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परमाणु संयंत्र पर हमले को लेकर ईरान की चेतावनी, कहा - अगर रेडिएशन फैला तो खाड़ी के अन्य देश भी तबाह होंगे

ईरान ने कहा कि उसके बुशहर परमाणु संयंत्र के पास हमला हुआ है, जिसमें एक गार्ड की मौत हो गई और एक इमारत को नुकसान पहुंचा है.

परमाणु संयंत्र पर हमले को लेकर ईरान की चेतावनी, कहा - अगर रेडिएशन फैला तो खाड़ी के अन्य देश भी तबाह होंगे
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची
  • ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए हैं
  • उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने यूक्रेन के परमाणु संयंत्र के पास सैन्य गतिविधियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी
  • अराघची ने दावा किया कि इजरायल और अमेरिका ने ईरान के बुशेहर परमाणु संयंत्र पर चार बार बमबारी की है
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ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र (Bushehr Nuclear Power Plant) के पास हमला हुआ है, जिसमें एक गार्ड की मौत हो गई और एक इमारत को नुकसान पहुंचा है. जिस पर ईरान की तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया आई है. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जिस तरह यूक्रेन में परमाणु संयंत्र के पास सैन्य गतिविधियों पर पश्चिमी देशों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी, वैसी ही चिंता अब ईरान के मामले में बिल्कुल नहीं दिखाई जा रही है.

परमाणु साइट पर हो रहे हमलों पर ईरानी विदेश मंत्री का प्रतिक्रिया

ईरानी विदेश मंत्री ने दावा किया कि इजरायल और अमेरिका अब तक ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र पर चार बार बमबारी कर चुके हैं. अराघची के मुताबिक, अगर इस तरह के हमलों से रेडिएशन रिसाव होता है तो GCC देशों की राजधानियों में जीवन खत्म हो जाएगा, तेहरान में नहीं. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के पेट्रोकेमिकल ठिकानों पर किए जा रहे हमले इस संघर्ष के वास्तविक उद्देश्यों की ओर इशारा करते हैं.

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ईरान को परमाणु हासिल करने से रोकना मकसद

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध में इजरायल का घोषित लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है. वहीं परमाणु हथियारों के मामले में दुनिया में यह कोई छिपा हुआ रहस्य नहीं है कि इजराइल के पास परमाणु हथियारों का एक भंडार है. इसने 1950 के दशक में इनका विकास शुरू किया और 1960 के दशक के अंत तक पूरी तरह से परिचालन क्षमता हासिल कर ली. हालांकि इजरायल इस तथ्य की पुष्टि या खंडन करने से इनकार करता है, लेकिन हथियार नियंत्रण संगठनों ने आकलन किया है कि देश के पास लगभग 80-90 परमाणु हथियार हैं.

ईरान का परमाणु कार्यक्रम क्यों अमेरिका-इजरायल के लिए चिंता

दूसरी ओर, ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं रहा है, हालांकि उसका कार्यक्रम एक दशक से अधिक समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रहा है. आपको बता दें कि ईरान ने 2015 में अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी के साथ संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जिसे ईरान परमाणु समझौता भी कहा जाता है) पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत प्रतिबंधों में राहत के बदले ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाए गए. इसमें आईएईए पर्यवेक्षकों द्वारा निरीक्षण भी शामिल थे.

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हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2018 में इस समझौते से खुद को अलग कर लिया. तब से, ईरान ने अपने ऊर्जा कार्यक्रम के लिए आवश्यक स्तर से कहीं अधिक यूरेनियम संवर्धन किया है और पिछले साल, आईएईए ने कहा कि ईरान अपने परमाणु अप्रसार दायित्वों का पालन नहीं कर रहा है क्योंकि उसने अपने कार्यक्रम के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी है. हालांकि, मौजूदा युद्ध शुरू होने के बाद से, अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों ने पुष्टि की है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने के करीब नहीं था और न ही उसने अमेरिका या इजराइल के लिए तत्काल परमाणु खतरा पैदा किया था.

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