Foreign Assets Disclosure Scheme 2026: अगर आपने विदेश में कोई पैसा, प्रॉपर्टी या दूसरी संपत्ति छिपा रखी है और अब तक उसकी जानकारी इनकम टैक्स रिटर्न में नहीं दी है, तो बड़ा मौका है. सरकार ने ऐसे छोटे टैक्सपेयर्स को अपनी अघोषित विदेशी संपत्ति (Undisclosed Foreign Assets) और कमाई का खुलासा करने का मौका दिया है. फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स-डिस्क्लोजर स्कीम रूल्स 2026 आज यानी 16 अगस्त 2026 से लागू हो गए हैं.
इस योजना में कुछ मामलों में टैक्सपेयर्स को आगे की कानूनी कार्रवाई से पूरी छूट मिल सकती है, जबकि कुछ मामलों में 30% टैक्स के साथ 100% पेनल्टी देनी होगी. यानी विदेश में छिपी संपत्ति को यह अच्छा मौका है.
किन लोगों को इस योजना का मिलेगा फायदा ?
यह योजना चार तरह की विदेशी संपत्ति या कमाई पर लागू होगी. इसमें विदेश में मौजूद ऐसी संपत्ति शामिल है, जिसकी जानकारी नहीं दी गई है. इसके अलावा अघोषित विदेशी कमाई भी इसके दायरे में आएगी. अगर किसी व्यक्ति ने विदेश में उस समय कोई संपत्ति खरीदी थी, जब वह भारत का निवासी नहीं था, लेकिन भारत का निवासी बनने के बाद उसकी जानकारी नहीं दी, तो वह भी इस योजना के तहत घोषणा कर सकता है.
इसके अलावा ऐसी संपत्ति भी इस योजना में शामिल है, जिसे पहले से टैक्स चुकाई गई कमाई से खरीदा गया था, लेकिन इनकम टैक्स रिटर्न में उससे जुड़े जरूरी हिस्से में इसकी जानकारी नहीं दी गई.
1 करोड़ रुपये तक की अघोषित विदेशी संपत्ति पर कितना टैक्स?
अगर अघोषित विदेशी आय और संपत्ति की कुल उचित बाजार कीमत 1 करोड़ रुपये तक है, तो इस योजना का फायदा लिया जा सकता है.ऐसे मामले में घोषित संपत्ति या आय की कीमत पर 30% टैक्स देना होगा. इसके अलावा जितना टैक्स बनेगा, उतनी ही यानी 100% पेनल्टी भी देनी होगी.यानी 30% टैक्स और उस टैक्स पर 100% पेनल्टी को मिलाकर कुल भुगतान 60% तक हो सकता है.
5 करोड़ रुपये तक की संपत्ति वालों के लिए क्या नियम है?
एक अलग कैटेगरी में उन संपत्तियों को रखा गया है, जो व्यक्ति ने विदेश में तब खरीदी थीं जब वह भारत का निवासी नहीं था, या ऐसी संपत्ति जिसे पहले से टैक्स चुकाई गई कमाई से खरीदा गया था लेकिन रिटर्न में घोषित नहीं किया गया.
इस कैटेगरी में संपत्ति की कुल कीमत 5 करोड़ रुपये तक होनी चाहिए. इसमें 30% टैक्स और 100% पेनल्टी वाला नियम लागू नहीं होगा. यहां केवल तय फ्लैट फीस देनी होगी. छोटी घोषणाओं पर फीस शून्य हो सकती है, जबकि कुछ मामलों में यह 1 लाख रुपये होगी.अगर किसी व्यक्ति की संपत्ति इन तय सीमाओं से ज्यादा है, तो वह इस योजना के तहत संपत्ति का खुलासा नहीं कर सकेगा.
