- सर्जरी के कारण छह माह तक क्रिकेट से दूर रहे
- कहा, मैं चाहता था जल्द से जल्द फिट हो जाऊं
- ऐसा नहीं हो पाने मैं मानसिक दबाव में आ गया था
Hardik Pandya: टीम इंडिया के ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या (Hardik Pandya)ने खुलासा किया कि जब पीठ की चोट से उबरने के उनके प्रयास सफल नहीं हो पा रहे थे तो वह मानसिक रूप से काफी दबाव (Mental Pressure) में आ गए थे. पिछले साल अक्टूबर में पीठ की चोट की सफल सर्जरी के कारण 26 साल का यह खिलाड़ी छह महीने तक क्रिकेट से दूर रहा. उनका अंतिम वनडे मैच मैनचेस्टर में न्यूजीलैंड के खिलाफ वर्ल्डकप 2019 का सेमीफाइनल मुकाबला था. फिर उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच पिछले साल सितंबर में बेंगलुरु में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 था. पंड्या अब इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी के लिये तैयार हैं, उन्हें दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज के लिए (India vs South Africa) भारत की वनडे टीम में चुना गया है.
WATCH: CHAHAL TV with the comeback man Hardik Pandya
— BCCI (@BCCI) March 12, 2020
In this segment, @hardikpandya7 talks about his rehabilitation, how much he missed donning Indian colours and shares his message for #TeamIndia fans- by @28anand & @yuzi_chahal
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पंड्या ने सीरीज के शुरुआती मैच से पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल (BCCI) के ‘चहल टीवी' पर कहा, ‘सबसे पहले मैंने छह महीनों में सबसे ज्यादा यह माहौल ‘मिस' किया, भारत के लिये खेलना, ये कपड़े पहनकर जो अहसास होता है, वह एक तरीके से मानसिक चुनौती हो जाती है. बहुत सारी रुकावटें आईं.' उन्होंने कहा, ‘मैं कोशिश कर रहा था कि जल्दी फिट हो जाऊं लेकिन ऐसा नहीं हो रहा था तो मैं दबाव में आ गया था. उस समय काफी मानसिक रूप से दबाव में आ गया था. चीजें मुश्किल लगने लगी थी. लेकिन सब कुछ ठीक हो गया, रिहैब अच्छा हुआ. काफी लोगों ने मदद की. '
हार्दिक को पिछले महीने भारतीय टीम में शामिल किया गया लेकिन पूर्ण फिटनेस हासिल नहीं करने की वजह से न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भी नहीं खेल पाए थे. उन्होंने डी वाई पाटिल टी20 कप में रिलायंस-1 टीम की ओर से खेलकर प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी की. इसमें उन्होंने दो शतक जड़े जिसमें से दूसरा शतक 55 गेंद में नाबाद 158 रन था जिसमें उन्होंने 20 छक्के जड़े थे. पंड्या ने कहा कि यह उनके लिये अहम पारी थी. उन्होंने कहा, ‘साढ़े छह महीने तक एक भी मैच नहीं खेला था. मैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करना चाहता था जिसके लिये आत्मविश्वास काफी अहम था. आप भले ही कितना ही अभ्यास करो लेकिन मैच के हालात हमेशा अलग होते हैं.' उन्होंने कहा, ‘मैंने खेलना जारी रखा, मेरे आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती रही और छक्के भी लगते रहे. मैंने सोचा कि अगर छक्के लग रहे हैं तो मुझे रुकना नहीं चाहिए और मैं लगाता गया. लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं पारी में 20 छक्के लगाऊंगा.
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