Share Market Closing: भारतीय शेयर बाजार के लिए होली का दिन कुछ खास खबर लेकर नहीं आया. चौतरफा बिकवाली की वजह से सेंसेक्स और निफ्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गए. सेंसेक्स 1,127 अंक की भारी गिरावट के साथ 79,116 के स्तर पर आ गया, वहीं निफ्टी भी 400 से ज्यादा अंक फिसलकर 24,480 पर बंद हुआ. सिर्फ कुछ घंटों के अंदर ही निवेशकों के 12 लाख करोड़ रुपए डूब गए.
टॉप गेनर्स
- भारती एयरटेल (1.88%)
- इंफोसिस (1.33%)
- टेक महिंद्रा (0.15%)
टॉप लूजर्स
- टाटा स्टील (-7.08%)
- लार्सन एंड टुब्रो (-4.54%)
- बजाज फाइनेंस (3.40%)
- मारुति सुजुकी (-1.54%)
बाजार में गिरावट की 5 बड़ी वजह
- मिडल ईस्ट में महायुद्ध की आहट
इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव बाजार की गिरावट की सबसे बड़ी वजह है. ईरान के अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने और जवाबी हमलों ने निवेशकों के मन में वैश्विक मंदी और सप्लाई चेन बिगड़ने का डर पैदा कर दिया है.

Share Market Closing
- कच्चे तेल की आग
युद्ध के संकट ने क्रूड ऑयल की कीमतों को 4 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है. ब्रेंट क्रूड $83.97 के पार निकल गया है, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है.
- रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 92.41 के ऑल-टाइम लो लेवल पर पहुंच गया है. कमजोर रुपए ने विदेशी निवेशकों के भरोसे को डिगा दिया है.
- FII की भारी बिकवाली
विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. सोमवार को ही FII ने ₹3,295.64 करोड़ की नेट बिकवाली की, जिसका असर आज बाजार पर साफ दिखा.
- India VIX में उछाल
बाजार में डर को मापने वाला इंडेक्स इंडिया विक्स (India VIX) 21% उछलकर 21 के स्तर पर पहुंच गया है. VIX में इतनी बड़ी तेजी आने वाले दिनों में और अधिक उतार-चढ़ाव का संकेत दे रही है.
भारतीय गैस कंपनियों के गिरे शेयर
कतर के एलएनजी उत्पादन रोकने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही ठप होने से भारत के सामने ऊर्जा संकट खड़ा हो गया, जिसके बाद बुधवार को गैस कंपनियों के शेयर प्रेशर में दिखाई दिए-
- पेट्रोनेट एलएनजी (-8.83%)
- महानगर गैस (एमजीएल) (-8.18%)
- गेल इंडिया (-5.80%)
- इंद्रप्रस्थ गैस (आईजीएल) (-5.46%)
- गुजरात गैस (-2.69%)
निवेशकों को भारी चपत
BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप, जो सोमवार को 456 लाख करोड़ रुपए था, गिरकर 445 लाख करोड़ रुपए पर आ गया. यानी देखते ही देखते निवेशकों की मेहनत की कमाई के 12 लाख करोड़ रुपए डूब गए. हालांकि घरेलू निवेशकों ने 8,593.87 करोड़ रुपये का निवेश कर बाजार को संभालने की कोशिश की, लेकिन वैश्विक दबाव के आगे उनकी नहीं चली.
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