शनिवार से शुरू होने जा रहे इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) से ठीक पहले चली आ रही 'प्रथा' के तहत भाग ले रही सभी टीमों के कप्तानों को बुधवार को 'ऑल कैप्टन्स मीट' में इस सीजन में शुरू हो रहे नए नियम, बदलाव सहित प्लेइंग कंडीशंस के बारे में डिटेल से बताया गया. इस मीटिंग में मैच रैफरी श्रीनाथ सहित टूर्नामेंट से जुड़े अधिकारियों और टीमों के मैनेजरों ने भी हिस्सा लिया. इन नए नियमों या बदलावों का मतलब है कि आपको जो बातें साल 2025 संस्करण में देखने को मिलीं, वे इसे बार नहीं ही मिलेंगी. वहीं, अगर खिलाड़ियों ने ज्यादा चतुर-चालाक बनने की कोशिश की, तो उन्हें सजा तो मिलेगी ही मिलेगी, साथ ही उनकी टीम को मैच तक गंवाना पड़ सकता है. चलिए बारी-बारी से जानिए कि इस बार आईपीएल में कौन सा नया नियम क्या लागू होने जा रहा है. और किस नियम में बदलाव किया गया है.
फील्डिंग में "बनी हॉप" पर नकेल (नियम 19.5.2)
बाउंड्री पर कैच से जुड़े इस नियम को ICC ने पिछले साल 17 जून को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप से लागू किया. 'बनी हॉप' मतलब कोई भी फील्डर सीमारेखा के बाहर हवा में रहते हुए कई बार गेंद को हवा में उछाल सकता था. इसी तरह से लपके जाने वाले कैचों को बनी हॉप कहा गया. पिछले साल आईपीएल में इस तरह के कैच लेने की इजाजत थी, लेकिन शुरू होने जा रहे संस्करण में ऐसा नहीं होगा. अंततरराष्ट्रीय क्रिकेट में पिछले साल लागू यह नियम पहली बार इस साल आईपीएल में लागू होगा. इसके तहत फील्डर को बाउंड्री के बाहर सिर्फ एक ही बार गेंद को हवा में उछालने की इजाजत होगी.
मतलब साफ है कि अब कोई फील्डर बाउंड्री के बाहर कैच लेने की सूरत में इसे वैध कैच में बदलने के लिए अपनी सुविधानुसार पहले की तरह अनगिनत बार गेंद को हवा में नहीं उछाल पाएगा. नियम में बदलाव के कारण अब यहां ज्यादा कलाकारी की गुंजाइश पूरी तरह खत्म कर दी गई है. अब बाउंड्री के पार फील्डर ने दूसरी बार हवा में गेंद उछाली नहीं कि यह छक्के में तब्दील हुआ नहीं. मतलब फील्डर की यह चूक उसकी टीम को मैच गंवाकर भी चुकानी पड़ सकती है.
शॉर्ट-रन लिया, तो टीम भी गई काम से! (नया नियम 18.5.2)
इस नियम में बहुत ही अहम बदलाव किया गया है. जान-बूझकर शॉर्ट-रन लेने पर अब बीसीसीआई ने ऐसा बदलाव किया है, जिसके कारण बल्लेबाजी करने वाली टीम मैच गंवा भी सकती है. नियम के तहत साल 2025 और 2026 के बीच सबसे बड़ा अंतर बल्लेबाज की स्ट्राइक तय करने के अधिकार में आया है. पिछले साल तक जान-बूझकर शॉर्ट रन लेने की सूरत में अंपायर तय करते थे कि किस बल्लेबाज को किस छोर पर होना चाहिए. लेकिन अब यह अधिकार फील्डिंग करने वाली टीम के कप्तान को दे दिया गया है.
मतलब आप इसे ऐसे समझें कि शुरू होने जा रहे टूर्नामेंट में किसी मैच की आखिरी गेंद पर मैच जीतने के लिए बल्लेबाज को दो या तीन रन बनाने हैं. इस सूरत में अगर वह एक रन शॉर्ट लेता है, तो टीम पर 5 रन की पेनल्टी तो लगेगी ही लगेगी, वहीं फील्डिंग कप्तान के पास दूसरे छोर पर खड़े पुछल्ले बल्लेबाज को स्ट्राइक देने की मांग करने से मुख्य या ताकतवर बल्लेबाज को नॉन-स्ट्राइकर में बदलने की ताकत हो जाएगी. और इस सूरत में बैटिंग रहने वाली टीम को मुकाबला गंवाना पड़ सकता है. पिछले साल तक बल्लेबाज जानते-बूझते एक रन शॉर्ट लेकर स्ट्राइक खुद अपने पास रखने की कोशिश में जानत-बूझते शॉर्ट-रन लेने की कोशिश करते थे, लेकिन अब नियम में बड़े बदलवाव के बाद इस 'कलाकारी' की गुंजाइश भी खत्म हो गई है.
बल्ले की जांच (नियम 5.8.3 में बदलाव)
एक और अहम बदलाव के तहत बल्लेबाज के बैट की चेकिंग भी शामिल है. हालांकि, इस प्रैक्टिस को पिछले साल ही शुरू कर दिया गया था. लेकिन अब इसे SOP (स्टैंडर्ट ऑफ ऑपरेटिंग प्रोसिजर) में तब्दील कर दिया गया है.
साल 2025 और इस साल के टूर्नामेंट में अंतर यह है कि पिछले साल तक अंपायर मैच से एक दिन पहले या रैंडम तरीके से कुछ बल्ले चेक करते थे. अगर किसी खिलाड़ी का बल्ला तय मानक आकार से थोड़ा भी बड़ा होता था, तो उस पर कम ही ध्यान जाता था. लेकिन इस साल अब चौथे अंपायर के पास 'स्टैंडर्ड गेज' (माप-यंत्र) होगा. अब हर बल्लेबाज को मैदान पर उतरने से पहले इस सांचे से पहले बल्ले को गुजारना होगा. साल 2025 में यह नियम नया था, लेकिन इस साल इससे जुड़े दिशा-निर्देशों को और अधिक स्पष्ट और सख्त बना दिया गया है. हालांकि, दोनों सालों में माप के नियम समान हैं. इसके तहत बल्ले की चौड़ाई अधिकतम 10.8 सेमी., गहराई (बीच में) अधिकतम 6.7 सेमी और किनारों की मोटाई अधिकतम 4 सेमी होनी चाहिए.
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