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Dollar vs Rupee : डॉलर के सामने बेदम हुआ रुपया, आज 40 पैसे टूटकर पहली बार ₹96.93 के ऑल-टाइम लो पर पहुंचा

Rupee hits all-time low : अमेरिका-ईरान तनाव और महंगे क्रूड ऑयल के चलते बुधवार, 20 मई को रुपया 40 पैसे टूटकर ₹96.93 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर जा गिरा. जानिए क्यों आ रही है यह बड़ी गिरावट और आगे क्या होगा?

Dollar vs Rupee : डॉलर के सामने बेदम हुआ रुपया, आज 40 पैसे टूटकर पहली बार ₹96.93 के ऑल-टाइम लो पर पहुंचा
USD vs INR: रुपये की कमजोरी का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ता है.

Rupee vs Dollar: भारतीय रुपये पर दबाव लगातार बढ़ता दिख रहा है. बुधवार, 20 मई  के शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. इसके पीछे ग्लोबल तनाव, महंगे कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की निकासी जैसे कई बड़े कारण हैं. अब सवाल यह है कि कमजोर रुपया आम लोगों, बाजार और अर्थव्यवस्था पर कितना असर डालेगा.

 40 पैसे टूटकर रिकॉर्ड लो पर पहुंचा रुपया

 शुरुआती कारोबार में रुपया करीब 40 पैसे टूटकर 96.93 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया. यह अब तक का नया रिकॉर्ड लो है. पिछले सत्र में भी रुपया अपने पुराने ऑल टाइम लो 96.61 के आसपास था, लेकिन अब दबाव और बढ़ गया है.

क्यों टूटा भारतीय रुपया?

रुपये की कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में जारी तनाव है. इस तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी आई हैं, जिससे दुनिया भर में महंगाई की चिंता बढ़ी है. भारत जैसे तेल आयातक देश पर इसका सीधा असर पड़ता है क्योंकि महंगा तेल डॉलर की मांग बढ़ाता है और रुपये पर दबाव बनाता है.

कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई चिंता

ब्रेंट क्रूड की कीमतें फरवरी के आखिर से अब तक 50% से ज्यादा चढ़ चुकी हैं. ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम तेल सप्लाई रूट पर तनाव ने ग्लोबल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ाई है. इससे भारत का इंपोर्ट बिल और चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ने का खतरा गहरा सकता है.

विदेशी निवेशकों की निकासी भी बड़ा कारण

रुपये पर दबाव सिर्फ तेल की वजह से नहीं है. फरवरी के आखिर से अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार से 22 अरब डॉलर से ज्यादा की निकासी की है. कमजोर कैपिटल इन्फ्लो और ऊंचे बॉन्ड यील्ड ने भारतीय करेंसी को और कमजोर किया है.

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

कमजोर रुपया सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स, आयातित सामान, विदेश यात्रा और शिक्षा की लागत बढ़ा सकता है. अगर डॉलर मजबूत बना रहा और तेल महंगा रहा, तो महंगाई पर भी असर दिख सकता है.

अब बाजार की नजर अमेरिका-ईरान हालात, कच्चे तेल की चाल, विदेशी निवेशकों के रुख और RBI के फैसले पर रहेगी. अगर बाहरी दबाव कम नहीं हुआ, तो रुपये में और कमजोरी देखने को मिल सकती है.

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