रविवार को लॉर्ड्स में भारत और इंग्लैंड के बीच 3 मैचों की वनडे सीरीज का आखिरी मुकाबला शुरू हो चुका है. मैच के दौरान टीमों के खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों ने महान खिलाड़ी सर गारफील्ड सोबर्स को श्रद्धांजलि देने के लिए काली पट्टी बांधी और एक मिनट का मौन रखा. सोबर्स का शुक्रवार को 89 साल की उम्र में निधन हो गया था. सीरीज का फैसला करने वाले मैच से पहले, दोनों टीमों के खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों ने मैदान पर लाइन में खड़े होकर सोबर्स के सम्मान में एक मिनट का मौन रखा. सोबर्स को खेल के इतिहास का सबसे महान ऑलराउंडर माना जाता है.
लॉर्ड्स में मौजूद दर्शकों ने भी दिखाया सम्मान
एक मिनट के मौन के दौरान लॉर्ड्स में मौजूद दर्शकों ने गहरा सम्मान दिखाया, जिससे सोबर्स के लिए पुरानी यादें और सम्मान की भावना जाग उठी. बारबाडोस में जन्मे सोबर्स खेल के एक बेजोड़ दिग्गज थे, जिनका इंटरनेशनल करियर 1954 से 1974 तक चला. उन्होंने 93 टेस्ट मैचों में 57.78 के शानदार औसत से 8,032 रन बनाए, साथ ही 235 विकेट लिए और 109 कैच पकड़े. वह फ़र्स्ट-क्लास क्रिकेट के इतिहास में एक ओवर में छह छक्के लगाने वाले पहले बल्लेबाज़ भी थे; उन्होंने यह कारनामा 1968 में किया था.
सोबर्स के निधन की खबर से टूट गए थे जोफ्रा आर्चर
तीसरे वनडे से पहले इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर ने ब्रॉडकास्टर्स से कहा, 'वेस्ट इंडीज क्रिकेट समुदाय के लिए वह एक लेजेंड हैं- अब तक के सबसे महान ऑलराउंडरों में से एक. मैंने कुछ महीने पहले उन्हें बारबाडोस में अपने घर पर देखा था और उन्होंने कहा था कि अपनी उम्र के हिसाब से वह ठीक-ठाक चल-फिर पा रहे हैं. उनके निधन की खबर सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ.'
टेस्ट मैचों में 8,000 रन और 200 विकेट का डबल
वेस्ट इंडीज के लिए 39 टेस्ट मैचों में कप्तानी करने के अलावा, सोबर्स उन दो खिलाड़ियों में से एक हैं (दूसरे जैक्स कैलिस हैं) जिन्होंने टेस्ट मैचों में 8,000 रन और 200 विकेट का डबल हासिल किया है. युवा बैटिंग ऑलराउंडर जैकब बेथेल ने ब्रॉडकास्टर्स से बात करते हुए सोबर्स को एक 'असाधारण व्यक्तित्व' वाला इंसान बताया और याद किया कि कैसे उन्होंने इंग्लैंड के लिए खेलने में उनकी मदद की थी. “वे एक बहुत ही शानदार और प्रभावशाली व्यक्ति थे, चाहे वह गोल्फ़ क्लब हो जहाँ मैं उनके साथ कुछ राउंड खेलने जाता था, या फिर क्रिकेट से जुड़ी गतिविधियां जिन्हें मैंने देखा. सबसे बड़ी बात यह थी कि वे बहुत ही विनम्र इंसान थे और हर कोई उनकी ओर खिंचा चला आता था.
'जब भी वे कहीं आते-जाते थे, तो वहां का माहौल जीवंत हो उठता था. उनके साथ कुछ समय बिताना और इतने ऊँचे दर्जे के व्यक्ति के आस-पास रहना वाकई अद्भुत अनुभव था. मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से सबसे बड़ी मदद यह थी कि उन्होंने मुझे इंग्लैंड आने में मदद की. (उन्होंने जो सिफ़ारिश पत्र लिखा था) उससे मुझे यहाँ आने और आज मैं जो कर रहा हूँ, उसे करने में बहुत मदद मिली.'
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