क्रिकेट के मैदान पर जब आकाशदीप गेंद हाथ में लेकर बल्लेबाजों को चुनौती देते हैं, तब शायद ही कोई अंदाजा लगा पाए कि इस खिलाड़ी की जिंदगी कितने संघर्षों से होकर गुजरी है. पिता का साया सिर से उठ गया, कुछ ही महीनों बाद बड़े भाई भी दुनिया छोड़ गए, सपने बिखरते नजर आए और क्रिकेट से तीन साल का लंबा रिश्ता टूट गया, लेकिन हार मानने के बजाय आकाशदीप ने वही किया जो बड़े खिलाड़ी करते हैं, हालात से लड़ाई. यही वजह है कि आज उनकी कहानी सिर्फ क्रिकेट की नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और उम्मीद की मिसाल बन चुकी है.
पिता और भाई के निधन ने दिया सबसे बड़ा जख्म
1996 में बिहार के सासाराम में जन्मे आकाशदीप एक साधारण परिवार से आते हैं. उनके पिता स्कूल शिक्षक थे और चाहते थे कि बेटा पढ़-लिखकर सरकारी नौकरी करे. लेकिन आकाश का सपना कुछ और था. उन्हें क्रिकेट से प्यार था और वह इसी फिल्ड में अपना भविष्य बनाना चाहते थे.
साल 2015 में उनकी जिंदगी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. महज 19 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया. इस सदमे से परिवार अभी उबर भी नहीं पाया था कि छह महीने बाद बड़े भाई का भी निधन हो गया. एक युवा के लिए यह ऐसा दौर था, जिसने उनकी दुनिया ही बदल दी. परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ीं और क्रिकेट का सपना धुंधला पड़ने लगा.
तीन साल तक टूटता रहा सपना, लेकिन उम्मीद जिंदा रही
पारिवारिक परिस्थितियों ने आकाशदीप को क्रिकेट से दूर कर दिया. जिस खेल को उन्होंने जिंदगी का लक्ष्य बनाया था, उसी से वह करीब तीन साल तक दूर रहे.यह समय उनके लिए सबसे कठिन था. हालांकि उनकी मां और बड़ी बहन लगातार उनका मनोबल बढ़ाती रहीं. परिवार ने उन्हें हार नहीं मानने दी. एक इंटरव्यू में आकाशदीप ने बताया कि, शुरुआत में उन्होंने कभी लेदर क्रिकेट भी नहीं देखा था कि यह कैसा होता है. टीवी भी हम तब देखते थे जब बड़े मैच होते थे. जब वर्ल्ड कप सेमीफाइनल और फाइनल होता था तो गांव के लोग चंदा इकट्ठा करके जनरेटर चलाते थे. फिर उस टीवी पर मैच को देखते थे.
टेनिस बॉल क्रिकेट से शुरू हुई दूसरी पारी
12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद आकाशदीप पश्चिम बंगाल चले गए. वहां उन्होंने पढ़ाई जारी रखने के साथ क्रिकेट को दोबारा मौका देने की कोशिश शुरू की. आर्थिक तंगी उनके सामने बड़ी चुनौती थी, इसलिए वह टेनिस बॉल क्रिकेट टूर्नामेंट खेलने लगे. इससे कुछ कमाई भी हो जाती थी और खेल से जुड़ाव भी बना रहता था. इसी दौरान उनकी मुलाकात भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी से हुई. शमी की सलाह और मार्गदर्शन ने आकाशदीप की प्रतिभा को नई दिशा दी. उनकी गेंदबाजी में निखार आया और मेहनत का असर दिखने लगा.
रणजी ट्रॉफी से शुरू हुआ शानदार कमबैक
साल 2019 में आकाशदीप को बंगाल की ओर से फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलने का मौका मिला. यह उनके करियर का बड़ा मोड़ था. 2019-20 रणजी ट्रॉफी सीजन में उन्होंने 35 विकेट लेकर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया.
