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IPO से पहले NSE को सेल रेटिंग, ब्रोकरेज ने बताया- क्यों घट रहा है भरोसा

आईपीओ से पहले एनएसई को लेकर एक ब्रोकरेज फर्म ने बिकवाली की सलाह दी है. फर्म का कहना है कि ट्रेडिंग वॉल्यूम और मार्केट शेयर में गिरावट की वजह से मौजूदा वैल्यूएशन को बनाए रखना आसान नहीं होगा.

IPO से पहले NSE को सेल रेटिंग, ब्रोकरेज ने बताया- क्यों घट रहा है भरोसा
एनएसई पर ब्रोकरेज की बिकवाली राय.

देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज एनएसई का आईपीओ आने वाला है. लेकिन उससे पहले एक ब्रोकरेज फर्म ने इसके शेयरों पर बिकवाली की सलाह दी है. इसकी वजह एक्सचेंज में घटता ट्रेडिंग वॉल्यूम और कम होता मार्केट शेयर बताया गया है. आमतौर पर किसी कंपनी के आईपीओ से पहले ब्रोकरेज फर्म उसकी कवरेज शुरू नहीं करती. ऐसे में इस रिपोर्ट को काफी रेयर माना जा रहा है.

ब्रोकरेज ने बिकवाली की सलाह क्यों दी?

स्थानीय ब्रोकरेज फर्म दौलत कैपिटल मार्केट प्राइवेट लिमिटेड ने पहली बार एनएसई की कवरेज शुरू की है. फर्म ने सीधे 'बिकवाली' की रेटिंग दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इक्विटी डेरिवेटिव्स मार्केट में एनएसई का ट्रेडिंग वॉल्यूम लगातार घट रहा है. इसका असर उसके मार्केट शेयर पर भी पड़ रहा है. ऐसे में कंपनी के लिए मौजूदा ऊंचे वैल्यूएशन को लंबे समय तक बनाए रखना आसान नहीं होगा.

टारगेट प्राइस मौजूदा कीमत से 26% कम

दौलत कैपिटल ने एनएसई के शेयर का टारगेट प्राइस 1,550 रुपए रखा है. यह अनलिस्टेड मार्केट में चल रही मौजूदा कीमत 2,085 रुपए से करीब 26% कम है. यानी ब्रोकरेज का मानना है कि अभी शेयर जिस कीमत पर ट्रेड हो रहा है, वह उसकी मौजूदा स्थिति के मुकाबले ज्यादा है.

कमाई के आंकड़े क्या बताते हैं?

एनएसई का परिचालन प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में कमजोर हुआ है. कंपनी की कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्जेज और क्लियरिंग एंड सेटलमेंट सर्विसेज से आता है. लेकिन इन दोनों से होने वाली आय में गिरावट देखने को मिली है. सेबी के पास जमा रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में एनएसई की कुल परिचालन आय 16,601.30 करोड़ रुपए रही. एक साल पहले यानी वित्त वर्ष 2025 में यह 17,140.67 करोड़ रुपए थी. यानी सालाना आधार पर इसमें 3% से ज्यादा की गिरावट आई.

वहीं ट्रांजैक्शन चार्जेज से होने वाली आय भी 13,635.76 करोड़ रुपए से घटकर 13,057.01 करोड़ रुपए रह गई. यह सालाना आधार पर करीब 4% की गिरावट दिखाती है. यही वजह है कि ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि अगर ट्रेडिंग वॉल्यूम और मार्केट शेयर में सुधार नहीं होता, तो कंपनी के लिए मौजूदा वैल्यूएशन को सही ठहराना मुश्किल हो सकता है.

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