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RBI की मीटिंग से पहले आई बड़ी खबर! खुशखबरी के बीच वित्त मंत्रालय ने क्यों दी बड़ी चेतावनी?

RBI की MPC मीटिंग से पहले वित्त मंत्रालय की मंथली इकोनॉमिक रिव्यू रिपोर्ट आई है. इसमें भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के साथ-साथ थोक महंगाई, मानसून और पश्चिम एशिया संकट जैसी बड़ी चुनौतियों पर अलर्ट जारी किया गया है. जानिए क्या आपकी जेब पर इसका असर पड़ेगा.

RBI की मीटिंग से पहले आई बड़ी खबर! खुशखबरी के बीच वित्त मंत्रालय ने क्यों दी बड़ी चेतावनी?
RBI की महत्वपूर्ण एमपीसी (MPC) मीटिंग शुरू होने वाली है.

RBI की महत्वपूर्ण एमपीसी (MPC) मीटिंग शुरू होने वाली है और हर किसी की नजर इस बात पर है कि ब्याज दरें बढ़ेंगी या घटेंगी. इसी बीच वित्त मंत्रालय की तरफ से एक ऐसी रिपोर्ट आई है जिसने एक तरफ तो देश की मजबूत इकोनॉमी की तारीफ की है, लेकिन दूसरी तरफ कुछ ऐसे खतरों की तरफ इशारा किया है जो आपकी जेब का बजट बिगाड़ सकते हैं. पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और इस साल कम मानसून की आशंका ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर सरकार ने किस बात पर सावधान किया है.

इकोनॉमी की मजबूती बरकरार

वित्त मंत्रालय ने अपनी ताजा 'मंथली इकोनॉमिक रिव्यू' रिपोर्ट में कहा है कि भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है. मजबूत सेवा निर्यात, पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर श्रम बाजार ने हमारी अर्थव्यवस्था को पूरा सहारा दिया है. अप्रैल 2026 में भी ई-वे बिल जनरेशन और बिजली की खपत में अच्छी बढ़त देखी गई है जो दिखाता है कि देश के अंदर सब कुछ ठीक चल रहा है. लेकिन इस चमक के पीछे कुछ ऐसे काले बादल भी हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

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इन 4 मोर्चों पर बढ़ा खतरा

रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की ऊंची कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी, उत्पादन लागत में बढ़ता दबाव और इस साल सामान्य से कम मानसून की आशंका बड़ी मुसीबत बन सकती है. इन वजहों से नीति निर्माताओं को लगातार अलर्ट रहने की जरूरत है. वित्त वर्ष 2026-27 में विकास की रफ्तार बनाए रखने और महंगाई को काबू में रखने के लिए सरकार को बहुत फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा क्योंकि दुनिया के हालात इस समय बहुत ज्यादा अनिश्चित बने हुए हैं.

पश्चिम एशिया का तनाव बना आफत

पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष कमजोर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हो रहा है. इसका सीधा असर ऊर्जा बाजार, सप्लाई चेन और व्यापार मार्गों पर दिखने लगा है. Strait of Hormuz में अगर सप्लाई लंबे समय तक रुकी रहती है तो यह भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात होगी. इसके कारण ऊर्जा, परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत लगातार बढ़ रही है जिसके चलते दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में 'स्टैगफ्लेशन' यानी कम विकास और ऊंची महंगाई का खतरा मंडराने लगा है.

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थोक महंगाई ने बढ़ाई टेंशन

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात थोक महंगाई (WPI) का तेजी से बढ़ना है. अप्रैल के आंकड़ों के मुताबिक खुदरा महंगाई तो 3.48 प्रतिशत पर काबू में है, लेकिन थोक महंगाई छलांग लगाकर 8.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है. इसका मुख्य कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल और रुपए की कमजोरी है. रिपोर्ट का मानना है कि थोक बाजार की यह तेजी आने वाले महीनों में ईंधन और परिवहन लागत के जरिए आम जनता की खुदरा महंगाई को भी बढ़ा सकती है.

मानसून और विलेन का रोल

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अनुमान जताया है कि इस साल मानसून दीर्घकालिक औसत का लगभग 92 प्रतिशत ही रह सकता है. राहत की बात यह है कि देश के पास 817 लाख टन से ज्यादा का बफर स्टॉक मौजूद है और जलाशयों में भी पानी ठीक है. लेकिन अगर बारिश में बड़ी कमी आती है और खाड़ी देशों का तनाव यूं ही बना रहता है, तो देश में खाद्य महंगाई बढ़ सकती है. इससे ग्रामीण इलाकों में मांग कमजोर होगी और देश की कुल आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ सकती है.

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