ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के शुरू होते ही सबसे पहले भारतीय मुक्केबाजों ने शुभ संकेत दे दिये. ओपनिंग सेरेमनी से पहले 23 जुलाई को जब बॉक्सिंग के ड्रॉ निकाले गए तो भारत की ओलिंपिक पदक विजेता असम की लवलीना बोर्गोहैन की डायरेक्ट एंट्री सेमीफाइनल में हुई और उन्होंने टूर्नामेंट से पहले ही बॉक्सिंग का और अपना पहला कॉमनवेल्थ पदक पदक पक्का कर लिया. ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स की मशाल वाहक (बेटन बियरर) और ओलिंपिक पदक विजेता लवलीना बोर्गोहैन ने बताया कि कॉमनवेल्थ गेम्स का मेडल क्यों उनके लिए बेहद ख़ास है.
गेम्स से पहले ही निकला लकी ड्रॉ!
टोक्यो ओलिंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप्स की पदक विजेता 28 साल की असम की लवलीना बोर्गोहैन ने बॉक्सिंग के लकी ड्रॉ के बाद कहा, 'यह खबर मेरे लिए भी चौंकाने वाली थी. मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे सीधे सेमीफाइनल में जगह मिल जाएगी. पिछले दो कॉमनवेल्थ गेम्स में मुझे चार-पांच मुकाबले खेलने पड़े थे और तब भी मेडल नहीं मिला था. ये शायद यह मेरी वर्षों की मेहनत का फल है.'
ओलिंपिक पदक विजेता स्टार बॉक्सर विजेन्दर सिंह ने NDTV से एक्सक्लूसिव बात करते हुए कहा, 'भारतीय महिलाएं वाकई अच्छा कर रही हैं. उनका डेडिकेशन अलग लेवल का है. 10 में से 6 लड़कियां मेडल की दावेदारी पेश कर रही हैं. उन्हें हाल में सुविधाएं भी मिली हैं और उन्होंने उसका अच्छा इस्तेमाल भी किया है.'
विजेन्दर को उम्मीद है कि भारत को इसबार पहले से गोल्ड भी ज़्यादा मिलेंगे. उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाओं में से 2-3 गोल्ड जरूर मिलने चाहिए.
ट्रायल्स का असर- कैसे बेहतर हुई बॉक्सिंग
भारत ने बॉक्सिंग में पदकों में गोल्ड का खाता 2002 के मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ गेम्स में पश्चिम बंगाल के टैलेंटेड बॉक्सर अली कमर के जरिये जीता.
NDTV से एक्सक्लूसिव बात करते हुए पूर्व कॉमनवेल्थ चैंपियन अली कमर कहते हैं, '2014 में महिला बॉक्सिंग को कॉमनवेल्थ में पहली बार लाया गया तब से ही भारतीय महिला बॉक्सर्स लगातार अच्छा कर रही हैं. टोक्यो ओलिंपिक्स जब मैं कोच था, तब भी 69 किग्रा लवलीना ने जीता था और हरियाणा की पूजा रानी भी 75 किग्रा भी क्वार्टर फाइनल में पहुंची थीं. लड़कियों ने इस बार CWG में भी कमाल का प्रदर्शन किया है.'
अली कमर बॉक्सर्स की तारीफ करते हुए कहते हैं कि इस बार एक बहुत बड़ा फर्क ये है कि बॉक्सर्स का चयन ट्रायल्स के जरिये हुआ है रैंकिंग से नहीं. वो कहते हैं, 'हर बड़े कंपीटीशन के पहले ट्रायल्स होने चाहिए. ट्रायल्स होता है तो दूसरे-तीसरे नंबर के बॉक्सर्स भी दम झोंक देते हैं. ऐसे में बेस्ट टीम का चयन होता है. ओलिंपिक्स और हर मेजर कंपीटिशन से पहले सेलेक्शन ट्रायल्स के ज़रिये ही होना चाहिए.'
फेयर सेलेक्शन, नेशनल्स का असर: एशियाड-ओलिंपिक में भी उम्मीदें
ग्लासगो से NDTV पर एक्सक्लूसिव बात करते हुए भारतीय बॉक्सिंग संघ के जनरल सेक्रेटरी प्रमोद कुमार चौधरी कहते हैं, 'हमारे 10 में से 10 खिलाड़ी फ़ाइनल में पहुंचेंगे. हमलोगों ने लगातार नेशनल्स करवाए हैं. कोशिश किया है कि एकदम फ़ेयर सेलेक्शन हो. पहले एसेसमेंट कर लिया जाता था. हमने सिस्टम बदल दिया है. हमने ट्रायल्स करवाए जिसमें दूध का दूध और पानी का पानी हो गया.'
