओवर फेंके जिसमें उन्होंने 59 रन दिए. बल्लेबाजी में अपनी इकलौती पारी में खाता खोलने में असफल रहे.
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