श्रीलंका के खिलाफ जारी पहले टेस्ट मैच की पहली पारी में देवदत्त पडिक्कल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए शतकीय पारी खेली. बाएं हाथ के बल्लेबाज ने 167 रनों की शानदार पारी खेलने के बाद कहा कि यह उनके लंबे समय से देखे गए सपने के सच होने जैसा है. पडिक्कल ने बताया कि इंटरनेशनल मंच पर इस खास पल को हासिल करने के लिए उन्होंने पर्दे के पीछे दो साल तक कड़ी मेहनत की थी. गाले इंटरनेशनल स्टेडियम में बारिश से प्रभावित दूसरे दिन पडिक्कल ने 131 रन के अपने कल के स्कोर से आगे खेलते हुए श्रीलंका के खिलाफ 167 रन की शानदार पारी खेली, जो उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ स्कोर है. हालांकि, इस पारी के दौरान जिसने सभी का ध्यान खींचा वो रहा आसरीबी स्टार का फुटवर्क और तकनीक में बदलाव. पडिक्कल बैकफुट में शॉट खेलते दिखे. गुड लेंथ गेंदों के खिलाफ बैकफुट से उन्होंने कुछ जबरदस्त शॉर्ट्स खेले.
बैकफुट के मास्टर बनकर सामने आए पडिक्कल!
पडिक्कल का शानदार फुटवर्क उनकी पारी की सबसे खास बात रही. जितनी आसानी से उन्होंने फ्रंटफुट से ड्राइव लगाई, उतने ही सहज वो बैकफुट पर पंच और कट खेलते दिखे. श्रीलंका के खिलाफ टीम इंडिया का हिस्सा बनने से पहले वह इस आइलैंड नेशन पर ए सीरीज में टीम इंडिया का हिस्सा थे. जबकि बीते कुछ समय से वह अपने बचपन के कोच के साथ बेंगलुरु में स्पिन के खिलाफ लगातार अभ्यास कर रहे थे.
पडिक्कल अपने फुटवर्क से लेंथ गेंद के खिलाफ सहज दिखे. जब उनसे कहा गया कि इससे गेंद की लेंथ को समझने में उनके जबरदस्त आत्मविश्वास का पता चलता है, तो उन्होंने सहमति जताई. इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने ब्रॉडकास्टर्स से बातचीत में कहा,"बिल्कुल, मुझे लगता है कि जब आपको इस बात की स्पष्टता होती है कि आप क्या करना चाहते हैं, तो इससे आपके फुटवर्क में भी आत्मविश्वास आता है. मुझे लगता है कि मैं बस यह पक्का करना चाहता था कि मैं जो भी करूं, उसमें 100 प्रतिशत मन लगाकर खेलूं. भले ही वह डिफेंसिव शॉट हो, मैं चाहता था कि उसे पूरे भरोसे के साथ खेलूं, और इसी वजह से मेरा फुटवर्क काफी बेहतर हो गया."
भारतीय बल्लेबाज ने आगे कहा,"आप मैदान पर जाकर हर बार सिर्फ प्रतिक्रिया देने की उम्मीद नहीं कर सकते. यह जरूरी है कि आपके दिमाग में कुछ ऐसे शॉट्स हों जिन्हें आप मैदान पर जाते ही खेलना चाहें, ताकि आप गेंदबाज पर भी दबाव बना सकें. इसी वजह से मुझे लगता है कि पिछले एक साल या उससे अधिक समय में हमने अपनी खूबियों के आधार पर ऐसे तरीके खोजने पर काम किया है जिन्हें हम वास्तव में लागू कर सकें और विरोधी पर दबाव बना सकें."
दो साल से था शतक का इंतजार
दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक भारत ने 9 विकेट खोकर स्कोरबोर्ड पर 460 रन लगा दिए हैं. पडिक्कल ने अपने शतक पर कहा,"बिल्कुल, मैंने इस पल का सपना देखा था. पिछले दो सालों से मैं बहुत मेहनत कर रहा था ताकि जब मुझे मौका मिले, तो मैं कुछ खास कर सकूं और ऐसा कर पाने पर मैं बेहद खुश हूं."
पडिक्कल की 230 गेंदों की लंबी पारी में बेहतरीन फुटवर्क और श्रीलंकाई स्पिनरों के खिलाफ आक्रामक इरादा दिखा. उन्होंने 15 चौके और एक छक्का लगाया. टर्न होती गेंद का सामना करने के अपने सक्रिय रवैये पर बात करते हुए पडिक्कल ने कहा,"मुझे लगता है कि हमने इस पर काफी चर्चा की है, खासकर जब आप स्पिन के खिलाफ खेल रहे हों, तो यह जरूरी है कि आपके दिमाग में कुछ योजनाएं हों."
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