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'द सिल्वर सर्ज': आश्रित नहीं, आत्‍मनिर्भरता! कैसे गुरुग्राम के रियल एस्टेट की तस्वीर बदल रहे बुजुर्ग

देश में सिल्वर जनरेशन की आबादी 2050 तक 30 करोड़ रुपये का अनुमान है, जिससे सीनियर लिविंग रियल एस्टेट की डिमांड लगातार बढ़ रही है. दिल्ली एनसीआर का गुरुग्राम इस बदलाव का हब बन रहा है.

'द सिल्वर सर्ज': आश्रित नहीं, आत्‍मनिर्भरता! कैसे गुरुग्राम के रियल एस्टेट की तस्वीर बदल रहे बुजुर्ग
दिल्ली-एनसीआर के गुरुग्राम रियल एस्टेट में सीनियर सिटीजन आत्मनिर्भरता के साथ लग्जरी लाइफस्टाइल चुन रहे हैं.
CANVA

देश की डेमोग्राफी यानी में दबे पांव एक खामोश-सा लेकिन बेहद गहरा बदलाव आ रहा है. देश की आबादी तेजी से उम्रदराज़ हो रही है. ग्लोबल रियल एस्टेट कंसलटेंट जेएलएल (JLL) की एक हालिया रिपोर्ट इस ओर इशारा करती है कि भारत की 'सिल्वर जनरेशन' (वरिष्ठ नागरिक) साल 2050 तक तीन गुना बढ़कर करीब 30 करोड़ के आंकड़े को छू लेगी. यह कोई मामूली बदलाव नहीं है; यह एक ऐसा ट्रेंड है जो सीधे तौर पर हमारे रहने के तौर-तरीकों और देश के हाउसिंग मार्केट की दिशा बदल रहा है.

जो क्षेत्र पहले एक सीमित और खास वर्ग तक ही सिमटा माना जाता था, वह अब एक सुव्यवस्थित और कॉर्पोरेट सेक्टर का रूप ले चुका है. इन परियोजनाओं में उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं, 24x7 सुरक्षा, व्यक्तिगत देखभाल, सामुदायिक गतिविधियां और एक तनावमुक्त जीवनशैली शामिल है, जो वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित, सम्मानजनक और संतुलित जीवन देती है.

पारंपरिक सोच में बड़ा बदलाव

आज के रिटायर्ड और सेमी-रिटायर्ड लोग सिर्फ 'ओल्ड एज होम' जैसी देखभाल की सुविधा नहीं चाहते. वे ऐसे आधुनिक और उम्र के अनुकूल बने समुदायों (Age-friendly communities) की तलाश में हैं जहाँ उन्हें स्वतंत्रता के साथ-साथ स्वास्थ्य सुरक्षा भी मिले. वे जीवन के इस पड़ाव को पूरे आत्मसम्मान, सक्रियता और आत्मनिर्भरता के साथ जीना चाहते हैं.

पायनियर अर्बन लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऋषभ पेरिवाल के अनुसार, 'सीनियर लिविंग रियल एस्टेट अब एक छोटे और सीमित वर्ग से विकसित होकर एक व्यवस्थित और मजबूत निवेश क्षेत्र बन गया है. आज इसका उद्देश्य केवल बुजुर्गों की देखभाल करना नहीं है, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना है जो सम्मान, स्वतंत्रता और लंबी उम्र को बढ़ावा दे. गुरुग्राम जैसे शहरों में, केंद्रीय स्थान पर स्थित प्रीमियम समुदायों जिनमें एकीकृत चिकित्सा सुविधाएं हैं, वहां इसकी मांग बहुत अधिक है. जागरूकता बढ़ने के साथ, सीनियर लिविंग अब आवासीय रियल एस्टेट का एक स्थायी और तेजी से बढ़ता हुआ क्षेत्र बनता जा रहा है.'

पेरिवाल के मुताबिक, आमतौर पर 55 वर्ष से अधिक आयु के लोग अब उन आवासीय परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं जहां, 

  • चिकित्सा सेवाएं चौबीसों घंटे उपलब्ध हों.
  • घरों का आर्किटेक्चर सरल, सुरक्षित और बाधारहित हो.
  • ऐसा सामाजिक परिवेश हो जहाँ वे समान विचारधारा वाले लोगों से जुड़ सकें.

आज सीनियर लिविंग का मतलब सिर्फ किसी शांत जगह पर समय काटना नहीं है, बल्कि यह सुविधा, सुरक्षा और सामाजिक सहभागिता का एक बेहतरीन संतुलन है.

गुरुग्राम: उत्तर भारत का नया 'सीनियर हाउसिंग' हब

पुणे और कोयंबटूर जैसे दक्षिण भारतीय शहरों ने देश में सीनियर हाउसिंग की शुरुआत की थी, लेकिन अब दिल्ली-एनसीआर का गुरुग्राम तेजी से उत्तर भारत के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है. यहाँ का विश्वस्तरीय हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर, शानदार कनेक्टिविटी और प्रीमियम सामाजिक परिवेश इसे बुजुर्गों के लिए बेहद आकर्षक बनाते हैं.

विशेष रूप से सेंट्रल गुरुग्राम को इस लिहाज से सबसे उपयुक्त माना जा रहा है. मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल, डायग्नोस्टिक सेंटर, फार्मेसी और रोजमर्रा की जरूरी सुविधाएं नजदीक होना बुजुर्गों के लिए केवल सहूलियत नहीं, बल्कि जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है.

एक महत्वपूर्ण चुनौती ये है क‍ि इस समय बाजार में कई प्रोजेक्ट्स घोषित तो हो रहे हैं, लेकिन 'समय पर पजेशन' नहीं मिल रहा है. कई प्रोजेक्ट्स को पूरा होने में लंबा वक्त लग जाता है. इसलिए, जो परिवार रिटायरमेंट के ठीक बाद शिफ्ट होने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए 'रेडी-टू-मूव-इन' या 'जल्द तैयार होने वाले' प्रोजेक्ट्स सबसे पसंदीदा विकल्प बनकर उभरे हैं.

लग्‍जरी और मेडिकल केयर का आधुनिक मिश्रण

जे एस्टेट्स के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल गोदारा के अनुसार, 'भारत का सीनियर लिविंग सेगमेंट चरणबद्ध तरीके से विकसित हो रहा है. यह विकास बदलते पारिवारिक ढांचे, लंबी जीवन प्रत्याशा और वरिष्ठ नागरिकों में स्वतंत्र लेकिन सुरक्षित रहने की बढ़ती आकांक्षाओं के कारण हो रहा है. विशेष रूप से गुरुग्राम इस क्षेत्र में सबसे आगे है क्योंकि यहाँ संपन्नता, मजबूत हेल्‍थ इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर और लाइफस्‍टाइल-आधारित आवासीय इकोसिस्टम का बेहतरीन मेल देखने को मिलता है.' 

उनके मुताबिक, सीनियर लिविंग का नया दौर अब किसी अस्पताल या क्लिनिक जैसे उबाऊ मॉडल तक सीमित नहीं है. आज के आधुनिक कम्युनिटीज में हॉस्पिटैलिटी और मेडिकल साइंस का एक बेहतरीन फ्यूजन देखने को मिलता है:

•    24x7 इमरजेंसी मेडिकल सपोर्ट: किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए चौबीसों घंटे कुशल मेडिकल स्टाफ और एम्बुलेंस की तैनाती.
•    दिग्गज अस्पतालों के साथ रणनीतिक साझेदारी: मेदांता, मैक्स या फोर्टिस जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों के साथ टाइ-अप, ताकि निवासियों को प्राथमिकता के आधार पर त्वरित इलाज मिल सके.
•    सुरक्षित आर्किटेक्चर: फिसलने से बचाने वाली एंटी-स्लिप फ्लोरिंग, व्हीलचेयर-फ्रेंडली रैंप और बढ़ती उम्र की शारीरिक सीमाओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए एर्गोनोमिक लेआउट.
•    स्मार्ट रिस्पॉन्स सिस्टम: घरों के भीतर पैनिक बटन और मोशन सेंसर, जो किसी भी अप्रिय घटना या संकट के समय तुरंत ऑन-साइट सुरक्षा टीम को अलर्ट कर देते हैं.
•    होलिस्टिक वेलनेस और रिक्रिएशन: योग केंद्र, मेडिटेशन रूम और विशेष रूप से डिजाइन किए गए सोशल इवेंट्स ताकि निवासी मानसिक और शारीरिक रूप से हमेशा एक्टिव रहें.

ये निरंतर चिकित्सा निगरानी न केवल बुजुर्गों को मानसिक शांति देती है, बल्कि विदेश में रहने वाले एनआरआई (NRI) और एचएनआई (HNI) परिवारों के लिए भी राहत का सबसे बड़ा कारण बनती है, जो भारत में अपने माता-पिता के लिए एक सुरक्षित और गरिमापूर्ण आशियाना तलाश रहे हैं.
रियल एस्टेट निवेश का नया हॉटस्पॉट

बाजार में नए अवसर पैदा कर रहा सिल्वर सर्ज

सीनियर लिविंग पूरी तरह से वास्तविक मांग (End-user driven) पर आधारित सेक्टर है. रियल एस्टेट की अन्य सट्टा या अटकलों पर आधारित श्रेणियों के विपरीत, इसका विकास एक अनिवार्य सामाजिक जरूरत से जुड़ा है. शहरी परिवारों में औसत जीवन प्रत्याशा (Life expectancy) बढ़ने और मजबूत वित्तीय योजना के कारण अब लोग लंबी अवधि के रहने की व्यवस्था पहले से तय कर रहे हैं.

जागरूकता बढ़ने और पुरानी सामाजिक वर्जनाओं के टूटने के कारण अब समृद्ध शहरी परिवार कम्युनिटी-बेस्ड लिविंग को सहर्ष अपना रहे हैं. डेवलपर्स भी इस बदलते ट्रेंड को भांपते हुए वेलनेस सुविधाओं, टेक-इनेबल्ड मॉनिटरिंग और हाई-क्वालिटी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ नए कस्टमाइज्ड विकल्प पेश कर रहे हैं.

अनिल गोदारा कहते हैं, 'जैसे-जैसे मांग तेजी से बढ़ रही है और सप्‍लाई की कमी है, ये बाजार में एक महत्वपूर्ण अवसर पैदा करता है. आज सीनियर लिविंग केवल उम्र के हिसाब से आवास नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्रता, गरिमा, वेलनेस और समुदाय के अनुभव से जुड़ा है. हमारा मानना है कि सोच-समझकर नियोजित किए गए 'सीनियर-फोकस्ड' प्रोजेक्ट्स न केवल निवासियों के लिए दीर्घकालिक मूल्य प्रदान कर सकते हैं, बल्कि भारत के शहरी आवास परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण अंतराल को भी पूरा कर सकते हैं.'

ये 'सिल्वर सर्ज' कोई अस्थायी लहर नहीं है, बल्कि यह भारत के बदलते सामाजिक और डेमोग्राफिक ढांचे की एक स्थाई तस्वीर है. आने वाले समय में इस सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन मुख्य रूप से उनके प्राइम लोकेशन, हेल्थकेयर इंटीग्रेशन की गुणवत्ता, कंस्ट्रक्शन क्वालिटी और ऑपरेशनल मैनेजमेंट के आधार पर किया जाएगा.

गुरुग्राम में सीनियर लिविंग का यह तेजी से होता विकास इस बात का प्रमाण है कि भारत में अब उम्र बढ़ने को 'एकांतवास' या 'आश्रित होने' के रूप में नहीं, बल्कि जीवन के एक ऐसे सुनहरे अध्याय के रूप में देखा जा रहा है जो पूर्ण आराम, सुरक्षा और एक सक्रिय सामाजिक जीवन का हकदार है.

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