पिता और भाई को खोने के सिर्फ चार साल बाद आकाशदीप ने साबित कर दिया कि मुश्किलें सपनों को रोक सकती हैं, खत्म नहीं कर सकतीं. उनका शानदार प्रदर्शन उन्हें लगातार आगे बढ़ाता रहा और 2022 में उन्हें आईपीएल का टिकट भी मिल गया.
बहन की बीमारी बनी नई परीक्षा
जब ऐसा लग रहा था कि जिंदगी अब पटरी पर लौट आई है, तभी परिवार को पता चला कि उनकी बड़ी बहन अखंड ज्योति सिंह कैंसर से जूझ रही हैं. यह आकाशदीप और उनके परिवार के लिए एक और कठिन परीक्षा थी. लेकिन इस बार आकाशदीप पहले से ज्यादा मजबूत थे. उन्होंने अपनी बहन की लड़ाई को अपनी प्रेरणा बना लिया.
साल 2025 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में आकाशदीप ने 10 विकेट लेकर इतिहास रचा. यह उनके करियर का सबसे बड़ा प्रदर्शन था, लेकिन इस उपलब्धि को उन्होंने खुद के लिए नहीं, बल्कि अपनी कैंसर से लड़ रही बहन के नाम कर दिया. मैच के बाद उन्होंने कहा कि उनकी बहन उनका प्रदर्शन देखकर खुश होंगी और यही उनके लिए सबसे बड़ी बात है. दूसरी ओर बहन अखंड ज्योति सिंह भी अपने भाई की सफलता से भावुक हो गईं. उन्होंने कहा कि भाई की उपलब्धि देखकर कुछ समय के लिए वह अपनी बीमारी का दर्द तक भूल गईं.
आकाशदीप की कहानी सिर्फ विकेटों, रिकॉर्डों और उपलब्धियों की कहानी नहीं है। यह उस युवा की कहानी है जिसने जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर में भी हार मानने से इनकार कर दिया. पिता और भाई को खोने का दुख, आर्थिक संघर्ष, अधूरे होते सपने और फिर परिवार की एक और बड़ी चुनौती. इन सबके बीच आकाशदीप ने धैर्य रखा, मेहनत जारी रखी और अपनी बारी का इंतजार किया.
आकाशदीप का क्रिकेट करियर
आकाशदीप ने अब तक भारत के लिए 10 टेस्ट मैच खेले हैं और 18 पारियों में 28 विकेट अपने नाम किए हैं. उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन एक पारी में 6/99 और मैच में 10/187 रहा है. टेस्ट क्रिकेट में उनका औसत 35.79, इकॉनमी 3.91 और स्ट्राइक रेट 54.86 का है. घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन के दम पर उन्होंने भारतीय टीम में जगह बनाई और इंग्लैंड के खिलाफ 10 विकेट लेकर अपनी पहचान मजबूत की. वहीं आईपीएल में 14 मैचों में 10 विकेट हासिल कर चुके आकाशदीप अपनी रफ्तार और स्विंग से बल्लेबाजों के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं. संघर्षों से भरे सफर के बावजूद उन्होंने खुद को भारतीय क्रिकेट के उभरते तेज गेंदबाजों में शामिल कर लिया है.
अब करोड़ों में होती है कमाई
आकाशदीप बीसीसीआई की सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट में शामिल चुनिंदा खिलाड़ियों में से एक हैं. भारतीय तेज गेंदबाज ने साल 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था और इसके बाद अपनी प्रभावशाली गेंदबाजी से टीम में खास पहचान बनाई. बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान भी उन्होंने भारत के लिए अहम भूमिका निभाई. उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन का इनाम उन्हें बीसीसीआई के ग्रेड-सी कॉन्ट्रैक्ट के रूप में मिला है, जिसके तहत उन्हें सालाना 1 करोड़ रुपये की राशि मिलेगी.
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