घर में पाइपलाइन से आने वाली रसोई गैस में जल्द हाइड्रोजन मिलाने की तैयारी है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) में 5% तक हाइड्रोजन मिलाने के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की हैं. इसका मकसद हाइड्रोजन मिली गैस की सप्लाई शुरू करने के लिए जरूरी नियम तय करना है. हालांकि, अभी इसे कमर्शियल तौर पर शुरू करने की मंजूरी नहीं मिली है.
हर घर में तुरंत नहीं पहुंचेगी हाइड्रोजन वाली गैस
इस प्रस्ताव के तहत शुरुआत में चुनिंदा इलाकों में ही हाइड्रोजन और प्राकृतिक गैस का मिश्रण सप्लाई किया जाएगा. ऐसे छोटे इलाके चुने जाएंगे, जहां गैस की सप्लाई एक ही इंजेक्शन पॉइंट से हो और उसकी निगरानी आसानी से की जा सके. फिलहाल यह प्रस्ताव सिर्फ घरेलू PNG उपभोक्ताओं के लिए है, पूरे शहर के गैस नेटवर्क के लिए नहीं.जिन डिस्ट्रीक्ट रेगुलेटिंग स्टेशनों से घरेलू और दूसरे उपभोक्ताओं तक जाने वाली गैस को अलग-अलग नियंत्रित नहीं किया जा सकता, वहां से इस तरह की सप्लाई की अनुमति नहीं देने का प्रस्ताव है.
पाइपलाइन और गैस चूल्हे की होगी जांच
हाइड्रोजन मिलाने से पहले कंपनियों को पाइपलाइन, मीटर, रेगुलेटर और घरों में इस्तेमाल होने वाले गैस उपकरणों की जांच करनी होगी. इंदौर और शांतिग्राम में हुए पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों को हर गैस नेटवर्क और उपकरण के लिए सुरक्षित होने का प्रमाण नहीं माना जाएगा. गैस में हाइड्रोजन की मात्रा, दबाव और फ्लो की लगातार निगरानी भी जरूरी होगी. गलत रीडिंग, तय सीमा से ज्यादा हाइड्रोजन, गैस का फ्लो रुकने, गैस लीक या आग का अलार्म बजने, इमरजेंसी शटडाउन, असुरक्षित दबाव या तापमान और बिजली या जरूरी कंट्रोल सिस्टम फेल होने पर हाइड्रोजन की सप्लाई अपने आप बंद करनी होगी.
क्या महंगा होगा रसोई गैस का बिल?
इस ड्राफ्ट में उपभोक्ताओं के बिल को लेकर भी खास नियम रखा गया है. हाइड्रोजन मिलाने से गैस में मिलने वाली ऊर्जा कम होती है, इसलिए बिल में इसका हिसाब रखना होगा. ग्राहकों से उतनी ऊर्जा का पैसा नहीं लिया जाना चाहिए, जितनी उन्हें मिली ही नहीं. कंपनियों को बिल में बदलाव का आधार भी बताना होगा. अगर सही आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं या उनमें गड़बड़ी है, तो बिल का अनुमान उपभोक्ता के पक्ष में लगाने का प्रस्ताव है. ऐसे में बिल पर कितना असर पड़ेगा, यह हाइड्रोजन की मात्रा और बिलिंग के हिसाब पर निर्भर करेगा.
कब शुरू होगी हाइड्रोजन ब्लेंडिंग?
कमर्शियल सप्लाई शुरू करने के लिए जरूरी कानूनी और नीतिगत मंजूरी, PNGRB की खास अनुमति और दूसरी संबंधित एजेंसियों की मंजूरी लेनी होगी. सिर्फ ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी होने से कंपनियों को हाइड्रोजन मिलाने का अधिकार नहीं मिल जाता. सप्लाई शुरू होने से पहले उपभोक्ताओं को आम तौर पर कम से कम 30 दिन का नोटिस देना होगा. इसमें हाइड्रोजन की मात्रा, गैस में बदलाव, उपकरणों से जुड़ी सावधानियां, इमरजेंसी में क्या करना है, बिलिंग में बदलाव और शिकायत करने के तरीके की जानकारी देनी होगी.इसके बाद कम से कम छह महीने तक ट्रायल ऑपरेशन और हर महीने रिपोर्टिंग का प्रावधान है. स्वतंत्र जांच भी करानी होगी. छह महीने पूरे होने का मतलब यह नहीं कि नियमित सप्लाई अपने आप शुरू हो जाएगी. इसके लिए PNGRB की लिखित पुष्टि जरूरी होगी.
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