मिडिल ईस्ट में 100 दिन से ज्यादा चली अमेरिका-ईरान की जंग अब थम चुकी है. दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर मुहर लग चुकी है. विदेश मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस के लोक सभा सांसद शशि थरूर का मानना है कि देश के लिए जल्द से जल्द तेल, गैस की सप्लाई शुरू होनी चाहिए. दिल्ली में चिंतन रिसर्च फाउंडेशन के एक कार्यक्रम में एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में शशि थरूर ने कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच अभी केवल एक समझौता साइन हुआ है. इस समझौते का प्रारूप अगले 60 दिनों में तय होगा.
'भारत को हुआ बड़ा नुकसान'
चुनौतियों के बारे में जिक्र करते हुए शशि थरूर ने एनडीटीवी से आगे कहा, ""अभी बहुत सारी चुनौतियां हैं. पिछले 100 से ज्यादा दिनों के दौरान भारत ने काफी सहा है. इस युद्ध का भारत पर काफी बुरा असर पड़ा है. अब कोशिश कच्चे तेल, गैस और फर्टिलाइजर्स की सप्लाई जल्दी बहाल करने पर होनी चाहिए".
'विझिंजम पोर्ट को ग्लोबल शिपिंग हब बनाना जरूरी'
शशि थरूर तिरुवनंतपुरम का लोक सभा में प्रतिनिधित्व करते हैं. ये पूछे जाने पर कि क्या विझिंजम पोर्ट पर शिपिंग ट्रैफिक बढ़ना भारत के लिए इस संकट के दौरान एक अच्छा अवसर है, शशि थरूर ने एनडीटीवी से कहा, "100 से ज्यादा जहाज ने एक समय पोर्ट पर रुकने की इजाजत मांगी थी, लेकिन जगह कम होने की वजह से 60 कार्गो जहाजों को मना करना पड़ा. विझिंजम पोर्ट को एक ग्लोबल शिपिंग हब के तौर पर विकसित करना बहुत जरूरी है".
कार्यक्रम में चिंतन रिसर्च फाउंडेशन के काम की तारीफ करते हुए शशि थरूर ने कहा कि, "नई सोच के बारे में 'चिंतन' के साथ-साथ उसे एक्शनेबल बनाना भी बेहद जरूरी है. 2047 तक 'विकसित भारत' एक ऐसा विचार है, जिसके लिए प्रयास करना सार्थक है, भारत को विकसित देश बनाने के लिए रिसर्च और नई सोच को विकसित करने में चिंतन रिसर्च फाउंडेशन जैसे रिसर्च थिंकटैंक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी."
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