हर साल मार्च का महीना आते ही नौकरीपेशा लोगों के बीच इस बात की चर्चा शुरू हो जाती है कि इस साल उनकी सैलरी में कितना इंक्रिमेंट होने की उम्मीद है. टेक्नोलॉजी से लेकर फाइनेंस और ई-कॉमर्स तक, अलग-अलग सेक्टर में जॉब करने वाले कर्मचारी उम्मीद करते हैं कि उनकी सैलरी में इस साल अच्छा इंक्रिमेंट होगा. अगर आप भी उनमें से एक हैं, तो ये खबर आप ही के लिए है. एक रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि कॉरपोरेट सेक्टर्स में इस साल औसतन 9.1% इंक्रिमेंट होने की उम्मीद है. ऐसा हुआ तो औसतन 50,000 रुपये/महीने की सैलरी वाले कर्मचारियों को हर महीने 4,500 रुपये का और वार्षिक 54,000 रुपये से ज्यादा का लाभ हो सकता है.
किस सेक्टर में कितना इंक्रिमेंट होने की उम्मीद?
इस साल GCC यानी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स में सबसे ज्यादा इंक्रिमेंट होने की उम्मीद है. वहीं डिजिटल और टेक्नोलॉजी, वित्तीय सेवा, फार्मा जैसे सेक्टर्स में करीब 10% इंक्रिमेंट होने की उम्मीद है. EY इंडिया की 'फ्यूचर ऑफ पे' रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) वेतन बढ़ोतरी में अग्रणी भूमिका निभाएंगे.
- वैश्विक मांग मजबूत रहने के कारण GCC में औसतन 10.4% तक वेतन वृद्धि हो सकती है.
- वित्तीय सेवा क्षेत्र में करीब 10% वेतन वृद्धि की संभावना है.
- ई-कॉमर्स क्षेत्र में 9.9% सैलरी इंक्रिमेंट होने की संभावना है.
- लाइफ साइंसेज व फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में 9.7% तक सैलरी बढ़ने का अनुमान है.
AI, जेनरेटिव AI, मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों को 30 से 40% तक अधिक वेतन मिल सकता है.
इसके अलावा, वैरिएबल पे (परिवर्तनीय वेतन) का महत्व भी बढ़ रहा है. 2025 में फिक्स्ड सैलरी के मुकाबले औसतन वैरिएबल पे का हिस्सा बढ़कर 16.1% हो गया, जो एक साल पहले 14.8% था.
नौकरी छोड़ने वाले लोग कम हुए
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि नौकरी छोड़ने (एट्रिशन) की दर में धीरे-धीरे कमी आ रही है. 2025 में कुल एट्रिशन दर घटकर 16.4% रह गई, जो 2024 में 17.5% थी. इससे संकेत मिलता है कि नौकरी बाजार अब पहले से ज्यादा स्थिर हो रहा है.
हालांकि, 80% से अधिक कर्मचारी अपनी इच्छा से नौकरी छोड़ रहे हैं. इसका मतलब है कि लोग छंटनी की वजह से नहीं, बल्कि बेहतर अवसरों की तलाश में नौकरी बदल रहे हैं.
वित्तीय सेवा क्षेत्र में सबसे अधिक 24% एट्रिशन दर्ज किया गया. वहीं, प्रोफेशनल सर्विसेज और हाई-टेक व आईटी क्षेत्रों में भी नौकरी छोड़ने की दर अपेक्षाकृत अधिक रही. इसके मुकाबले जीसीसी में एट्रिशन दर अपेक्षाकृत कम, लगभग 14.1% दर्ज की गई.
स्किल के आधार पर हो रहा है इंक्रिमेंट
ईवाई इंडिया में टोटल रिवार्ड्स, HR टेक्नोलॉजी और लर्निंग के पार्टनर और लीडर अभिषेक सेन ने कहा कि कंपनियां अब प्रतिभा में निवेश के तरीके पर दोबारा विचार कर रही हैं. उन्होंने कहा, 'वेतन का भविष्य केवल सालाना बढ़ोतरी के आकार पर निर्भर नहीं है, बल्कि इस पर भी है कि किन कौशलों को पुरस्कृत किया जाए, प्रतिस्पर्धा और दीर्घकालिक स्थिरता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए.'
रिपोर्ट के अनुसार, अब कौशल-आधारित वेतन प्रणाली की ओर बड़ा बदलाव देखा जा रहा है. सर्वे में शामिल लगभग आधी कंपनियां पारंपरिक पद-आधारित वेतन ढांचे से हटकर कौशल-आधारित ढांचे को अपना रही हैं.
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