देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और ई-रिक्शा को खरीदने की स्पीड जितनी तेजी से बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से इससे जुड़े साइबर और डिजिटल फ्रॉड के मामले भी सामने आ रहे हैं. अभी की बात करें तो ई-रिक्शा चालकों के बीच एक नया खौफ पैदा हो गया है, जिसका नाम है BAT-BMS. दरअसल सोशल मीडिया पर पिछले दिनों कई ऐसे वीडियो वायरल हुए जिसमें BAT-BMS ऐप के जरिए ई-रिक्शा को दूर बैठे ही कुछ ही सेकेंड्स में बंद करते हुए दिखाया जा रहा है.
ये है ही, परेशानी वाली बात! सोचिए भलाआप किसी ई-रिक्शे में बैठकर अपने घर या दफ्तर जा रहे हों और बीच रास्ते में अचानक ई-रिक्शा बंद हो जाए, तो क्या होगा. कुछ ऐसा ही इन वायरल वीडियो में देखा जा रहा है. समस्या बड़ी है पर समाधान क्या है.... इस बारे में जानेंगे विस्तार से. पहले ये वीडियो देखिए.
A mobile app called BAT-BMS is going viral for allegedly connecting to nearby e-rickshaws via Bluetooth and switching off their battery output, potentially stopping the vehicle while it's being driven.
— TrakinTech (@TrakinTech) July 1, 2026
If true, should this app be banned?
Source - Insta/hegotwhips pic.twitter.com/ooEE3w1SB6
ऐसा नहीं है कि इस समस्या से सिर्फ ई-रिक्शा वाले ही परेशान हैं. बल्कि ईवी ग्राहकों को भी इस प्रॉब्लम से दो-चार होना पड़ सकता है. ऐसा क्यों हम कह रहे हैं, इसे आप खुद ही खबर को पढ़ कर जान जाएंगे.
#WATCH | Delhi: A smartphone app named BAT-BMS is being used by people to remotely disable moving e-rickshaws through a Bluetooth connection.
— ANI (@ANI) July 2, 2026
Speaking on a video by him, allegedly showing individuals using the mobile app to remotely disable moving e-rickshaws, influencer Amaan… pic.twitter.com/xqCURbwbPx
चलिए समझने की कोशिश करते कि आखिर ये BAT-BMS का क्या खेल है, ये कैसे आपकी गाड़ी या ई-रिक्शा को हैक कर सकता है और इससे बचने के लिए क्या करें.
क्या है BAT-BMS?
BMS का मतलब है बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम. ये किसी भी इलेक्ट्रिक व्हीकल का दिमाग कह सकते हैं, जो बैटरी के टेंपरेचर, वोल्टेज और चार्जिंग को कंट्रोल करता है. BAT-BMS दरअसल चीन का एक मोबाइल एप्लिकेशन है, जो चीनी मूल के सस्ते या बिना ब्रांड वाले BMS सर्किट से जुड़ा होता है. भारत में बिकने वाले कई अनऑर्गनाइज्ड ई-रिक्शा और ईवी कंपोनेंट्स में इसी चाइनीज BMS सर्किट का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है.
एनडीटीवी की पड़ताल में क्या पता चला?
वीडियो सामने आने के बाद NDTV ने पूरे मामले को लेकर रियलिटी चेक किया. टीम ने पहले BAT-BMS ऐप की जांच की. ये ऐप बैटरी से आसानी से कनेक्ट हो गया, लेकिन जब ई-रिक्शा को बंद करने की कोशिश की गई तो पासवर्ड मांगा गया. सही पासवर्ड के बिना वाहन को बंद नहीं किया जा सका. इससे पता चलता है कि इस ऐप में सेफ्टी के लिए एक्सट्रा सेफ्टी फीचर जोड़े हैं. इसके बाद एनडीटीवी टीम ने Epoch Li-ion ऐप को जांचा. ये ऐप भी उसी बैटरी से तुरंत कनेक्ट हो गया और एक टैप में ई-रिक्शा बंद हो गया. रिक्शे की डिस्प्ले बंद हो गई और उसे दोबारा स्टार्ट नहीं करा जा सका. ई-रिक्शा तभी चालू हुआ, जब उसे ऐप के जरिए फिर से ऑन किया. इससे पता चला कि BAT-BMS ऐप के जरिए वाहन को दूर से कंट्रोल किया जा सकता है.
BAT-BMS से कैसे हैक होता है व्हीकल?
