- अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को स्थिर रखा और कोई बदलाव नहीं किया है.
- फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने महंगाई के उच्च स्तर के कारण फिलहाल इंतजार की नीति अपनाने की बात कही है.
- भारतीय शेयर बाजार पर इस फेड के निर्णय का असर सीमित रहने की संभावना है और बाजार में हल्की कमजोरी दिख सकती है.
अमेरिका के सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व के फैसले पर पूरी दुनिया के बाजारों की नजर रहती है और इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ. US Fed ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है.यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में राजनीतिक हलचल तेज है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल के बीच खींचतान की खबरें भी सुर्खियों में हैं. अब सवाल यह है कि इस फैसले का असर भारतीय शेयर बाजार पर कैसे दिख सकता है. निवेशक यह जानना चाहते हैं कि क्या बाजार में तेजी आएगी या फिलहाल उतार चढ़ाव बना रहेगा.
US Fed ने क्या फैसला लिया?
अमेरिकी फेड ने ब्याज दरों को 3.5 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में ही रखा है. यह जुलाई 2025 के बाद पहली बार है जब दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया. इससे पहले फेड लगातार तीन बैठकों में ब्याज दरें घटा चुका था. फेड का कहना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अच्छी रफ्तार से बढ़ रही है लेकिन महंगाई अब भी ऊंचे स्तर पर है. इसी वजह से फिलहाल इंतजार करने की नीति अपनाई गई है.
अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर फेड का नजरिया
फेड चेयर जेरोम पॉवेल के मुताबिक, अमेरिका में लोगों का खर्च मजबूत बना हुआ है और कंपनियां निवेश कर रही हैं. हालांकि घरों की खरीद बिक्री से जुड़ा सेक्टर अभी कमजोर है. नौकरियों की संख्या भी ज्यादा तेजी से नहीं बढ़ रही लेकिन बेरोजगारी दर अब स्थिर होती दिख रही है. महंगाई अभी भी चिंता का कारण बनी हुई है.
भारतीय शेयर बाजार पर क्या हो सकता है असर?
भारतीय बाजारों के लिए यह फैसला पहले से ही उम्मीद के मुताबिक था. इसलिए किसी बड़े झटके की संभावना कम मानी जा रही है. सुबह GIFT Nifty हल्की गिरावट के साथ ट्रेड करता दिखा जिससे संकेत मिलता है कि बाजार की शुरुआत सपाट या हल्की कमजोरी के साथ हो सकती है. एशियाई बाजारों में भी दबाव नजर आ रहा है जिससे सेंटीमेंट थोड़ा कमजोर रह सकता है.
आमतौर पर जब अमेरिका में ब्याज दरें कम होती हैं, तो विदेशी निवेशकों (FIIs) के लिए भारत जैसे उभरते बाजारों में पैसा लगाना सस्ता और फायदेमंद हो जाता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय बाजार आज 'फ्लैट' यानी बिना किसी बड़ी बढ़त या गिरावट के खुल सकते हैं.
डॉलर और रुपये पर असर
जब अमेरिका में ब्याज दरें नहीं घटतीं तो डॉलर को कुछ सपोर्ट मिल सकता है. इससे रुपये पर दबाव बना रह सकता है जो पहले ही कमजोर स्तर के आसपास है. विदेशी निवेशक भी ऐसे समय में सतर्क रहते हैं और उभरते बाजारों में पैसा डालने से पहले इंतजार करते हैं.
सोने में तेजी
फेड की आजादी को लेकर अमेरिका में चल रही बहस के बीच सोने में तेजी देखने को मिली है. निवेशकों को डर है कि आगे चलकर नीतियों में दखल बढ़ सकता है. इसी वजह से सोना 5500 डॉलर प्रति औंस के ऊपर चला गया है. आमतौर पर ब्याज दरें स्थिर रहने पर सोने में बड़ी तेजी नहीं आती लेकिन इस बार हालात अलग हैं.
बाजार जानकारों का मानना है कि इस फैसले का भारतीय शेयर बाजार पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. निवेशकों की नजर अब कंपनियों के नतीजों घरेलू निवेश की स्थिति विदेशी निवेशकों की बिकवाली और भारत अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते पर है.
जानकारों का कहना है कि भारतीय मार्केट अब सिर्फ अमेरिका के भरोसे नहीं है. निवेशकों का असली ध्यान अब कंपनियों के तिमाही नतीजों (Corporate Earnings), बाजार में नकदी की स्थिति और भारत-अमेरिका के बीच होने वाली संभावित ट्रेड डील (व्यापार समझौते) पर टिका है.अगर भारत अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर सकारात्मक खबर आती है तो रुपये को सहारा मिल सकता है और बाजार में नई जान आ सकती है.
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