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This Article is From Nov 28, 2013

दक्षिण अफ्रीका में पहली शृंखला जीतने की कोशिश करेगा भारत

दक्षिण अफ्रीका में पहली शृंखला जीतने की कोशिश करेगा भारत
नई दिल्ली:

सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण और सौरव गांगुली जैसे दिग्गज बल्लेबाजों की मौजूदगी में दक्षिण अफ्रीका को उसके घर में किसी शृंखला में हराने में नाकाम रही भारतीय टीम अब महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में अपना रिकॉर्ड सुधारने की कोशिश करेगी।

भारत अगले महीने के शुरू में छठी बार दक्षिण अफ्रीकी दौरे पर जाएगा और इस बार भी उसकी निगाह अपने इस मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ उसकी सरजमीं पर टेस्ट या वन-डे शृंखला में जीत दर्ज करने पर लगी रहेगी। कई उतार चढ़ावों के बाद मूर्तरूप पाने वाले इस दौरे में भारतीय टीम पहले तीन एक-दिवसीय मैच और फिर दो टेस्ट मैचों की शृंखला खेलेगी।

दक्षिण अफ्रीका की तेज और उछाल वाली पिचों पर खेलना भारत के लिए हमेशा चुनौती भरा रहा है और यही वजह है कि पिछले 20 से अधिक वर्षों से वह कभी वहां शृंखला नहीं जीत पाया।

भारत ने अब तक दक्षिण अफ्रीका में जो पांच टेस्ट शृंखलाएं खेली हैं उनमें से चार में मेजबान देश ने जीत दर्ज की जबकि 2010-11 की शृंखला ड्रा रही थी। भारत ने अब तक दक्षिण अफ्रीकी सरजमीं पर 15 टेस्ट मैच खेले हैं जिनमें से उसे दो में जीत और सात में हार मिली है। बाकी छह मैच ड्रा रहे। असल में भारत को दक्षिण अफ्रीका में अपनी पहली जीत के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

भारतीय टीम नवंबर 1992 में पहली बार दक्षिण अफ्रीकी दौरे पर गई जहां चार टेस्ट मैचों में उसे 0-1 से हार मिली। इसके बाद 1996-97 और 2001-02 में दक्षिण अफ्रीका ने क्रमश: 2-0 और 1-0 से जीत दर्ज की थी।

भारत इसके बाद 2010-11 में दक्षिण अफ्रीकी दौरे पर गया। उसे सेंचुरियन में पहले टेस्ट मैच में पारी के अंतर से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन डरबन में खेले गए दूसरे मैच में लक्ष्मण के साहसिक प्रयास से उसने 87 रन से जीत दर्ज करके शृंखला 1-1 से बराबर करवायी थी। केपटाउन में खेला गया तीसरा मैच ड्रा रहा था।

भारतीय बल्लेबाजों के लिए वर्तमान दौरा भी हर बार की तरह चुनौती भरा होगा। चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली, शिखर धवन और रोहित शर्मा जैसे बल्लेबाजों को सुनिश्चित करना होगा कि टीम को अब तेंदुलकर, द्रविड़ और लक्ष्मण की कमी नहीं खल रही है, जिन्होंने समय समय पर दक्षिण अफ्रीकी सरजमीं पर अपने बल्ले का पराक्रम दिखाया है।

धोनी की टीम की पहली चुनौती हालांकि तीन मैचों की वन-डे शृंखला होगी, क्योंकि सीमित ओवरों की क्रिकेट में भारत कभी दक्षिण अफ्रीका में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया। इन दोनों टीमों के बीच दक्षिण अफ्रीकी सरजमीं पर अब तक जो 25 वन-डे मैच खेले गए हैं उनमें से भारत केवल पांच में जीत दर्ज कर पाया है।
इस बीच उसने 19 मैच गंवाये जबकि एक मैच का परिणाम नहीं निकला।

इन दोनों टीमों के बीच दक्षिण अफ्रीका में अब तक तीन द्विपक्षीय शृंखलाएं खेली गई और इन तीनों में मेजबान टीम ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। दक्षिण अफ्रीका ने 1992-93 में 5-2 से, 2006-07 में 4-0 से और 2010-11 में 3-2 से जीत दर्ज की थी।

भारत इस तरह से दक्षिण अफ्रीका में द्विपक्षीय वन-डे शृंखलाओं में 16 मैचों में केवल चार में जीत दर्ज कर पाया है और 12 में उसे हार मिली। धोनी की अगुवाई वाली टीम अभी लगातार छह वन-डे शृंखलाओं में जीत दर्ज करके दक्षिण अफ्रीकी दौरे पर जा रही है और इस बार उसके लिए पास वन-डे और टेस्ट शृंखला जीतने का सबसे बढ़िया मौका माना जा रहा है। पाकिस्तान की पहले दो एक-दिवसीय मैचों में दक्षिण अफ्रीका पर जीत से भी भारतीय टीम का मनोबल बढ़ेगा।

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