न्यूजीलैंड के खिलाफ नॉटिंघम के टेंट ब्रिज मैदान पर सिरीज का तीसरा और आखिरी टेस्ट मैच चल रहा था. पूरा इंग्लैंड चौथे दिन की क्रिकेट देख रहा था कि अचानक बेन स्टोक्स ने ड्रेसिंग रूम में अपने साथियों से कहा- 'बस... अब यहीं तक.' कुछ देर बाद पूरी दुनिया को पता चला कि इंग्लैंड का सबसे करिश्माई कप्तान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट छोड़ रहा है. कप्तानी छोड़ने के बाद स्टोक्स ने मीडिया से बात की और बोले, "मैं हर चीज से बहुत खुश हूं. इस फैसले को लेने में बहुत वक्त लगा, मैं इसे हल्के में नहीं लेता हूं. हां, मैंने ये फैसला ले लिया और मैं बहुत खुश हूं."
असल वजह थी थकान. जो मानसिक है, भावनात्मक भी, नेतृत्व की थकान भी और लगातार लड़ते रहने की थकान भी. यानी बर्नआउट. लेकिन... अगर इतिहास के पन्ने पलटें तो पता चलता है कि स्टोक्स अकेले ऐसे इंग्लिश कप्तान नहीं हैं जिन्होंने अचानक ही कप्तान की कमान छोड़ दी. इंग्लैंड क्रिकेट में कप्तानी कई बार ऐसी कुर्सी साबित हुई है जिसने महान खिलाड़ियों को भी समय से पहले झुका दिया.

बेन स्टोक्स
Photo Credit: AFP
बेन स्टोक्स को कप्तानी ने नहीं... कप्तानी का बोझ तोड़ गया
स्टोक्स ने 2022 में जब कप्तानी संभाली तब इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट के सबसे खराब दौर में था. उन्होंने ब्रेंडन मैकुलम के साथ मिलकर बैजबॉल शुरू किया.
हारती टीम को फिर से दुनिया की सबसे मनोरंजक टीम बना दिया. लेकिन... हर मैच में आक्रामक क्रिकेट, हर हार पर मीडिया ट्रायल, लगातार चोटें और उस पर 2017 की घटना की छाया, 2021 में मानसिक स्वास्थ्य का संकट, और अंततः लगातार शारीरिक-मानसिक थकान.
रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने माना कि अब वह मानसिक रूप से खाली हो चुके हैं.
बाद में सामने आई बातें. कप्तानी की जिम्मेदारी उन्हें भीतर से खा रही थी. उन्होंने स्वीकार किया कि क्रिकेट से प्यार बचाए रखने के लिए हटना जरूरी था. हालिया विवादों और लगातार बने हुए दबाव भी इस निर्णय की तेजी में सहायक बने.

नासिर हुसैन
Photo Credit: AFP
नासिर हुसैन (2003): वर्ल्ड कप ने तोड़ दिया आत्मविश्वास
2003 वर्ल़्ड कप. जिम्बाब्वे दौरे का विवाद. राजनीतिक दबाव. वर्ल्ड कप में निराशाजनक प्रदर्शन. फिर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सिरीज. पहला टेस्ट खत्म हुआ. और... नासिर हुसैन ने सिरीज खत्म होन से पहले ही कप्तानी छोड़ दी.
इसका कारण तब पता चला जब उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखा कि कप्तानी उन्हें मानसिक रूप से खत्म कर रही थी. वह खिलाड़ियों से ज्यादा राजनीति से लड़ रहे थे. मीडिया ने भी उन्हें लगभग रोज कठघरे में खड़ा किया.

एंड्र्यू स्ट्रॉस
Photo Credit: AFP
एंड्रयू स्ट्रॉस (2012): नंबर-1 टीम से सीधे संन्यास
जब एंड्रयू स्टॉस इंग्लैंड के कप्तान थे तब यह दुनिया की नंबर-1 टेस्ट टीम थी. लेकिन दक्षिण अफ्रीका से हारने से ये रैंकिंग चली गई. उन्होंने अपना 100वां टेस्ट खेला और फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए तो सबको लगा कि कप्तान छोड़ने का एलान करेंगे. लेकिन उन्होंने कहा- मैं क्रिकेट छोड़ रहा हूं.
बाद में सामने आई कहानी. उनके करीबी लोगों ने बताया कि स्ट्रॉस लगातार मानसिक रूप से थक चुके थे. वह नई टीम बनाना चाहते थे लेकिन खुद को उसमें फिट नहीं देख रहे थे.
फिर उनके उत्तराधिकारी बने एलिस्टेयर कुक.

