मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है. पिछले तीन कारोबारी दिनों में क्रूड ऑयल में 8% से ज्यादा का उछाल आया है. इस जोरदार तेजी के बाद फिलहाल ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है. वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI Crude) भी 91 डॉलर प्रति बैरल के के आसपास कारोबार कर रहा है.
अमेरिका-ईरान जंग के बीच ट्रंप की चेतावनी
अमेरिका और ईरान के बीच नए सैन्य हमलों ने ऑयल मार्केट में भूचाल ला दिया है. अमेरिकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस, रडार सिस्टम और समुद्री ठिकानों पर जोरदार हमले किए हैं.सात महीनों से जारी इस युद्ध में दोनों देशों के बीच जुलाई के बाद से यह सबसे बड़ा सीधा हमला माना जा रहा है.ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर जरूरत पड़ी, तो अमेरिका दोबारा भारी हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है.इसके जवाब में ईरान ने भी जॉर्डन,कुवैत, बहरीन, इराक और यूएई (UAE)में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है.
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि यह सैन्य कार्रवाई बहुत लंबे समय तक नहीं चलेगी, जिससे बाजार में थोड़ी राहत भी देखने को मिली.
होर्मुज पर फिर मंडरा रहा तेल सप्लाई का खतरा
दुनियाभर में होने वाले तेल की सप्लाई के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) सबसे अहम रूट माना जाता है. इस तनाव की वजह से इस समुद्री रास्ते से तेल की आवाजाही प्रभावित हुई है. हालांकि, हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज के रास्ते रोजाना करीब 1.70 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजर रहा है, जो जंग शुरू होने के बाद सबसे ज्यादा है. लेकिन सामान्य दिनों (2 करोड़ बैरल रोजाना) के मुकाबले यह सप्लाई अभी भी कम है. ईरान की तरफ से नए प्रतिबंधों और चेकिंग के बाद जहाजों की आवाजाही घटी है. ईरान ने कई नए विदेशी जहाजों को अपनी लिस्ट में डालकर जुर्माना लगाने या जब्त करने की धमकी दी है.
इस साल 60% महंगा हुआ कच्चा तेल
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के असर की वजह से इस साल 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल करीब 60 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है. केवल क्रूड ही नहीं, बल्कि डीजल जैसे रिफाइंड फ्यूल की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है. ग्लोबल मार्केट में सप्लाई रुकने का खतरा अभी भी बना हुआ है. अकेले इस हफ्ते में ही अमेरिकी तेल की कीमतों में 9% का उछाल आ चुका है.
भारत पर क्या होगा इसका सीधा असर?
भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की यह तेजी भारत के लिए बड़ी चिंता की बात है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम लंबे समय तक ऊंचे रहने से भारत के लिए कई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं.
कच्चा तेल महंगा होने से देश का इंपोर्ट बिल यानी आयात खर्च काफी बढ़ जाएगा.अगर कच्चे तेल की कीमतें $95 के ऊपर बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में देश के भीतर पेट्रोल-डीजल के दामों पर असर दिख सकता है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड महंगा रहने से देश के भीतर ट्रांसपोर्टेशन महंगा होता है,जिसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामानों के दाम बढ़ सकते हैं.
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