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US फेड ने लगातार तीसरी नहीं घटाई ब्याज दरें, ईरान युद्ध और महंगाई ने बढ़ाई टेंशन, आगे रेट घटेंगी या बढ़ेंगी?

US Fed FOMC Meeting Updates:बता दें कि फेड ने आखिरी बार दिसंबर 2025 में ब्याज दरों में 0.25% की कटौती की थी, लेकिन फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते यह लगातार तीसरी बार है जब फेड ने दरों को जस का तस रखा है.

US फेड ने लगातार तीसरी नहीं घटाई ब्याज दरें, ईरान युद्ध और महंगाई ने बढ़ाई टेंशन, आगे रेट घटेंगी या बढ़ेंगी?
US Federal Reserve Interest Rate April 2026: फेड का लक्ष्य महंगाई को 2% के स्तर पर वापस लाना है. 

US Fed Rate Decision: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालातों का असर अब दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर पड़ने लगा है. अमेरिकी केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) ने ब्याज दरों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है, जिसका सीधा कनेक्शन बढ़ती महंगाई और ग्लोबल टेंशन से है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी दो-दिन की बैठक के बाद फैसला लिया है कि ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. बेंचमार्क लेंडिंग रेट्स को 3.5% से 3.75% की लिमिट में स्थिर रखा गया है.यह लगातार तीसरी बार है जब फेड ने दरों को जस का तस रखा है.

फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने साफ कर दिया है कि जब तक महंगाई काबू में नहीं आती, तब तक नरमी की उम्मीद कम है. आइए समझते हैं फेड के इस फैसले का मतलब और इसके पीछे की असली वजह...

ईरान युद्ध और महंगाई का डबल अटैक 

फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने अपने बयान में कहा कि महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर है. इसका एक बड़ा कारण ग्लोबल लेवल पर एनर्जी की कीमतों (Energy Prices) में हालिया बढ़ोतरी है. मार्च में अमेरिका की महंगाई दर (CPI) बढ़कर 3.3% पर पहुंच गई, जो पिछले 22 महीनों में सबसे ज्यादा है. फरवरी में यह केवल 2.4% थी. अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से गैस की कीमतें चार साल के रिकॉर्ड स्तर पर हैं, जिसने महंगाई की आग में घी डालने का काम किया है.

फेड में पहली बार दिखी इतना बड़ा मतभेद 

हैरानी की बात यह है कि इस बार फेड का फैसला सर्वसम्मति से नहीं लिया गया. कुल 12 सदस्यों में से 8 सदस्य दरें स्थिर रखने के पक्ष में थे, जबकि 4 सदस्य ब्याज दरों में कटौती चाहते थे. साल 1992 के बाद यह पहली बार है जब फेड के भीतर किसी फैसले को लेकर इतना बड़ा मतभेद  देखा गया है. जेरोम पॉवेल ब्याज दरें न घटाने वालों में शामिल थे, जबकि फिलिप जेफरसन और एना पॉलसन जैसे सदस्यों ने कटौती के पक्ष में वोट दिया.

फेड बोर्ड में गवर्नर के तौर पर बने रहेंगे जेरोम पॉवेल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कई अहम मुद्दों पर बात की. उन्होंने महंगाई को अनियंत्रित बताया और साथ ही डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ (Tariff) का भी जिक्र किया, जिससे सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं. पॉवेल ने स्पष्ट किया कि वे फेड बोर्ड में गवर्नर के तौर पर बने रहेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि मिडिल ईस्ट के हालात ने आर्थिक भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं.

क्या आगे ब्याज दरों में होगी कटौती?

फेड ने साफ कर दिया है कि आगे ब्याज दरें घटेंगी या बढ़ेंगी, यह पूरी तरह से आने वाले डेटा, लेबर मार्केट की स्थिति और महंगाई की उम्मीदों पर निर्भर करेगा. फेड का लक्ष्य महंगाई को 2% के स्तर पर वापस लाना है. 

आपको बता दें कि फेड ने आखिरी बार दिसंबर 2025 में ब्याज दरों में 0.25% की कटौती की थी, लेकिन फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-ईरान युद्ध ने पूरी रणनीति बदल दी है. एनालिस्ट्स का मानना है कि बढ़ते फ्यूल कॉस्ट की वजह से अगले कुछ महीनों तक महंगाई ऊंची बनी रह सकती है.

फेड के फैसले का भारत पर क्या होगा असर

फेड के इस फैसले का असर भारतीय शेयर बाजार और रुपये की कीमत पर भी पड़ सकता है. अगर अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो विदेशी निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड्स में लगा सकते हैं.

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