31 दिसंबर 2026 तक करना होगा आवेदन
अगर आप इस योजना का फायदा लेना चाहते हैं, तो 31 दिसंबर 2026 तक ऑनलाइन फॉर्म 1 जमा करना होगा. यही इस योजना के तहत विदेश में छिप कर रखे पैसे या प्रॉपर्टी का खुलासा करने की आखिरी तारीख है.इसके बाद इनकम टैक्स विभाग के संबंधित अधिकारीओर से फॉर्म 2 में भुगतान की जाने वाली रकम तय की जाएगी.
पैसे जमा करने के लिए मिलेगा कितना समय?
फॉर्म 2 में रकम तय होने के बाद टैक्सपेयर्स को इसे जमा करने के लिए दो महीने का समय मिलेगा. इस अवधि में भुगतान करने पर ब्याज नहीं लगेगा.अगर इस समय में भुगतान नहीं कर पाते हैं, तो इसके बाद एक और दो महीने का मौका मिलेगा. लेकिन इस दौरान बकाया रकम पर हर महीने 1% ब्याज देना होगा.इसके बाद भी भुगतान नहीं किया गया तो योजना का फायदा खत्म हो जाएगा और आपकी घोषणा रद्द मानी जाएगी.
भुगतान के बाद मिलेगी कानूनी कार्रवाई से छूट
अगर टैक्सपेयर्स तय समय में भुगतान पूरा कर देता है और उसकी घोषणा सही पाई जाती है, तो उसे ब्लैक मनी कानून के तहत आगे के टैक्स, पेनल्टी और अभियोजन से छूट मिल सकती है.यानी सही तरीके से करने और जरूरी भुगतान पूरा करने के बाद इस योजना के तहत आगे कानूनी कार्रवाई से राहत मिलेगी.
विदेशी संपत्ति की कीमत कैसे तय होगी?
इस योजना में संपत्ति की कीमत 31 मार्च 2026 की उचित बाजार कीमत यानी फेयर मार्केट वैल्यू के आधार पर तय होगी.अलग-अलग संपत्तियों के लिए अलग नियम हैं. इनमें सोना-चांदी जैसी कीमती धातु, गहने, कला से जुड़ी चीजें, शेयर, जमीन-मकान और बैंक खाते शामिल हैं. विदेशी बैंक खाते की कीमत तय करने के लिए खाता खुलने के बाद से उसमें जमा की गई कुल रकम को आधार बनाया जाएगा. अगर पहले ब्लैक मनी कानून के तहत कोई घोषणा की गई थी, तो उस घोषणा के बाद की जमा रकम को आधार बनाया जाएगा. विदेशी करेंसी को भारतीय रुपये में बदलने के लिए 31 मार्च 2026 को आरबीआई की रेफरेंस रेट का इस्तेमाल किया जाएगा.
संपत्ति की कीमत में थोड़ा अंतर हुआ तो क्या होगा?
सरकार ने वास्तविक कीमत तय करने में होने वाले अंतर को लेकर भी कुछ राहत दी है.अगर फॉर्म 1 में बताई गई संपत्ति की कीमत और बाद में अधिकारी की ओर से तय की गई कीमत में अंतर आता है, तो सिर्फ इसी वजह से डिक्लेरेशन कैंसिल नहीं होगी. हालांकि, यह अंतर घोषित कीमत के 20% से ज्यादा नहीं होना चाहिए. यानी 20% तक के मूल्य अंतर के लिए नियमों में राहत दी गई है.
विदेश में पैसा या संपत्ति है तो क्या करें?
अगर आपके पास विदेश में कोई ऐसी संपत्ति या कमाई है, जिसकी जानकारी अब तक इनकम टैक्स रिटर्न में नहीं दी गई है, तो इस योजना के नियमों को ध्यान से समझना जरूरी है.सबसे पहले आपको अपनी संपत्ति की कुल कीमत और उसकी कैटेगरी देखनी होगी, जिससे यह साफ हो सके कि आपकी संपत्ति 1 करोड़ रुपये वाली या 5 करोड़ रुपये वाली श्रेणी में आती है.इसके बाद, तय समय सीमा के अंदर फॉर्म 1 भरकर जो भी जरूरी टैक्स, पेनल्टी या फीस बनती है, उसे जमा करना होगा.
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