दुनिया की बड़ी इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट कंपनियों में शामिल अमेरिकी फर्म कैपिटल ग्रुप ने हाल में अदाणी ग्रुप की कंपनियों में बड़ा निवेश किया है, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज में अपनी हिस्सेदारी लगातार घटाई है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, लॉस एंजेलिस स्थित कैपिटल ग्रुप ने हाल के हफ्तों में अदाणी समूह की तीन कंपनियों अदाणी पोर्ट्स, अदाणी पावर और अदाणी ग्रीन एनर्जी में 2 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है. बताया गया है कि कंपनी ने ओपन मार्केट ट्रांजैक्शन के जरिए इन कंपनियों में 1.5% से 2% तक हिस्सेदारी खरीदी है.
अदाणी पोर्ट्स में खरीदी करीब 2% हिस्सेदारी
रिपोर्ट के मुताबिक, 5 मई को कैपिटल ग्रुप ने ओपन मार्केट डील के जरिए अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) में करीब 2% हिस्सेदारी खरीदी. इस डील की कीमत 7,486 करोड़ रुपये यानी करीब 776 मिलियन डॉलर बताई गई है. यह जानकारी बीएसई के ब्लॉक डील डेटा में सामने आई.
क्यों बढ़ रहा है अदाणी समूह पर भरोसा?
रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल इन्वेस्टर के लिए अदाणी ग्रुप अब भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, एनर्जी ट्रांजिशन और मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ पर बड़ा दांव माना जा रहा है. ऐसे समय में जब कुछ निवेशक भारतीय बाजार से दूरी बना रहे हैं, अदाणी कंपनियां भारत की फ्यचर इकॉनॉमिक ग्रोथ का अहम हिस्सा बनकर उभरी हैं.
बीते एक साल में अदाणी पावर के शेयरों में 94%, अदाणी ग्रीन एनर्जी में 35% और अदाणी पोर्ट्स में 25% की तेजी दर्ज की गई है.
अदाणी समूह पर ग्लोबल इन्वेस्टर मेहरबान
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अदाणी समूह पर महीनों चली रेगुलेटरी से जुड़े मामले और मार्केट वोलैटिलिटी के बाद अब निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे लौट रहा है. अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) की ओर से अदाणी ग्रुप से जुड़े सभी मामले को पूरी तरह बंद करने का फैसला समूह के लिए बड़ी राहत माना गया है. इससे कंपनी पर कानूनी जोखिम का दबाव कम हुआ है और ग्लोबल इन्वेस्टर का भरोसा मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है.
हालांकि, कैपिटल ग्रुप की प्रवक्ता ने व्यक्तिगत शेयरों या होल्डिंग्स पर टिप्पणी करने से इनकार किया. वहीं अदाणी समूह की ओर से भी इस रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई.
रिलायंस में लगातार कम हो रही हिस्सेदारी
दूसरी ओर, ब्लूमबर्ग डेटा के अनुसार कैपिटल ग्रुप की रिलायंस इंडस्ट्रीज में हिस्सेदारी पिछले कुछ वर्षों में तेजी से घटी है. मार्च के अंत तक कंपनी के पास रिलायंस के करीब 142 मिलियन शेयर थे, जबकि छह साल पहले यह संख्या लगभग 500 मिलियन थी. मार्च 2017 में यह हिस्सेदारी 755 मिलियन शेयरों के शिखर पर थी.
रिलायंस की ग्रोथ और शेयर पर असर
रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज अभी भी विदेशी फंड्स के बीच सबसे ज्यादा ट्रैक की जाने वाली कंपनियों में शामिल है, लेकिन टेलीकॉम, रिटेल और एनर्जी बिजनेस में तेज विस्तार के बाद कंपनी की कमाई की रफ्तार और शेयर प्रदर्शन में नरमी देखी गई है. पिछले एक साल में रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर करीब 8.36% कमजोर हुए हैं.
(Disclaimer: New Delhi Television is a subsidiary of AMG Media Networks Limited, an Adani Group Company.)
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