सरकार की डिजिटल मुहीम के जरिए देश में बैंकिंग करना आसान हुआ है. ग्राहक पलक झपकते ही एक जगह से दूसरी जगह पैसे आसानी से भेज देते हैं. हर सिक्के के दो पहलू हैं. जहां एक तरफ लोगों को राहत तो मिली है पर दूसरी तरफ साइबर ठगी के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं. ठगों ने ठगी करने के लिए अलग-अलग तरीके निजात कर लिए हैं. एक ऐसा ही तरीका है मनी म्यूल का. ये समस्या अब समाज में अपने पैर पसार रही है. इसी को देखते हुए आरबीआई ने ग्राहकों को चेतावनी देते हुए कहा कि मनी म्यूल ना बनें. चलिए इस खबर में बताते हैं कि रिजर्व बैंक ने क्या कहा है और आखिर ये मनी म्यूल क्या बला है?

क्या है मनी म्यूल?
आसान भाषा मे समझाएं तो जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक अकाउंट में पैसा मंगाता है और फिर उस पैसे को किसी दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर कर देता है, तो इसे मनी म्यूल कहते हैं. अमूमन ये अमाउंट साइबर ठगी, धोखाधड़ी, लॉटरी स्कैम या दूसरे क्राइम से कमाया होता है. पुलिस ऐसे पैसे को ट्रैक ना कर पाए, इसलिए ठग सीधे अपने अकाउंट में पैसे नहीं मंगवाते हैं. ऐसे में आम नागरिक के अकाउंट का इस्तेमाल किया जाता है.
एक गलती पड़ेगी भारी
आरबीआई के अनुसार ग्राहकों का बैंक अकाउंट ही उनकी पूंजी है. इसलिए एक कोई व्यक्ति आपके बैंक अकाउंट से पैसे का लेनदेन करता है तो आपको भी इस अपराध में शामिल माना जाएगा. यानी ठग के साथ आपको भी जेल की हवा खानी पड़ सकती है. साथ में अकाउंट भी हमेशा के लिए बंद हो सकता है.
आरबीआई कहता है- ऐसे बचें मनी म्यूल से
मनी म्यूल समस्याओं से बचने के लिए आरबीआई ने ग्राहकों को तीन तरीकों के बारे में बताया है. पहला तो ये कि पैसे ट्रांसफर करने या फिर मंगाने के लिए किसी भी दूसरे शख्स को अपना अकाउंट ना चलाने दें. भले ही वो आपका कितना भी करीबी क्यों ना हो. दूसरा तरीका आपकी निजी जानकारी को लेकर है. यानी अपना अकाउंट नंबर, एटीएम पिन, इंटरनेट बैंकिंग के पासवर्ड या ओटीपी की जानकारी किसी के साथ साझा ना करें. ना ही किसी बैंक अधिकारी के साथ. आखिर में लालच से दूर रहना ही फायदेमंद है. यानी कमाई के चक्कर में किसी भी गलत रास्ते का चुनाव ना करें.
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