ये पूरा खेल एक रिमोट कंट्रोल ब्लैकमेलिंग के जैसे काम करता है. इन चाइनीज BMS में ब्लूटूथ या सिम कार्ड बेस्ड इंटरनेट कनेक्टिविटी होती है. इन ऐप का मास्टर कंट्रोल अक्सर उन डीलरों, फाइनेंसरों या चीनी सप्लायर्स के पास होता है, जिन्होंने ये बैटरी या व्हीकल बेचे होते हैं. मान लीजिए अगर किसी ई रिक्शा मालिक की ईएमआई में एक दिन की भी देरी हो, तो वो दूर बैठे ही BAT-BMS ऐप से उनके इस ई-रिक्शा की बैटरी को ब्लॉक कर सकते हैं. इसके बाद की कहानी तो आपको पता ही है. ई-रिक्शा सड़क के बीच में ही खड़ा हो जाता है. जब तक ऐप से कमांड नहीं मिलता, ये दोबारा स्टार्ट नहीं हो सकता.
BAT-BMS के इस जाल से कैसे बचें?
सारा मसला समझने के बाद अब जरा ये जान लीजिए कि इससे बचने के क्या रास्ते हैं?
- देखिए अगर आप भी ई-रिक्शा चलाते हैं या कोई इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर या फि फोर-व्हीलर खरीदने की सोच रहे हैं, तो सस्ते के चक्कर में कभी भी लोकल या बिना ब्रांड वाले ई-रिक्शा या लिथियम-आयन बैटरी ना खरीदें. पक्का करें कि व्हीकल और उसकी बैटरी को ARAI या फिर ICAT जैसी सरकारी संस्थाओं से परमिशन मिली हो.
- इसके अलावा गाड़ी लेते टाइम डीलर से साफ-साफ पूछें कि उसमें कौन सा BMS लगा है. BAT-BMS से ऑपरेट होने वाले सिस्टम को छोड़ भारतीय या ग्लोबल स्टैंडर्ड के सेफ सॉफ्टवेयर वाले व्हीकल्स को ही चुनें.
- तीसरी तरीका ऐप्स से जुड़ा है. दरअसल कई बार डीलर आपको बैटरी की परफॉर्मेंस चेक करने के नाम पर कोई थर्ड-पार्टी चाइनीज ऐप डाउनलोड करने को कह सकते हैं. ऐसे में किसी भी ऐप को अपने फोन में इंस्टॉल ना करें. ऐसा इसलिए क्योंकि ये फोन के जरिए गाड़ी का डेटा चुरा सकते हैं.
- लोन एग्रीमेंट का भी यहां एक मसला है. दरअसल ज्यादातर ग्राहक ई-रिक्शा या ईवी लोन पर ही लेते हैं. तो लोन एग्रीमेंट को पढ़ने में कोई जल्दबाजी ना करें. क्योंकि इसमें ऐसा क्लॉज हो सकता है, जिससे फाइनेंसर को आपकी गाड़ी को रिमोटली लॉक करने का राइट मिल जाए. बिना किसी अधिकार के किसी भी गाड़ी को बीच सड़क पर लॉक नहीं किया जा सकता.
ऐसी सर्किट वाली सभी EV खतरे में
जैसा हमने आपको बताया था कि सिर्फ ई-रिक्शा ही नहीं बल्कि हर एक वो ईवी ग्राहक इस समस्या से परेशान हो सकता है, जिसकी गाड़ी में ये चाइनीज सर्किट लगा होगा. ऐसे में भले ही कुछ रुपये ज्यादा दे दीजिए, पर अच्छी कंपनी से ही इन ईवी गाड़ियों को खरीदें.
परिवहन मंत्री ने पूरे मसले पर क्या कहा?
इस मामले पर दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने NDTV से बात करते हुए कहा: "ये बहुत गंभीर और सुरक्षा से जुड़ा मामला है. बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के, किसी चीनी ऐप के जरिए सड़क पर चलती गाड़ी को रिमोटली बंद कर देना ना सिर्फ चालकों की आजीविका पर हमला है, बल्कि ये सड़क सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है. परिवहन विभाग ऐसी चीनी बैटरियों और ऐप्स की जांच कर रहा है. हम जल्द ही दिल्ली में केवल सर्टिफाइड और मेड-इन-इंडिया BMS वाले वाहनों और बैटरियों को ही लागू करने के लिए कदम उठाएंगे."
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