पिछले दिनों टी20 विश्व कप टीम से ड्रॉप होने के बाद शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछे गए सवाल पर 'किस्मत' की बात करने वाले भारतीय वनडे और टेस्ट कप्तान शुभमन गिल की ओर परीक्षा न्यूजीलैंड के खिलाफ होने जा रही है. वडोदरा में रविवार को पहले ही वनडे के साथ यह गिल की बतौर कप्तान सिर्फ दूसरी ही वनडे सीरीज होने जा रही है. जाहिर है कि आलोचकों की नजर गिल एंड कंपनी के प्रदर्शन, कप्तान की बॉडी लैंग्वेज और उनके फैसलों पर होगी क्योंकि पिछले साल टेस्ट में भारत का सफाया करने वाली कीवी टीम से मुकाबला वनडे में आसान नहीं होने जा रहा. चलिए आप सीरीज की पांच बड़ी बातें जान लीजिए:
1. गिल के लिए वापसी की लड़ाई
शुभमन गिल के पास वह टेम्प्रामेंट और मानसिक मजबूती है, जिससे वह खुद को मुश्किल हालात या चुनौतियों से बाहर निकालकर खुद को आगे खड़ा रख सकते हैं. आज के ताजा हालात उनके लिए नए हैं क्योंकि हाल ही में टी20 विश्व कप टीम से बाहर होने पर उन्हें जोर का झटका लगा है. ऐसे में उनके लिए यह सिर्फ सीरीज ही नहीं, वापसी की लड़ाई के साथ ही साल 2027 विश्व कप के मद्देनजर अभी से कई पहलुओं पर पकड़ बनाने के लिहाज से अहम है क्योंकि बतौर कप्तान यह सिर्फ उनकी दूसरी वनडे सीरीज है.
2. दोनों टीमों की जुदा सोच का टकराव
वनडे क्रिकेट को लेकर भारत और न्यूजीलैंड दोनों का ही अलग-अलग नजरिया है. भारत के लिए वनडे आज भी वह फॉर्मेट है जिसमें रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे बड़े सितारे पूरी गंभीरता से खेलते हैं. दूसरी तरफ न्यूज़ीलैंड के लिए द्विपक्षीय वनडे सीरीज अब कम प्राथमिकता वाला फॉर्मेट बनता जा रहा है. कीवी खिलाड़ियों के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट छोड़ने और फ्रैंचाइज़ी लीग्स चुनने का ट्रेंड साफ दिखता है. उसके सबसे स्टार खिलाड़ी और पूर्व कप्तान केन विलियमसन का SA20 के कारण नहीं आना भी इसी बदलाव की ओर इशारा करता है. ऐसे में शुरू होने जा रही सीरीज सिर्फ दो टीमों की ही टक्कर नहीं है, बल्कि यह दो नजरियों का टकराव है.
3. न्यूजीलैंड के लिए सीरीज कई वजहों से बड़ा चैलेंज
यह सही है कि कीवी टीम अपने स्टार खिलाड़ियों के बिना भी बेहतर करने में संभव है. हालिया सालों में न्यूजीलैंड की खेल शैली में मानसिक मजबूती बहुत ही ज्यादा प्रदर्शित हुई है, लेकिन इस टीम को भारत में खेलने का पर्याप्त अनुभव नहीं है. सीरीज के लिए घर से निकलने से पहले कप्तान ब्रेसवेल ने भी कहा, 'यह सीरीज कुछ खिलाड़ियों के लिए टी20 विश्व कप के लिए खुद को भारत के हालात से ढालने का अच्छा मौका है. कीवी टीम कितनी अनुभवहीन है, यह आप इससे समझ सकते हैं कि उसके 15 में से 8 खिलाड़ी भारत में कभी नहीं खेले, तो 2 खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए हैं. एक को अभी डेब्यू करना बाकी है, तो 5 खिलाड़ियों ने 10 से कम वनडे खेले हैं. ऐसे में इन सभी के लिए स्पिन का चैलेंज, भीड़ का दबाव, ओस, भारत की ठंड, टर्निंग ट्रैक सहित कई बातें मेजबानों के लिए दौरा खासा मुश्किल बना रही हैं.
4. टेस्ट होगा कीवी कप्तान ब्रेसवेल का भी
अब जबकि मिचेल सेंटनर नहीं हैं, तो देखना होगा कि माइकल ब्रेसवेल कैसी कप्ताी करते हैं. उनकी उम्र 35 की हो चुकी है. वह कोई सुपरस्टार नहीं हैं और कप्तानी भी उन्हें अचानक ही मिली है. भारत के खिलाफ सुखद यादों के रूप में उनके पास पूर्व में हैदराबाद में बनाया गया 140 रनों की शानदार पारी है. अब देखने की बात होगी कि वह टीम को कैसे संभालते हैं और भारतीय बल्लेबाजों पर स्पिन से कैसे दबाव वह बना पाएंगे. ब्रेसवेल एक तरह से टीम के प्रदर्शन की धुरी हैं. उनके प्रदर्शन के इर्द-गिर्द ही सबकुछ घूमेगा. वह अच्छा करेंगे, तो युवाओं को कॉन्फिडेंस मिलेगा
5. वडोदरा का पहला मैच अहम है!
सिर्फ तीन वनडे हैं, तो पहला मैच किसी भी टीम के लिए मनोवैज्ञानिक लिहाज से बहुत ही अहम है. खासतौर पर मेहमानों के लिए. वडोदरा की पिच और हालात मैच का रुख तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे. मौसम साफ रहने जा रहा है. हां यह देखना होगा कि कीवी भारत की ठंड से कैसे तालमेल बैठाते हैं. दोनों ही पालियों के शुरुआती 10 ओवर बहुत कुछ तय करेंगे. लड़ाई कीवियों के साथ मजेदार होने जा रही है.
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