आप जब भी मार्केट में लैपटॉप या स्मार्ट फोन खरीदने जाते हैं, तो सबसे पहले यही चैक करते हैं कि इसमें रैम और स्टोरेज कितनी है. क्योंकि इन्हीं दोनों पर डिवाइस की परफॉर्मेंस निर्भर करती है. आपको हम एक रिपोर्ट के बारे में जानकारी देते हैं, जिसे जान आप हैरान रह जाएंगे. दरअसल टेक मार्केट की रिसर्च करने वाली संस्था ट्रेडफोर्स ने बताया कि स्मार्टफोन और लैपटॉप बनाने वाली कंपनियां अपने आने वाले मॉडल्स में रैम और स्टोरेज को कम कर सकती है. आखिर इसके पीछे वजह क्या है और इसका आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा, इन सभी सवालों के जवाब इस खबर में जानने की कोशिश करते हैं.
क्यों हो रही रैम और स्टोरेज में कटौती?
किसी भी फोन या लैपटॉप बनाने में जो टोटल खर्चा आता है, उसे बिल ऑफ मैटेरियल कॉस्ट कहा जाता है. इसी में एक बड़ा खर्चा रैम और स्टोरेज से जुड़ा होता है. ट्रेंडफोर्स के अनुसार साल 2026 की शुरुआत में ही मेमोरी चिप्स की कीमतें बढ़ गईं. अब जब मेमोरी महंगी हो गई तो कंपनियों के लिए पुराने दाम पर ज्यादा रैम देना मुश्किल ही है. ऐसे में कंपनियों के पास अपने मुनाफे को बनाए रखने और लागत को कम करने के लिए दो ही रास्ते बचे हैं. पहला वो या तो प्रोड़क्ट की कीमतें बढ़ा दें, या फिर दूसरा उनके फीचर्स को कम कर दें.
किन ग्राहकों पर इसका पड़ेगा असर?
इस फैसले का सबसे बड़ा असर बजट और मिड रेंज स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों पर देखने को मिल सकता है. रिपोर्ट के अनुसार एंड्रॉइड मार्केट में अमूमन ज्यादा रैम को एक बड़े सेलिंग फैक्टर के तौर पर देखा जाता है. लेकिन बढ़ती लागत की वजह से अब सस्ते और एंट्री लेवल स्मार्टफोन्स में रैम को अपग्रेड कंपनी रोक सकती हैं. रिपोर्ट में तो ये भी कहा है कि कई बजट फोन्स के शुरुआती वेरिएंट में फिर से 4जीबी रैम का दौर वापस आ सकता है.
ऐपल भी इस समस्या से अछूता नहीं
ट्रेंडफोर्स के अनुसार मेमोरी की बढ़ती कीमतों का असर आईफोन पर भी हो रहा है. साल 2026 की पहली तिमाही में आईफोन को बनाने की लागत बढ़ चुकी है. इसके चलते कंपनी ने अपनी प्राइसिंग स्ट्रैटेजी में बदलाव किया है. ऐसा होता दिख भी रहा है. ऐपल के सीईओ टिम कुक ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि कंपनी अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही है. उन्होंने कहा कि मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसकी वजह से कंपनी पर दबाव बढ़ गया है. ऐसे में कीमतें बढ़ाना लगभग जरूरी हो गया है.
लैपटॉप मार्केट का क्या है हाल?
कंपनियां स्मार्टफोन के जैसे ही लैपटॉप के लिए भी अपनी प्लानिंग बदल रही हैं. लेकिन यहां एक समस्या है. दरअसल प्रोसेसर और ऑपरेटिंग सिस्टम की जरूरतों की वजह से कंपनियां एक लिमिट से कम रैम और स्टोरेज नहीं दे सकते. इसलिए साल 2026 की दूसरी तिमाही यानी अप्रैल-जून से लैपटॉप की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है.
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