India V/S New Zealand: पिछले साल कीवी टीम भारत आई, तो 3-0 से सफाया कर करोड़ों भारतीय फैंस को जीवन भर का गम दे गई. पूर्व क्रिकेटर, फैंस सहित तमाम पक्ष इससे उबरे भी नहीं थे कि अब न्यूजीलैंड ने वनडे सीरीज में रविवार को इंदौर में खेले गए आखिरी वनडे (Ind vs Nz 3rd ODI) में मेजबानों को 41 रन से धोकर टीम गिल को जोर का झटका दे डाला. ऐतिहासिक जीत के साथ ही न्यूजीलैंड ने सीरीज पर 2-1 से कब्जा कर लिया. अपनी ही धरती पर भारत की यह हार बहुत ही ज्यादा सालने वाली है. और अगर ऐसा हुआ, तो इसके पीछे यूं, तो कई वजहे रहीं, लेकिन आपको 5 सबसे बड़ी वजह के बारे में बता देते हैं. इन्हें बारी-बारी और क्रमवार जानिए:-
रोहित शर्मा की नाकामी; नहीं मिल सकी ठोस शुरुआत
अगर भारत को सीरीज में मात मिली, तो कुल मिलाकर तीनों ही मैचों में ठोस और शानदार शुरुआत न मिलना रहा. शुरुआती मैचों में छोर पर कप्तान गिल ही चले. रविवार को इंदौर में करो या मरो के लिहाज से रोहित के पास भरपाई करने और न्यूजीलैंड के स्कोर को देखते हुए शुरुआत देना अनिवार्य था, लेकिन रोहित सिर्फ 11 रन ही बना सके. तीन मैचों में रोहित ने 20.33 का ही औसत निकाल और भारत को अच्छी शुरुआत न मिलना सीरीज हार की सबसे बड़ी में से एक वजह बन गया.
2. मिड्ल ऑर्डर की रीढ़ कमजोर!
अगर विराट कोहली को अपवाद मान लें, तो सीरीज में मिड्ल ऑर्डर में रीढ़ दिखाई नहीं पड़ी. टॉप ऑर्डर (ओपनरों) की नाकामी के बीच मिड्ल ऑर्डर को एक ईकाई के रूप में प्रदर्शन करने की जरूर थी, लेकिन कभी केएल राहुल चले, तो कभी दूसरे छोर पर उन्हें सहारा नहीं मिला. और सबसे ज्यादा निराश किया नंबर चार श्रेयस अय्यर ने. इस नंबर पर टीम का सबसे जिम्मेदार बल्लेबाज को खिलाया जाता है. श्रेयस अय्यर के लिए अपनी जगह को पुख्ता करने का यह बेहतरीन मौका था, लेकिन 3 मैचों में 20 का औसत सबकुछ कहने और बताने के लिए काफी है.
3. ये कैसे ऑलराउंडर! कहां गया जड्डू का दम?
सीरीज हार के बाद फैंस के सबसे ज्यादा निशाने पर रवींद्र जडेजा हैं. और यहां से उनका भविष्य क्या होगा, या वह साल 2027 विश्व कप की नीति में कितने फिट बैठ पाएंगे, इसका जवाब तो वक्त ही देगा, लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ जडेजा सबसे बड़ी निराशा साबित हुए. इतने ज्यादा कि पूर्व क्रिकेटरों ने उनकी जगह अक्षर पटेल को जगह देने की मांग करना शुरू कर दिया है. यह बहुत ही बड़ी हैरानी रही कि जडेजा फेंके 23 ओवरों में पूरी सीरीज में एक भी विकेट नहीं चटका सके, तो बल्ले से वह 14.33 के औसत से 43 रन ही बना सके. वहीं, नितीश रेड्डी के आखिरी मैच में अर्द्धशतक को अपवाद माना जाए, तो ऑलराउंडर के समग्र प्रदर्शन पर वह बिल्कुल भी खरे नहीं उतरे और पूर्व दिग्गज तो उन्हें ऑलराउंडर तक मानने को राजी ही नहीं हैं. रेड्डी 3 मैचों में कप्तान का सिर्फ 10 ओवरों के कोटे का ही भरोसा जीत सके और उनके भी खाते में कोई विकेट नहीं आया.
4. कुलदीप का जादू कहां गया?
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज खत्म हुए करीब डेढ़ महीना ही हुआ है, लेकिन हैरानी की बात है कि चंद दिनों में ही कुलदीप का जादू हवा-हवाई हो गया. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कुलदीप यादव ने 3 मैचों 9 विकेट लिए थे. हर मैच में 3 विकेट, लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ पता नहीं कौन यादव जी की भैंस खोल कर ले गया!! खत्म हुई सीरीज में कुलदीप केवल 3 ही विकेट चटका सकते हैं, तो टीम इंडिया में उनका इकॉनमी रन-रेट (7.28) सबसे महंगा रहा.
(खबर जारी है...)
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