श्रीलंका में रविवार को ही खत्म हुई तीन देशों की A टीमों की ट्राई सीरीज के फानल में भारतीय सुपर किड वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) की 94 रन की सुनामी पारी के बाद अब उनकी चर्चा दुनिया के दिग्गजों के बीच फिर से हो रही है. फाइनल की प्लेयर ऑफ द मैच वाली पारी के बाद दक्षिण अफ्रीका के पूर्व बल्लेबाज डारेल कलिनन ने सूर्यवंशी की शारीरिक क्षमताओं पर पड़ने वाले दबाव को लेकर चिंता जाहिर की है. खासकर सूर्यवंशी की आक्रामक बैटिंग स्टाइल और बढ़ते वर्कलोड को देखते हुए.
सूर्यवंशी ने अपने बेखौफ अंदाज और शानदार पावर-हिटिंग के कारण बहुत जल्दी अपनी पहचान बना ली है. असाधारण बैट स्पीड (बल्ले की गति) पैदा करने की उनकी क्षमता उनके खेल की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक बन गई है. लेकिन कलिनन का मानना है कि इस तरह का अत्यधिक आक्रामक तरीका अंततः इस युवा खिलाड़ी के शरीर पर बुरा असर डाल सकता है. खासकर इसलिए क्योंकि उनका शरीर अभी भी विकसित हो रहा है.

डंबुला में ट्राई-नेशन सीरीज के फाइनल में सूर्यवंशी की मैच जिताऊ 94 रनों की पारी के बाद कलिनन ने लिंक्डइन पर पोस्ट किया, 'मैं इस युवा खिलाड़ी से बेहद प्रभावित हूं, लेकिन जो बात मुझे परेशान कर रही है और जिस पर कोई बात नहीं कर रहा है, वह है चोटें? 15 साल की उम्र में एक बड़ा बल्ला घुमाना. इतना अधिक क्रिकेट खेलना, मुझे उसकी कलाइयों, कोहनी, छोटे अंगों और जोड़ों को लेकर डर लग रहा है. मेडिकल ओपिनियन (चिकित्सीय राय) इस बारे में क्या कहती है? याद रखें, सचिन का करियर कोहनी की एक गंभीर चोट (टेनिस एल्बो) के कारण लगभग खत्म होने वाला था. वह निश्चित रूप से सूर्यवंशी की तरह इतनी बार और इतनी ताकत से बल्ला नहीं घुमाते थे.'
कलिनन ने भरोसा जताते हुए कहा कि सूर्यवंशी के शक्तिशाली शॉट्स से शरीर में पैदा होने वाला खिंचाव समय के साथ उनके शरीर पर काफी दबाव डाल सकता है. एक कमेंट का जवाब देते हुए कलिनन ने लिखा, 'मुझे लगता है कि वह काफी सख्त दिनचर्या का
पालन कर रहे होंगे. लेकिन तथ्य यह है कि वह अभी भी बढ़ रहे हैं, और उनके जोड़, लिगामेंट्स, मांसपेशियां भी विकसित हो रही हैं. यह मेरा अनुमान है. मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि उन पर बहुत अधिक खिंचाव और दबाव पड़ रहा होगा.'
दक्षिण अफ्रीका के इस पूर्व बल्लेबाज ने सचिन तेंदुलकर का उदाहरण दिया, जिनसे सूर्यवंशी की अक्सर तुलना की जाती है. तेंदुलकर का शानदार करियर 2004 में टेनिस एल्बो की एक गंभीर चोट के कारण खतरे में पड़ गया था. इसे उन्होंने बाद में अपने 24 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान लगे कई शारीरिक झटकों के बावजूद सबसे कठिन दौरों में से एक बताया था. कलिनन ने कहा, 'आधुनिक खेल में चुनौतियां और भी बड़ी हो सकती हैं. खिलाड़ी अब भारी बल्लों का उपयोग कर रहे हैं और पिछली पीढ़ियों की तुलना में बहुत अधिक व्यस्त क्रिकेट कैलेंडर में खेल रहे हैं. इससे मुझे लगता है कि युवा क्रिकेटरों में लंबे समय तक रहने वाली शारीरिक टूट-फूट का जोखिम बढ़ गया है.'
दक्षिण अफ्रीका के लिए 70 टेस्ट और 138 वनडे खेलने वाले कलिनन ने कहा, 'मैं ऐसे कई अच्छे खिलाड़ियों को जानता हूं जिन्हें कलाई की पुरानी (क्रॉनिक) समस्याएं हो गईं. बात यह है कि हम हल्के बल्लों का इस्तेमाल करते थे और बहुत कम क्रिकेट खेलते थे. वह अभी भी बढ़ रहे हैं, इस बात को याद रखने की जरूरत है. आज की ट्रेनिंग और रिकवरी के तरीके मदद जरूर करेंगे, लेकिन मैं उनके दीर्घकालिक भविष्य और स्वास्थ्य को लेकर डरा हुआ हूं.'
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