- रोहिणी ने कहा कि उनके पिता ने उन्हें बुलाया है और वे अपने माता-पिता से मिलने आई हैं, राजनीतिक रंग न दें
- उन्होंने परिवार से दूर रहने के बावजूद दिल से पटना से जुड़े रहने और रिश्तों में गर्मजोशी का संकेत दिया
- नवंबर 2025 में बिहार चुनाव के बाद राजनीतिक मतभेदों के बीच वे सिंगापुर लौट गई थीं, अब अटकलें समाप्त हुईं
राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य गुरुवार को पटना पहुंचीं. उनके पटना पहुंचते ही राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया. हालांकि रोहिणी ने साफ कर दिया कि उनकी यह यात्रा पूरी तरह पारिवारिक है और इसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है.
पटना पहुंचने के बाद उन्होंने कहा कि वह काफी दिनों बाद बिहार आई हैं. उन्होंने लोगों से अपील की कि उनके आने को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाए. रोहिणी ने कहा कि उनके पिता ने उन्हें बुलाया है और वह अपने माता-पिता से मिलने के लिए यहां आई हैं.
राजद कार्यकर्ताओं को बताया अपना परिवार
एयरपोर्ट पर राजद कार्यकर्ताओं की मौजूदगी को लेकर पूछे गए सवाल पर रोहिणी ने सहज अंदाज में जवाब दिया. उन्होंने कहा कि जो लोग उनसे मिलने आए हैं, वे सभी उनके अपने हैं. उन्होंने कार्यकर्ताओं को अपना भाई बताते हुए कहा कि उनसे मिलने के लिए लोग बड़ी संख्या में आए हैं.
पटना से दूरी रही, दिल से नहीं
पारिवारिक नाराजगी और पुराने विवादों को लेकर पूछे गए सवाल पर रोहिणी ने कहा कि भले ही वह लंबे समय तक पटना से दूर रहीं, लेकिन उनके दिल में हमेशा पटना बसा रहा है और आगे भी बसा रहेगा. उनके इस बयान को परिवार के साथ रिश्तों में आई गर्मजोशी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
पहले क्यों बढ़ी थीं दूरियों की चर्चाएं?
दरअसल नवंबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद रोहिणी अचानक पटना छोड़कर सिंगापुर लौट गई थीं. उस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर राजनीति से दूरी बनाने और खुद को परिवार से अलग रखने की बात कही थी. उस पोस्ट में उन्होंने कुछ नेताओं का भी जिक्र किया था.
इसके बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई थी कि वह परिवार और पार्टी के कुछ फैसलों से नाराज हैं. साथ ही यह भी कहा गया कि लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी में उनकी भूमिका को लेकर मतभेद उभर गए थे.
टूट गईं अटकलें, खत्म हुई अनबन की चर्चा
अब पटना पहुंचकर रोहिणी ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगाने का संकेत दिया है. हाल के दिनों में उन्होंने यह भी कहा था कि पिता के बुलावे से बढ़कर उनके लिए कोई आदेश नहीं है. माना जा रहा है कि लालू प्रसाद यादव के हस्तक्षेप के बाद परिवार के भीतर चल रही दूरियां खत्म हो गई हैं. उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और सारण लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ा. हालांकि उन्हें भाजपा उम्मीदवार राजीव प्रताप रूडी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था.
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