भारतीय बॉक्सिंग के जनरल सेक्रेटरी प्रमोद चौधरी कहते हैं, '10 में से हमें कम से कम 5-6 गोल्ड मिलने चाहिए. एशियन गेम्स में जैस्मिन और अरुंधती का वजन वर्ग नहीं है. जापान के एशियाड में सिर्फ़ 6 लड़के और 5 लड़कियों को एंट्री मिलगी. लेकिन जैस्मिन और अरुंधती ओलिंपिक्स के लिए तैयारी करेंगी. हमें ओलिंपिक्स में भी इसबार एक से ज़्यादा मेडल्स की उम्मीद रहेगी.'
पूर्व कॉमनवेल्थ चैंपियन अली क़मर कहते हैं, 'कॉमनवेल्थ में भी भारत के अलावा इंग्लैंड, स्क़टलैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलियाल न्यूज़ीलैंड से अच्छे खिलाड़ी आते हैं. इसलिए मुक़ाबला आसान नहीं है. पुरुषों में भी केन्या और नाइजीरिया के अच्छे खिलाड़ियों से भारतीय पुरुष मुक्केबाज़ों की टक्कर होगी.'
भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला गोल्ड जीतने वाले अली क़मर कहते हैं, 'एशियन गेम्स और ओलिंपिक्स में यहां से थोड़ा फ़र्क होगा. एशियाड में चीन, उज़्बेकिस्तान, चाइनीज़ ताइपेई और कज़ाकिस्तान के बॉक्सर्स भी आएंगे और वहां मुकाबला टफ़ होगा. ओलिंपिक्स तो और भी चुनौतीपूर्ण होगा. लेकिन कॉमनवेल्थ में जीत से बॉक्सर्स का कॉन्फ़िडेंस बढ़ेगा. अगर यहां से ओलिंपिक्स तक भटके नहीं, लगकर मेहनत करते रहे तो वहां भी नतीजा अच्छा दिखेगा.'
कैसे चढ़ा भारतीय बॉक्सिंग का ग्राफ
भारतीय बॉक्सर्स ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ में दम का दम दिखाया है और 10 मेडल पक्के कर इतिहास कायम कर दिया है. अगर इन 10 बॉक्सर्स में से 4 भी गोल्ड जीत पाते हैं तो ये सोने पे सुहागा साबित होगा.
भारतीय बॉक्सर्स ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 1934 से लेकर अबतक 92 साल में 11 गोल्ड समेत कुल 44 पदक जीते हैं. 1998 के क्वालालंपुर में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के जितेन्दर सिंह ने पहली बार सिल्वर मेडल जीतकर भारत का खाता खोला- (वो बाद में ओलिंपिक्स में भी पदक के क़रीब पहुंचे और क्वार्टरफ़ाइनल तक पहुंच सके.) अली कमर ने 2002 मैनचेस्टर में भारत को इन खेलों में पहला गोल्ड दिलाया.
बीस साल पहले 2006 के मेलबर्न में और 12 साल पहले ग्लासगो में भारतीय बॉक्सिंग टीम के नाम 0-शून्य गोल्ड मेडल रहे.लेकिन 2022 के बर्मिंघम CWG में भारतीय बॉक्सर्स ने 3 गोल्ड समेत 7 मेडल जीते. इस बार भारतीय बॉक्सर्स ने पोडियम की फ़िज़ा बदल दी है.
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाज़
साल-GOLD -SILVER- BRONZE- TOTAL
1998- 0- 1- 0- 1
2002- 1- 1- 1- 3
2006- 1- 2- 2- 5
2010- 3- 0- 4- 7
2014- 0- 3- 2- 5
2018- 3- 3- 3- 9
2022- 3- 1- 3- 7
2026- *- *- *-10*
CWG 2026: सेमीफाइनल में भारतीय बॉक्सर्स
पुरुष बॉक्सर्स-4
- जादुमणि सिंह (55 kg)
- सचिन सिवाच (60 kg)
- अंकुश पंघाल (80 kg)
- नरेन्दर बेरवाल (+90 kg)
महिला बॉक्सर्स-6
- साक्षी चौधरी (51 kg)
- प्रीति पवार (54 kg)
- जैस्मिन लैमेबोरिया (57 kg)
- प्रिया घंघस (60 kg)
- अरुंधती चौधरी (70 kg)
- लवलीना बोर्गोहैन (75 kg)
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