रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की एमपीसी यानी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक 3 जून से 5 जून 2026 तक होनी है. इसके बाद 5 जून को आरबीआई गवर्नर रेपो रेट को लेकर रिजर्व बैंक के फैसलों के बारे में बताएंगे. इससे पहले ग्लोबल ब्रोकरेज फर्मों ने ब्याज दरों पर अपनी राय रखी हैं. जहां सिटी ने आने वाले समय दो बार ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका जताई है, वहीं गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा.
सिटी और गोल्डमैन सैक्स के अनुमानों में बड़ा अंतर
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म सिटी का मानना है कि महंगाई के मोर्चे पर बढ़ते रिस्क को देखते हुए आरबीआई को ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला लेना पड़ सकता है. सिटी ने भविष्य की बात करते हुए कहा है कि आने वाले समय में रिजर्व बैंक रेपो रेट में 25-25 बेसिस पॉइंट की दो बढ़ोतरी कर सकता है. ये बढ़ोतरी अगस्त और अक्टूबर की मॉनेटरी पॉलिसी में देखने को मिल सकती है.
हालांकि इसके उलट, गोल्डमैन सैक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रिजर्व बैंक जून की इस बैठक में रेपो रेट को स्टेबल रख सकता है. पर गोल्डमैन सैक्स ने आगे कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई को देखते हुए आरबीआई का फॉरवर्ड गाइडेंस काफी कड़ा होगा. उनके अनुसार, रेपो रेट में कटौती की संभावना अभी दूर-दूर तक नहीं है और रिजर्व बैंक विड्रॉल ऑफ एकोमोडेशन यानी आने वाले समय में अपने रुख को और कड़ा कर सकता है.
लेना होगा कड़ा फैसला- बैंक ऑफ अमेरिका
इस बीच, बैंक ऑफ अमेरिका ग्लोबल रिसर्च ने भी अपनी राय साझा की है. बैंक ऑफ अमेरिका का दावा है कि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मिडिल ईस्ट टेंशन के चलते सप्लाई चेन पर पड़े असर को देखते हुए रिजर्व बैंक को मॉनेटरी पॉलिसी पर बड़ा फैसला लेना होगा. आरबीआई के सामने देश की विकास की रफ्तार को बनाए रखने और महंगाई को 4% के टारगेट के दायरे में बनाए रखने की बड़ी चुनौती है.
आम आदमी के लिए क्या हैं मायने
मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि अगर आरबीआई सिटी के अनुमानों के अनुसार दरों में बढ़ोतरी का रास्ता चुनता है, तो इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई महंगी हो सकती है. वहीं दूसरी तरफ अगर गोल्डमैन सैक्स की बात सच साबित होती है, तो इंडस्ट्री के साथ और बढ़ी ब्याज दरों से कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है. अब सभी की निगाहें 5 जून को होने वाले आरबीआई गवर्नर के बयान पर टिकी हैं.
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