देश की अर्थव्यवस्था को लेकर दुनिया के निवेशकों की दिलचस्पी बनी रहे, इस संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नई दिल्ली में आयोजित 'ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम' में दिया गया संबोधन खास रहा. इस मंच पर दुनिया भर से आए अंतरराष्ट्रीय निवेशकों, नीति निर्माताओं और ग्लोबल कंपनियों के CEOs के सामने प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक स्थिति, सरकारी नीतियों और भविष्य की ग्रोथ स्ट्रैटजी पर बात की.
प्रधानमंत्री का संदेश साफ था- भारत में आर्थिक सुधार केवल जरूरत के कारण नहीं किए जा रहे, बल्कि ये सरकार का दृढ़ विश्वास हैं. वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताओं, युद्ध और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत खुद को एक स्थिर और भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के रूप में पेश कर रहा है.
प्रधानमंत्री के इस संबोधन में निवेश के लिहाज से कौन-सी बातें अहम रहीं, हमने ये समझने की कोशिश की है.
भारत की GDP ग्रोथ मजबूत
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत बताते हुए GDP ग्रोथ और बाहरी आर्थिक मोर्चे से जुड़े आंकड़ों का जिक्र किया. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही. इसके साथ ही उन्होंने चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit यानी CAD) में आई कमी और देश के विदेशी मुद्रा भंडार को भी आर्थिक मजबूती का संकेत बताया.
बैंकिंग सिस्टम पर उन्होंने कहा कि ये मजबूत स्थिति में है. वहीं सॉवरिन रेटिंग का भी उन्होंने जिक्र किया, जो कि भारत की आर्थिक और वित्तीय स्थिति में सुधार का संकेत देता है.
करंट अकाउंट डेफिसिट यानी चालू खाते का घाटा किसी देश के विदेशी लेनदेन की स्थिति को समझने का एक अहम पैमाना है. प्रधानमंत्री ने बताया कि 12-13 साल पहले भारत का CAD GDP के 4% से ज्यादा हुआ करता था, जो पिछले साल घटकर 0.61% रह गया.
निवेशकों के लिए ये आंकड़े इसलिए अहम हैं, क्योंकि आर्थिक विकास के साथ विदेशी भुगतान की स्थिति और विदेशी मुद्रा भंडार की मजबूती भी किसी देश की वित्तीय स्थिरता को समझने में मदद करती है.
रिफॉर्म्स को लेकर पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के लिए आर्थिक सुधार मजबूरी नहीं, बल्कि दृढ़ विश्वास का विषय हैं. इसका मतलब है कि सरकार सुधारों को केवल किसी संकट से निपटने का उपाय नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था को लंबे समय में मजबूत बनाने के साधन के रूप में देखती है. उन्होंने कई प्रमुख सुधारों का जिक्र किया.
GST रिफॉरम, इंसॉल्वेंसी कानून, लेबर कोड और छोटे कारोबारी अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने जैसे महत्वपूर्ण कदमों की उन्होंने चर्चा की कहा कि ऐसे कदमों का मकसद कारोबारियों पर अनावश्यक कानूनी दबाव कम करना और कारोबारी माहौल को बेहतर बनाना है.
इन सुधारों के जरिए उन्होंने ये संदेश दिया गया कि भारत में कारोबार करना आसान बनाने, नियमों को सरल करने और लंबे समय के निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है.
'Power to Empower' का विजन सामने रखा
प्रधानमंत्री मोदी ने टेक्नोलॉजी, डेटा, नॉलेज और इनोवेशन को 21वीं सदी में शक्ति के नए स्रोत बताया. उनके मुताबिक, असली सवाल सिर्फ ये नहीं है कि शक्ति किसके पास है, बल्कि ये है कि उसका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है. इसी सोच को उन्होंने 'Power to Empower' यानी दूसरों को सशक्त बनाने के विजन से जोड़ा.
भारत में मोबाइल डेटा की किफायत, डिजिटल सेवाओं का विस्तार और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर इस सोच के अहम उदाहरण हैं. किफायती इंटरनेट के जरिए छोटे शहरों और कस्बों के विद्यार्थियों के लिए भी डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन जानकारी तक पहुंच आसान हुई है.
इसी तरह, UPI ने डिजिटल भुगतान को आम लोगों और कारोबारियों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए पहचान, भुगतान और अन्य डिजिटल सेवाओं को बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराने का भारतीय अनुभव भी दुनिया के कई देशों के लिए चर्चा का विषय रहा है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपने डिजिटल इकोसिस्टम के अनुभवों को ग्लोबल साउथ और दूसरे साझेदार देशों के साथ साझा कर रहा है.
निवेशकों के लिहाज से इसका महत्व केवल टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं है. डिजिटल सेवाएं कारोबार की लागत, वित्तीय समावेशन, सेवाओं की पहुंच और नए कारोबारी अवसरों को भी प्रभावित कर सकती हैं.
ग्लोबल निवेशकों के लिए भारत का संदेश क्या है?
प्रधानमंत्री के संबोधन का एक प्रमुख पहलू वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भरोसे और स्थिरता पर जोर देना रहा. आज दुनिया में सप्लाई चेन, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी से जुड़े मुद्दे कारोबार और निवेश के फैसलों को प्रभावित करते हैं. ऐसे माहौल में निवेशक केवल बाजार के आकार या आर्थिक विकास दर को नहीं देखते, बल्कि नीतियों की निरंतरता, नियामकीय व्यवस्था और कारोबारी माहौल को भी महत्व देते हैं.
प्रधानमंत्री ने भारत को एक स्थिर और भरोसेमंद साझेदार के रूप में पेश किया. उनका संदेश था कि भारत दुनिया के साथ और दुनिया के लिए आगे बढ़ने में विश्वास रखता है. देश की आर्थिक ग्रोथ, विदेशी मुद्रा भंडार, बैंकिंग सिस्टम और सुधारों का जिक्र इसी व्यापक संदेश का हिस्सा था. इसके जरिए निवेशकों को बताया गया कि देश विकास के साथ संस्थागत और नीतिगत मजबूती पर भी ध्यान दे रहा है.
हालांकि, निवेश के वास्तविक फैसले केवल किसी भाषण या सरकारी संदेश के आधार पर नहीं होते. निवेशक कंपनियों की कमाई, बाजार की मांग, नीतियों के क्रियान्वयन, जोखिम और संभावित रिटर्न का भी आकलन करते हैं.
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन चार प्रमुख संदेशों के इर्द-गिर्द रहा- मजबूत आर्थिक विकास, लगातार सुधार, टेक्नोलॉजी के जरिए लोगों को सशक्त बनाना और वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद साझेदार के रूप में भारत की भूमिका.
अपने संबोधन में PM मोदी ने ये संदेश देना चाहा कि भारत ने खुद को सिर्फ तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में नहीं, बल्कि सुधारों, डिजिटल विकास और वैश्विक साझेदारी पर जोर देने वाले देश के रूप में पेश किया है.
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