एलिस्टेयर कुक
Photo Credit: AFP
एलिस्टेयर कुक (2017): सबसे सफल कप्तान, लेकिन...
एलिस्टेयर कुक ने 59 टेस्ट मैचों में कप्तानी का रिकॉर्ड बनाया. सबसे अधिक रन और इतिहास रचने के बाद 2016-17 के भारत दौरे के बाद महसूस किया कि टीम को अब नई सोच चाहिए. और फिर उन्होंने खुद से कप्तानी छोड़ दी. किसी ने हटाया नहीं और दुनिया अवाक. दिलचस्प ये है कि कुक ने बाद में कई इंटरव्यू के दौरान कहा कि कप्तानी करने के दौरान उनके अपने परिवार के लिए समय लगभग न के बराबर मिलता था. यहां तक कि उनकी नींद भी प्रभावित हो रही थी.
माइकल वॉन (2008): जब माइकल वॉन ने कप्तानी से इस्तीफा दिया था तब वो लगातार चोटों से प्रभावित रह रहे थे. उनका फॉर्म कुंद हो चुका था. एशेज के बाद टीम संकट में थी तो उन्होंने कप्तानी छोड़ दी. बाद में उन्होंने माना भी कि उनका शरीर साथ नहीं दे रहा था.

एंड्र्यू फ्लिंटॉफ
Photo Credit: AFP
एंड्रयू फ्लिंटॉफ (2007): एशेज में 0-5 से मिली हार
जिस तरह इयान बॉथम ने अकेले दम पर 1981 की एशेज इंग्लैंड को जिताई थी, एंड्र्यू फ्लिंटॉफ ने 24 साल बाद 2005 में वही कारनामा दोहराया. 19 साल बाद इंग्लैंड एशेज जीत सका. 2006 में उन्हें कप्तान बनाया गया. लेकिन एशेज में 0-5 से हारना उनकी कप्तानी में इंग्लैंड की सबसे बड़ी हार थी. 2007 में फ्लिंटॉफ शराब पीने के आरोप में पकड़े गए. लिंटॉफ टूट गए थे. तो उन्होंने कप्तानी छोड़ दी. बाद में स्वीकार किए कि वह कप्तान के तौर पर बने रहने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थे.

जो रूट
Photo Credit: AFP
जो रूट (2022)
जो रूट तेजी से सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड को तोड़ने की ओर बढ़ रहे हैं. 2022 गर्मियों में उनका इस्तीफा अचानक नहीं आया. दरअसल, 2017 में कुक के इस्तीफे के बाद रूट को कप्तान नियुक्त किया गया था लेकिन जल्द ही यह लगने लगा था कि ये फैसला सही नहीं था.
उनके नेतृत्व में इंग्लैंड की जीत-हार के अनुपात में तेजी से गिरावट आई. न्यूजीलैंड के खिलाफ घर और बाहर जाकर सिरीज जीते, लेकिन तीन एशेज सिरीज में से एक भी नहीं जीत सके. वेस्ट इंडीज के खिलाफ भी दो विदेशी सिरीज हार गए.
कप्तानी के दौरान उनकी बल्लेबाजी में भी गिरावट आई. उस दौरान एक साल के दरम्यान वे कोई टेस्ट शतक नहीं जमा सके. ऐसे में उन्होंने बेहद भावुक होते हुए इस्तीफा दिया और बोले- टीम को नई शुरुआत चाहिए. यहीं से बेन स्टोक्स युग की शुरुआत हुई जो 28 जून 2026 को उनके संन्यास के साथ खत्म हुआ.

Photo Credit: AFP
मानसिक थकान सबसे बड़ा विलेन
इंग्लैंड के अधिकतर कप्तानों ने मानसिक थकान की वजह से अपनी जिम्मेदारी छोड़ी. इसके पीछे वजहें लगभग हर बार एक जैसी रहीं.
लगातार मीडिया ट्रायल, एशेज का दबाव, कप्तान को हर हार का जिम्मेदार ठहराया जाना, क्रिकेट बोर्ड की अपेक्षाएं, परिवार से बढ़ती दूरी, चोटें, थकान (खासकर मानसिक थकान). ऐसी परिस्थिति में इंग्लैंड के कप्तान खुद ही इस्तीफा देते रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे बेन स्टोक्स ने दे दिया.
शायद यही इंग्लैंड क्रिकेट की सबसे बड़ी विडंबना भी है कि ये टीम महान कप्तान पैदा तो करती है, पर वही कप्तानी अक्सर उन महान खिलाड़ियों से उनकी सबसे बड़ी कीमत भी वसूल लेती है.
ये भी पढ़ें: हीरो भी, विवादों का चेहरा भी: बेन स्टोक्स की वह कहानी जिसने इंग्लैंड क्रिकेट को बदल दिया
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं