- उत्तराखंड के तीन हजार मीटर से ऊंचे इलाकों में 10 अप्रैल तक हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना बनी हुई है.
- मौसम विभाग ने कई जिलों में ओलावृष्टि, तेज आंधी और बारिश के लिए चार से आठ अप्रैल तक अलर्ट जारी किया है.
- बारिश और ओलावृष्टि के कारण किसान अपनी धनिया, प्याज, मटर जैसी फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई है.
अप्रैल का महीना शुरू हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद उत्तराखंड के तीन हजार मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी है. मौसम विभाग ने 10 अप्रैल तक उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई है. मौसम विभाग ने 4 अप्रैल को देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में ओलावृष्टि, तेज आंधी और हल्की से मध्यम बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. वहीं 5, 6, 7 और 8 अप्रैल को तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि की संभावना को लेकर येलो अलर्ट घोषित किया गया है.
फसलें बारिश और ओलों की मार से बर्बाद
उत्तराखंड में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है. पहाड़ों से लेकर मैदानों तक मौसम का मिजाज बदला हुआ दिखाई दे रहा है. राज्य के कई ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि हुई है, जिससे किसानों की फसलें प्रभावित हुई हैं. तेज हवाओं, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. कई इलाकों में खड़ी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं. विशेष रूप से नगदी फसलों- धनिया, प्याज, मटर सहित अन्य फसलें बारिश और ओलों की मार से बर्बाद हो गई हैं. मौसम विभाग ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि 10 अप्रैल तक उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के 3000 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना बनी रहेगी.
गौरतलब है कि उत्तराखंड में मार्च महीने के दौरान सामान्य से 11 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है. आमतौर पर मार्च का महीना गर्मियों की दस्तक लेकर आता है, लेकिन इस बार प्रदेश में मौसम पूरी तरह बदला हुआ नजर आया. लगातार बारिश और पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी के चलते पूरे महीने ठंड का एहसास बना रहा और तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया.
टिहरी में सबसे अधिक 100 एमएम बारिश रिकॉर्ड
मौसम विभाग के अनुसार, मार्च महीने में उत्तराखंड में औसतन 58 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 11 प्रतिशत अधिक है. जिलावार आंकड़ों की बात करें तो टिहरी जिले में सबसे अधिक 100 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि ऊधम सिंह नगर में सबसे कम 12 एमएम वर्षा हुई. राजधानी देहरादून में मार्च 2024 जैसा ही मौसम रहा- जहां 2022 में मार्च में 65 एमएम बारिश हुई थी, वहीं इस बार 64.6 एमएम बारिश दर्ज की गई.
ओलावृष्टि और तेज आंधी की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है. पर्वतीय जिलों में ट्रेकिंग गतिविधियों पर अस्थायी रूप से रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, प्रतिकूल मौसम को देखते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रेकिंग गतिविधियों को प्रतिबंधित या नियंत्रित रखा जाए. संवेदनशील क्षेत्रों में आवागमन पर निगरानी रखने, हर स्तर पर सतर्कता बनाए रखने और किसी भी आपदा या दुर्घटना की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही आपदा प्रबंधन की आईआरएस प्रणाली के तहत सभी नामित अधिकारी और विभागीय नोडल अधिकारी हाई अलर्ट पर रहेंगे.
मौसम के बदले मिजाज पर क्या है एक्सपर्ट की राय
मार्च और अब अप्रैल महीने में मौसम के बदले हुए स्वरूप को लेकर विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन का प्रभाव बता रहे हैं. पर्यावरण विशेषज्ञ प्रोफेसर एस.पी. सती का कहना है कि यह परिवर्तन ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का सीधा असर है. उन्होंने बताया कि अब सर्दियों में होने वाली बर्फबारी दिसंबर‑जनवरी के बजाय फरवरी‑मार्च में हो रही है.
प्रोफेसर सती के अनुसार, गर्मियों का मौसम लंबा होता जा रहा है और मानसून की बारिश का पैटर्न भी असामान्य हो गया है. कभी अचानक अत्यधिक बारिश हो जाती है, तो कभी लंबे समय तक बारिश नहीं होती. जिस तरीके और समय पर मानसून में बारिश होनी चाहिए थी, वह संतुलन अब पूरी तरह बिगड़ चुका है, जो आने वाले समय में और गंभीर प्रभाव डाल सकता है.
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