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वेदांता ग्रुप की जानलेवा घटनाएं : सक्ती पावर प्लांट धमाके से पहले छत्तीसगढ़ में इस हादसे में हुई थीं 40 मौतें

Vedanta Power Plant Blast: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता समूह के पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए भीषण धमाके में अब तक 21 श्रमिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 14 गंभीर रूप से घायल हैं. यह हादसा छत्तीसगढ़ में वेदांता के पूर्व औद्योगिक हादसों की कड़ी में एक और गंभीर उदाहरण बनकर उभरा है. पढ़िए छत्तीसगढ़ में वेदांता के औद्योगिक हादसों का इतिहास.

वेदांता ग्रुप की जानलेवा घटनाएं : सक्ती पावर प्लांट धमाके से पहले छत्तीसगढ़ में इस हादसे में हुई थीं 40 मौतें
छत्तीसगढ़ में वेदांता के औद्योगिक हादसों का इतिहास

Vedanta Power Plant Blast Sakti: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता समूह के पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुआ भीषण धमाका राज्य के औद्योगिक इतिहास के सबसे दर्दनाक हादसों की कतार में एक और भयावह अध्याय जोड़ गया है. इस हादसे में अब तक 21 श्रमिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 14 मजदूर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं. शुरुआती जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि यह हादसा अचानक नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और तकनीकी खामियों को नजरअंदाज करने का नतीजा था. घटना के बाद से वेदांता समूह पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, खासकर इसलिए क्योंकि छत्तीसगढ़ में इससे पहले भी उसके कारखानों में सबसे बड़े औद्योगिक हादसे हो चुके हैं.

14 अप्रैल की दोपहर कैसे हुआ धमाका?

जानकारी के मुताबिक 14 अप्रैल की दोपहर वेदांता पावर प्लांट की एक यूनिट में जोरदार विस्फोट हुआ. धमाका इतना भीषण था कि प्लांट में काम कर रहे दर्जनों मजदूर उसकी चपेट में आ गए. कई मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि कुछ ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. राहत और बचाव दल ने घंटे भर की मशक्कत के बाद मलबे में फंसे श्रमिकों को बाहर निकाला.

प्राथमिक जांच में लापरवाही के संकेत

प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि प्लांट में सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा था. तकनीकी खामियों की जानकारी होने के बावजूद उत्पादन जारी रखा गया. विशेषज्ञों का मानना है कि बॉयलर और अन्य इकाइयों की नियमित जांच नहीं की गई, जिससे विस्फोट की आशंका पहले से मौजूद थी.

Vedanta Power Plant Blast: छत्तीसगढ़ में वेदांता के औद्योगिक हादसों का इतिहास

Vedanta Power Plant Blast: छत्तीसगढ़ में वेदांता के औद्योगिक हादसों का इतिहास

सब-कॉन्ट्रैक्टर पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश

वेदांता पावर प्लांट के प्रवक्ता ने सफाई देते हुए कहा कि प्रभावित यूनिट का संचालन और रखरखाव उनकी सब-कॉन्ट्रैक्टर कंपनी एनजीएसएल (NGSL) के कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा था. हालांकि श्रमिक संगठनों और स्थानीय प्रशासन का कहना है कि मुख्य कंपनी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती.

छत्तीसगढ़ में वेदांता के पुराने हादसों की कड़ी

छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद राज्य में कई औद्योगिक हादसे हुए, लेकिन सबसे भीषण दुर्घटनाएं वेदांता समूह के कारखानों में ही सामने आई हैं.
राज्य का सबसे बड़ा औद्योगिक हादसा 23 सितंबर 2009 को कोरबा में स्थित वेदांता-स्टेरलाइट पावर प्लांट में हुआ था, जब 1200 मेगावाट संयंत्र की 240 मीटर ऊंची चिमनी गिर गई थी. इस हादसे में करीब 40 मजदूरों की मलबे में दबकर मौत हो गई थी. मृतकों में अधिकांश बिहार के सारण क्षेत्र के श्रमिक थे.

‘हादसा नहीं, सुनियोजित लापरवाही'

कोरबा चिमनी हादसे की जांच में सामने आया था कि जिस जमीन पर चिमनी बनाई जा रही थी, उसके लिए कभी कोई एनओसी जारी ही नहीं की गई. निर्माण कोरबा विकास योजना के प्रावधानों के खिलाफ था और किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति नहीं ली गई थी. विशेषज्ञों ने इसे सीधे तौर पर सुनियोजित लापरवाही करार दिया था.

15 साल बाद भी अधूरा न्याय

कोरबा हादसे के 15 साल बाद जाकर चिमनी निर्माण से जुड़ी बालको, सेपको, जीडीसीएल, बीवीआईएल और डीसीपीएल सहित पांच कंपनियों को आरोपी बनाया गया. चिमनी निर्माता कंपनी सेपको के तीन चीनी इंजीनियर दोषी ठहराए गए, लेकिन वे विशेष अदालत में पेश ही नहीं हुए.
आज भी यह सवाल कायम है कि 40 मजदूरों की मौत के जिम्मेदारों को अब तक सख्त सजा क्यों नहीं मिली.

कानून और तंत्र होने के बावजूद हादसे क्यों?

छत्तीसगढ़ में कारखाना अधिनियम 1948, बॉयलर अधिनियम 1923 और औद्योगिक सुरक्षा व स्वास्थ्य विभाग जैसे मजबूत कानून और संस्थाएं मौजूद हैं. फिर भी सक्ती और इससे पहले कोरबा जैसे हादसे यह दिखाते हैं कि जांच तंत्र, निगरानी और जवाबदेही कहीं न कहीं कमजोर है.

सक्ती हादसा क्या बदलेगा तस्वीर?

सक्ती पावर प्लांट धमाके ने एक बार फिर उद्योगों में श्रमिक सुरक्षा, कॉरपोरेट जवाबदेही और सरकारी निगरानी पर गंभीर बहस छेड़ दी है. सवाल यह है कि क्या इस बार मौतों के आंकड़ों से आगे बढ़कर जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई होगी, या यह हादसा भी पिछले हादसों की तरह सिर्फ फाइलों में सिमटकर रह जाएगा. पीड़ित परिवारों और श्रमिक संगठनों की निगाहें अब जांच रिपोर्ट और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं.

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