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Insurance Claims: दंगे में फूंक दी कार? मायूस ना हों, इंश्योरेंस में ये एड कराते ही मिलेगा इनवॉइस के बराबर पैसा!

Insurance Claims: नोएडा में हुए कर्मचारियों के प्रोटेस्ट के बाद कारों को बड़ा नुकसान पहुंचा है. क्या आपकी कार इंश्योरेंस पॉलिसी दंगों और तोड़फोड़ को कवर करती है? जानिए क्लेम की प्रोसेस और जरूरी एड-ऑन्स के बारे में.

Insurance Claims: दंगे में फूंक दी कार? मायूस ना हों, इंश्योरेंस में ये एड कराते ही मिलेगा इनवॉइस के बराबर पैसा!

Insurance Claims: नोएडा में सैलरी को लेकर बढ़े कर्मचारियों के आक्रोश ने कई आम लोगों की मेहनत की कमाई यानी उनकी कारों को राख के ढेर में बदल दिया. सड़कों पर कई लंबी लाइनें देखने को मिलेंगी जहां कारें जली हुई पड़ी हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आपकी कार दंगों की भेंट चढ़ गई, तो आपको सिर पकड़ने की जरूरत नहीं है? आपकी बीमा पॉलिसी आपकी ढाल बन सकती है. दरअसल कार इंश्योरेंस सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि आपकी फाइनेंशियल सेफ्टी का सबसे बड़ा हथियार साबित होता है.

क्या दंगों में हुआ नुकसान कवर होता है?

सबसे बड़ा सवाल यही है. इसका सीधा जवाब है, हां, लेकिन ये सीधे तौर पर कंपनी नहीं देतीं बल्कि इसमें एक पेंच फंसा है. अगर आपके पास केवल थर्ड पार्टी इंश्योरेंस है, तो आपको एक पैसा भी नहीं मिलेगा. दंगों, हड़ताल से होने वाले नुकसान की भरपाई केवल कंप्रिहेंसिव कार इंश्योरेंस के जरिए ही की जाती है. इसे बीमा की भाषा में Own Damage कवर कहा जाता है. इसमें आगजनी और दंगों के दौरान हुई तोड़फोड़ शामिल है.

रिटर्न टू इनवॉइस का कमाल

मान लीजिए आपके पास फर्स्ट पार्टी इंश्योरेंस है. अगर दंगे में आपकी कार को निशाना बनाया जाता है तो कंपनी आपको सिर्फ IDV वैल्यू के बराबर क्लेम दे देगी. यानी आपने कार साल 2020 में 10 लाख की खरीदी, जिसकी 6 साल बाद IDV वैल्यू 5 लाख है तो सिर्फ 5 लाख तक ही आपको पैसा मिलेगा. पर अगर आपने रिटर्न टू इनवॉइस का एड ऑन लिया हुआ है तो कंपनी फिर आपके इनवॉइस वैल्यू के हिसाब से यानी 10 लाख रुपये का पैसा देगी.

क्लेम के लिए ये 3 कदम सबसे जरूरी

दंगों या चोरी के मामले में पुलिस में FIR कराना सबसे पहला काम है. बिना FIR कॉपी के बीमा कंपनी आपके क्लेम को खारिज कर सकती है. इसके अलावा घटनास्थल की फोटो और वीडियो जरूर लें. ये साबित करने में मदद करेगा कि नुकसान दंगे की वजह से हुआ है ना कि किसी की लापरवाही से. वहीं आखिर में घटना के 24 से 48 घंटों के अंदर अपनी बीमा कंपनी को इसके बारे में जानकारी दें. देरी करने पर क्लेम प्रोसेस मुश्किल हो सकता है.

इन गलतियों से बचें

अक्सर लोग जोश में आकर कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं जिससे बीमा कंपनी क्लेम रिजेक्ट कर देती है. जैसे कि अगर कार में आग लगी है या पानी घुसा है, तो उसे खुद स्टार्ट करने की कोशिश ना करें. इससे कंपनी इंजन कवर देने से मना कर सकती है. वहीं अगर आपको पता है कि किसी इलाके में कर्फ्यू या दंगा लगा है और आप जानबूझकर वहां गाड़ी ले जाते हैं, तो कंपनी इसे आपकी लापरवाही मानकर क्लेम देने से मना कर सकती है.

RTI के साथ कवर में लें ये दो एड-ऑन्स

सिर्फ बेसिक पॉलिसी काफी नहीं होती. आपको अपनी पॉलिसी में दो एड-ऑन्स जरूर जुड़वाना चाहिए. पहला इंजन प्रोटेक्शन कवर, जो दंगों के समय अक्सर रेडिएटर फटने या पानी घुसने से इंजन खराब होता है, जो बेसिक पॉलिसी में कवर नहीं होता. इसके अलावा जीरो डेप्रिसिएशन का कवर होने पर आपको प्लास्टिक, रबर और फाइबर पार्ट्स की पूरी कीमत मिलती है, वरना आपको अपनी जेब से 30 से 50% खर्च उठाना पड़ सकता है.

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