- केंद्र सरकार ने बताया कि चीनी की खुदरा कीमतों में नरमी आनी शुरू हो गई है
- सितंबर से मिलों को पखवाड़े के हिसाब से बिक्री कोटा दिया जाएगा ताकि कृत्रिम किल्लत और आपूर्ति में सुधार हो सके
- सरकार ने थोक उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपनी जरूरत से अधिक चीनी का भंडार न रखें और बाजार में संतुलन बनाएं
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि चीनी की खुदरा कीमतों में नरमी आनी शुरू हो गई है और मिल स्तर पर कीमतें पिछले कुछ दिनों में करीब 20 प्रतिशत घट चुकी हैं. इसके साथ ही सरकार ने कहा कि घरेलू बाजार में चीनी की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने और कृत्रिम किल्लत रोकने के लिए सितंबर से मिलों को पखवाड़े के हिसाब से बिक्री कोटा दिया जाएगा. फिलहाल खाद्य मंत्रालय चीनी मिलों को बिक्री के लिए मासिक कोटा आवंटित करता है.
चीनी मिलें कर रही थीं खेल
मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि वह चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर करीबी नजर रख रहा है तथा देश में चीनी की कोई कमी नहीं है. बयान के मुताबिक, चीनी मिलों में मौजूद स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराया गया. इसमें कुछ मिलों के पास मासिक रिटर्न में घोषित मात्रा से अधिक भंडार पाया गया, जबकि कुछ मिलों ने उन्हें आवंटित मासिक कोटे से कम चीनी बेची. कुछ मामलों में महीने की शुरुआत में मिलों द्वारा बेची गई चीनी की आपूर्ति या खरीदारों द्वारा उठान महीने के अंत में किया जा रहा था. इससे बाजार में कृत्रिम किल्लत की स्थिति पैदा हुई.
मंत्रालय ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए सितंबर से पखवाड़े के आधार पर कोटा व्यवस्था लागू की जाएगी. इसके तहत मिलों को पहले सप्ताह में आवंटित मात्रा की कम-से-कम 40 प्रतिशत चीनी बेचनी होगी और शेष मात्रा अगले सप्ताह में बेचनी होगी. इस पहल से मांग और आपूर्ति की स्थिति पर बेहतर नजर रखने, बाजार परिस्थितियों में बदलाव के अनुरूप तेजी से कदम उठाने और कृत्रिम किल्लत रोकने में मदद मिलेगी. जरूरत पड़ने पर बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त भंडार जारी किया जा सकेगा. मंत्रालय ने कहा कि मिलों को बिक्री के सात दिन के भीतर चीनी की मिल से आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. पखवाड़ा-आधारित कोटा और सात दिन के भीतर अनिवार्य आपूर्ति से पूरी आपूर्ति श्रृंखला में सुधार होने की उम्मीद है.
खुदरा कीमतें भी जल्द घटेंगी
सरकार ने थोक उपभोक्ताओं से भी कहा है कि वे अपनी परिचालन जरूरतों से अधिक चीनी का भंडार न रखें.मंत्रालय ने कहा कि घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने हाल में कई कदम उठाए हैं. इनमें 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति और डीलरों एवं पेय पदार्थ विनिर्माताओं जैसे थोक उपभोक्ताओं पर भंडार सीमा लगाना शामिल है. चीनी के निर्यात पर कुछ महीने पहले ही रोक लगाई जा चुकी है. मंत्रालय ने कहा कि इन कदमों के बाद मिल स्तर पर चीनी की कीमतें हाल के दिनों में करीब 20 प्रतिशत घट गई हैं और खुदरा कीमतों में भी नरमी शुरू हो गई है. आपूर्ति श्रृंखला में कीमतों में बदलाव का असर होने के कारण खुदरा कीमतों में भी जल्द गिरावट आने की उम्मीद है.
मंत्रालय ने कहा कि मिल स्तर और खुदरा कीमतों में गिरावट का रुख बताता है कि हाल की तेजी मुख्य रूप से ‘जमाखोरी और सट्टेबाजी' का नतीजा थी. उसने कहा कि देश में चीनी की कोई किल्लत नहीं है और घबराकर खरीदारी करने या जरूरत से ज्यादा भंडार रखने का कोई औचित्य नहीं है.अक्टूबर से शुरू होने वाले नए विपणन सत्र 2026-27 के लिए गन्ने की पेराई 15 अक्टूबर से शुरू होगी. अक्टूबर में 10 लाख टन से अधिक चीनी उत्पादन होने की उम्मीद है. नवंबर में करीब 45 लाख टन उत्पादन का अनुमान है.
यह भी पढ़ें-
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं