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RBI MPC Meeting 2026: क्या इस बार फिर घटेगी आपके लोन की EMI? जानें ब्याज दरों में कटौती को लेकर एक्सपर्ट्स की राय

RBI MPC Meeting 2026: डीबीएस बैंक की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सीनियर इकोनॉमिस्ट राधिका राव के अनुसार, सरकार राजकोषीय घाटा कम करने पर ध्यान दे रही है, इसलिए मौद्रिक नीति में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद कम है.

RBI MPC Meeting 2026: क्या इस बार फिर घटेगी आपके लोन की EMI? जानें ब्याज दरों में कटौती को लेकर एक्सपर्ट्स की राय
RBI MPC Meeting Feb 2026: आरबीआई ने फरवरी 2025 से अब तक रेपो रेट को 6.50% से घटाकर 5.25% पर ला दिया है.
नई दिल्ली:

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अहम बैठक 4 से 6 फरवरी के बीच होने जा रही है. पिछले एक साल में रेपो रेट में 1.25% की बड़ी कटौती के बाद, अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार भी लोन सस्ता होगा? हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बार आरबीआई ब्याज दरों में कटौती पर 'ब्रेक' लगा सकता है. आइए जानते हैं कि इस फैसले के पीछे की मुख्य वजहें क्या हैं...

क्यों लग सकता है ब्याज दरों में कटौती ब्रेक?

आरबीआई ने फरवरी 2025 से अब तक रेपो रेट को 6.50% से घटाकर 5.25% पर ला दिया है. एक्सपर्ट्स  का कहना है कि महंगाई अब अपने निचले स्तर से दोबारा ऊपर आने लगी है, इसलिए केंद्रीय बैंक अब और जोखिम लेने से बचेगा. 

डीबीएस बैंक की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सीनियर इकोनॉमिस्ट राधिका राव के अनुसार, सरकार राजकोषीय घाटा कम करने पर ध्यान दे रही है, इसलिए मौद्रिक नीति में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद कम है.

रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेश की चिंता

भारतीय रुपया इस समय अपने नए निचले स्तर पर पहुंच गया है और लगातार दबाव में है. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर आरबीआई ब्याज दरों में और कटौती करता है, तो विदेशी निवेशक भारत से अपना पैसा निकाल सकते हैं, जिससे रुपया और कमजोर हो सकता है. इसी 'रेट-सेंसिटिव' निवेश को बचाने के लिए आरबीआई सतर्क रुख अपना रहा है.

बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने पर जोर

भले ही ब्याज दरें न घटें, लेकिन आरबीआई बैंकिंग सिस्टम में कैश फ्लो बढ़ाने के लिए कदम उठा रहा है. आरबीआई ने हाल ही में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए कई उपायों की घोषणा की है, जिसके तहत बैंकिंग सिस्टम में 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम डाली जाएगी. इसके लिए ओपन मार्केट में बॉन्ड खरीद, फॉरेन एक्सचेंज स्वैप और वेरिएबल रेट रेपो ऑपरेशन का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि बैंकों के पास कर्ज देने के लिए पर्याप्त पैसा रहे.

बॉन्ड मार्केट और बजट का असर

यूनियन बजट 2026 में सरकार की उधारी के लक्ष्य काफी अधिक रखे गए हैं. ऐसे में आरबीआई की प्राथमिकता उधारी की लागत को काबू में रखना है. एसबीआई रिसर्च का सुझाव है कि आरबीआई को बाजार में स्थिरता लाने के लिए अधिक लिक्विड बॉन्ड की खरीद (OMO) करनी चाहिए, ताकि ब्याज दरों का सही लाभ बाजार के हर हिस्से तक पहुंच सके.

एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, आरबीआई ने रेपो रेट में 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है और चालू वित्त वर्ष में ओएमओ के जरिए 6.6 लाख करोड़ रुपए की लिक्विडिटी डाली है. इसके बावजूद बॉन्ड यील्ड में ज्यादा गिरावट नहीं आई है, क्योंकि लिक्विडिटी का असर बाजार के सभी हिस्सों में बराबर नहीं पड़ा.

एसबीआई रिसर्च का सुझाव है कि आरबीआई को ऐसे बॉन्ड में ओएमओ करना चाहिए जो ज्यादा लिक्विड हों, ताकि यील्ड पर सही असर दिखे. उदाहरण के तौर पर, आरबीआई मौजूदा 10 साल के 6.48 प्रतिशत (2035) बॉन्ड की बजाय 6.33 प्रतिशत (2035) वाले पुराने 10 साल के बॉन्ड में ओएमओ कर सकता है.
 

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