Investment Strategy in Falling Rupee: भारतीय करेंसी रुपये में लगातार गिरावट जारी है. वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती और बढ़ती अनिश्चितताओं के चलते रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले 96.14 के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. इस कमजोरी ने जहां आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं शेयर बाजार के निवेशकों के लिए ये स्थिति एक साथ मौका और रिस्क दोनों लेकर आई है.
दरअसल, जब भी रुपया कमजोर होता है तो इसका सीधा असर कंपनियों की बैलेंस शीट पर पड़ता है, जिससे उनके मुनाफे और लागत दोनों कम होते हैं. ऐसे माहौल में निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि वो अपनी निवेश प्लानिंग में क्या बदलाव करें. इस बीच INVAsset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दासानी ने एनडीटीवी प्रॉफिट से इस संकट के दौर में निवेश को लेकर प्लानिंग के बारे में चर्चा की है.
आईटी और फार्मा सेक्टर में लगाएं दांव
हर्षल दासानी के अनुसार, जब रुपया कमजोर होता है तो उन कंपनियों को फायदा होता है जो विदेशों से ज्यादा कमाई करती हैं. आईटी कंपनियां अपनी सर्विस अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में देती हैं और उन्हें पेमेंट डॉलर में मिलता है. जब रुपया गिरता है, तो वही डॉलर भारत में ज्यादा रुपये के बराबर हो जाता है. इससे कंपनियों की कमाई और मुनाफा बढ़ता है. इसके अलावा फार्मा कंपनियां भी अपनी दवाइयां विदेशों में बेचती हैं और पैसा डॉलर में कमाती हैं. इसलिए रुपये के कमजोर होने पर उन्हें भी ज्यादा फायदा होता है, क्योंकि उनकी कमाई रुपये में बढ़ जाती है.
किन सेक्टर्स पर दबाव बढ़ेगा?
हर चीज के दो पहलू होते हैं. अगर रुपये के गिरने से कुछ कंपनियों को फायदा होता है, तो कुछ को नुकसान भी होता है. खासकर उन बिजनेस को जो विदेश से सामान खरीदते हैं. जो कंपनियां कच्चे तेल या पेट्रोल-डीजल पर ज्यादा निर्भर हैं, उनके लिए खर्च बढ़ जाएगा. क्योंकि तेल विदेश से डॉलर में आता है और जब रुपया कमजोर होता है तो वही तेल ज्यादा महंगा पड़ता है. इससे ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ता है और कंपनियों का मुनाफा घट सकता है. इसके अलावा जो कंपनियां अपना कच्चा माल बाहर से मंगाती हैं या जिनका ट्रांसपोर्ट और डिलीवरी खर्च ज्यादा है, उनकी लागत बढ़ जाती है. लागत बढ़ने से उनका मुनाफा कम हो सकता है या उन्हें चीजें महंगी बेचनी पड़ सकती हैं.
अब क्या हो आपकी निवेश प्लानिंग?
हर्षल दासानी ने बताया कि सिर्फ इसलिए कि रुपया गिर रहा है, हर आईटी या फार्मा स्टॉक में पैसा ना लगाएं. उन्हीं कंपनियों को चुनें जिनका मैनेजमेंट मजबूत है और जिनके पास आगे के अच्छे ऑर्डर हैं. जिन कंपनियों ने विदेशी बाजारों से डॉलर में कर्ज लिया हुआ है, रुपये की गिरावट उनके लिए ब्याज का बोझ बढ़ा देगी. ऐसी कंपनियों से फिलहाल दूरी बनाना ही समझदारी है. इसके साथ करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव हो सकता है. इसलिए, निवेश करते समय कम से कम 2 से 3 साल की प्लानिंग रखें, जिससे रुपये की रिकवरी का फायदा मिल सके.
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