ED Action: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़े वित्तीय घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 10.80 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है. यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है. मामला मेसर्स तीर्थ गोपिकॉन लिमिटेड (TGL) और उसके प्रमोटर्स से जुड़ा है, जिन पर सरकारी एजेंसियों को जाली बैंक गारंटी सौंपकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है. जांच में सामने आया है कि फर्जी दस्तावेजों और नकली ईमेल के जरिए सरकारी संस्थानों को गुमराह कर भारी रकम हासिल की गई, जिसे बाद में संपत्तियों में निवेश किया गया.
TGL और प्रमोटर्स पर शिकंजा
ED की यह कार्रवाई नई दिल्ली स्थित मुख्यालय जांच इकाई द्वारा की गई है. एजेंसी का कहना है कि यह कुर्की TGL और उसके प्रमोटर्स द्वारा की गई सुनियोजित धोखाधड़ी से जुड़ी जांच का हिस्सा है. कंपनी ने कथित तौर पर सरकारी परियोजनाओं के लिए फर्जी बैंक गारंटी जमा कर भारी रकम का अग्रिम भुगतान हासिल किया था.
ED Action: जाली बैंक गारंटी घोटाला
CBI और पुलिस की FIR से शुरू हुई जांच
ED ने इस मामले में जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), भोपाल, और राजस्थान पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई FIR के आधार पर शुरू की. इन FIR में भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप शामिल थे, जो PMLA के तहत अनुसूचित अपराध की श्रेणी में आते हैं.
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जाली बैंक गारंटी का बड़ा खेल
जांच में सामने आया कि TGL ने अपने प्रबंध निदेशक महेश कुम्भानी के नेतृत्व में एक संगठित साजिश रची. इसमें राकेश जागीरदार, गौरव धाकड़, राहुल गुप्ता, मोहम्मद फिरोज खान और पंजाब नेशनल बैंक के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक गोविंद चंद्र हांसदा सहित अन्य लोग शामिल थे. आरोप है कि इन लोगों ने पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के नाम से जाली बैंक गारंटी तैयार कर दो प्रमुख सरकारी एजेंसियों (मध्य प्रदेश जल निगम मर्यादित (MPJNM) और राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RRECL)) को सौंपी इन फर्जी गारंटी के आधार पर करीब 202.01 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान सरकारी खजाने से हासिल किया गया.
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नकली ईमेल डोमेन से वेरिफिकेशन का झांसा
जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ. आरोपियों ने “pnb-india.co” नाम से एक फर्जी ईमेल डोमेन बनाया, जो देखने में पंजाब नेशनल बैंक की आधिकारिक ईमेल आईडी जैसा था. इसी डोमेन से सरकारी एजेंसियों को झूठे वेरिफिकेशन ईमेल भेजे गए, ताकि जाली बैंक गारंटी को असली साबित किया जा सके और भुगतान जारी हो जाए.
घोटाले की रकम का डायवर्जन और लेयरिंग
ED के मुताबिक, धोखाधड़ी से हासिल की गई राशि पहले TGL के बैंक खातों में जमा हुई. इसके बाद लगभग 22.12 करोड़ रुपये को योजनाबद्ध तरीके से कंपनी के अन्य खातों और महेश कुम्भानी, उनकी पत्नी चंद्रिकाबेन कुम्भानी और बेटे पल्लव कुम्भानी के निजी बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया. इस लेन-देन का कोई वैध व्यावसायिक कारण नहीं पाया गया. बाद में इस रकम को कई स्तरों पर घुमाकर (लेयरिंग) इंदौर (मध्यप्रदेश) और अहमदाबाद (गुजरात) में प्रमोटर्स और उनके परिजनों के नाम अचल संपत्तियों में निवेश किया गया. इन्हीं संपत्तियों को अब कुर्क किया गया है.
गिरफ्तारी और चार्जशीट
इस मामले में CBI ने अब तक महेश कुम्भानी, मोहम्मद फिरोज खान, गोविंद चंद्र हांसदा, गौरव धाकड़ और राहुल गुप्ता को गिरफ्तार किया है. एजेंसी ने इन सभी के खिलाफ विशेष CBI अदालत, इंदौर में चार्जशीट भी दाखिल कर दी है. ED का कहना है कि मामले में जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी कार्रवाई संभव है.
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